बलदेव/मथुरा। ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा में इस बार भक्ति, सेवा, त्याग और पारिवारिक संस्कारों का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला जिसने हजारों श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया।
हरियाणा के पलवल जनपद के हताना गांव निवासी प्रसिद्ध लोक कलाकार एवं गायिका काजल चौधरी अपनी 95 वर्षीय सास चन्द्री देवी (चांदनी देवी) को सिर पर टब में बैठाकर ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा करा रही हैं। उनकी यह अनूठी सेवा भावना पूरे ब्रज मंडल में चर्चा का विषय बनी हुई है।
जैसे ही काजल चौधरी अपनी सास को सिर पर बैठाकर बलदेव पहुंचीं, उन्हें देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने पुष्पमालाओं से स्वागत कर उनकी सेवा भावना को नमन किया। परिक्रमा मार्ग पर मौजूद श्रद्धालुओं का कहना था कि आज के समय में जहां रिश्तों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं, वहीं काजल चौधरी ने अपनी सास की इच्छा को अपना संकल्प बनाकर समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

बताया जाता है कि 95 वर्षीय चन्द्री देवी की लंबे समय से इच्छा थी कि वह भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थली ब्रजभूमि की चौरासी कोस परिक्रमा करें। लेकिन अधिक उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण उनके लिए यह यात्रा संभव नहीं थी। सास की इस इच्छा को पूरा करने के लिए बहू काजल चौधरी ने बड़ा निर्णय लिया और उन्हें टब में बैठाकर सिर पर उठाते हुए परिक्रमा कराने का संकल्प लिया। कठिन मार्ग और भीषण गर्मी के बावजूद वह पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ यात्रा कर रही हैं।
परिक्रमा मार्ग पर जहां-जहां यह दृश्य पहुंच रहा है, वहां श्रद्धालु भावुक हो उठ रहे हैं। कई लोगों ने काजल चौधरी को कलयुग की श्रवण कुमार की संज्ञा दी। श्रद्धालुओं का कहना है कि भारतीय संस्कृति में माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है और काजल चौधरी उसी परंपरा को जीवंत कर रही हैं।
परिक्रमा के दौरान काजल चौधरी अपनी सास के साथ श्री दाऊजी महाराज मंदिर पहुंचीं और दर्शन-पूजन कर परिवार तथा समस्त श्रद्धालुओं के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। बलदेव में नगरवासियों ने जयघोष, पुष्पवर्षा और माल्यार्पण कर उनका अभिनंदन किया।
इस अवसर पर काजल चौधरी ने कहा, “सास भी मां के समान होती है। मेरी सास की वर्षों पुरानी इच्छा थी कि वह ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा करें। उनकी यही इच्छा मेरे लिए संकल्प बन गई। माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। श्री दाऊजी महाराज की नगरी में जो सम्मान और स्नेह मिला है, उसे मैं जीवनभर नहीं भूल पाऊंगी।”
ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं, लेकिन काजल चौधरी द्वारा अपनी 95 वर्षीय सास को सिर पर बैठाकर कराई जा रही यह यात्रा श्रद्धा, सेवा, त्याग और पारिवारिक मूल्यों की ऐसी मिसाल बन गई है जिसकी चर्चा पूरे ब्रज क्षेत्र में हो रही है। यह भावनात्मक यात्रा समाज को बुजुर्गों के सम्मान, सेवा और पारिवारिक संस्कारों को सहेजने का प्रेरणादायक संदेश दे रही है।

