लखनऊ : यूपी में मानसून 24 जून तक पहुंच सकता है। आने के बाद 10 दिनों में मानसून पूरे यूपी पर छा जाएगा। आमतौर पर 18-20 जून के बीच मानसून यूपी पहुंचता है। इस बार तय समय से 4 दिन लेट है। आसार ऐसे हैं कि 20 से 25 दिन में मानसून कमजोर भी पड़ जाएगा।
4 जून से यूपी में नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव हुआ है। इसकी वजह से 7 जून तक आंधी-बारिश का मौसम बना रहेगा। इसके बाद वेस्टर्न डिस्टर्बेंस कमजोर होता जाएगा और तापमान में बढ़ोतरी होगी। मानसून ने देश में 4 दिन की देरी से 4 मई को केरलम में एंट्री ली है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि 2026 में मानसून पूर्व यूपी से एंट्री लेगा। ऐसा 2023 में भी हुआ था। इसके बाद 2 साल से मानसून बुंदेलखंड के रास्ते यूपी में एंट्री लेता आ रहा है। इसको समझिए-
2023- मानसून ने 24 जून को यूपी में बिहार के रास्ते पूर्वी यूपी और बलिया-देवरिया के क्षेत्रों से राज्य में प्रवेश किया था।
2024- मानसून का प्रवेश 25 जून को ललितपुर और झांसी के रास्ते से हुआ था, जिसने 30 जून तक पूरे राज्य को कवर कर लिया था।
2025- 18 जून को मानसून ने दस्तक दी थी। शुरुआती बारिश सोनभद्र, झांसी और ललितपुर में दर्ज की गई। यह बुंदेलखंड का हिस्सा है।
राज्य में एक नए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं के चलते जून में मौसम करवट लेता रहेगा। मौसम विभाग ने 5 और 6 जून को पूरे राज्य में बारिश और आंधी का यलो अलर्ट जारी किया है। इसके बाद वेस्टर्न डिस्टर्बेंस कमजोर पड़ने लगेगा। 7 से 9 जून के बीच पूरे यूपी में एक बार फिर तापमान बढ़ेगा। कुछ हिस्सों में लू जैसी स्थितियां दोबारा लौट सकती हैं। अल-नीनो के असर से जून महीने में रुक-रुककर गर्म हवाएं चलने की आशंका है।
आंधी-बारिश, फिर जून के अंत तक मानसून पहुंचेगा
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का सीधा असर पश्चिमी यूपी के जिलों पर ज्यादा है। मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद, बागपत, सहारनपुर और अलीगढ़ जैसे जिलों में आंधी-तूफान और बिजली चमकने की सबसे ज्यादा आशंका है। हवाएं 70-80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी। इस वजह से दिन के तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी। लोगों को गर्मी से राहत रहेगी।
7 जून से तेज धूप और राजस्थान की तरफ से आने वाली सूखी हवाओं की वजह से तापमान फिर से 44°C से 47°C तक जा सकता है। मेरठ, आगरा, अलीगढ़ और नोएडा जैसे जिलों में लू भी चलेगी। मध्य जून में गर्मी अपने चरम पर पहुंच सकती है। मानसून सबसे लेट पश्चिमी यूपी में पहुंचेगा। जून के आखिरी सप्ताह या जुलाई की शुरुआत में।
कम बारिश, उमस बढ़ेगी
पूर्वी यूपी में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर पूर्वांचल में थोड़ा धीमा रहेगा। गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, बलिया और देवरिया जिलों में बादल छाए रहेंगे। सिर्फ कुछ इलाकों में ही हल्की बूंदाबांदी या गरज-चमक देखने को मिलेगी। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं के कारण यहां उमस काफी बढ़ सकती है। तापमान में ज्यादा गिरावट नहीं होगी, जिससे चिपचिपी गर्मी होगी। हवाएं 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी।
पूर्वी यूपी में बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाओं के कारण मौसम पश्चिमी यूपी से थोड़ा अलग रहेगा। जून के दूसरे हफ्ते की शुरुआत से ही प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और बलिया जैसे जिलों में उमस भरी गर्म हवाएं ज्यादा परेशान करेंगी। चूंकि पूर्वी यूपी में मानसून 24 से 29 जून के बीच पहुंच सकता है, इसलिए 22 जून के बाद यहां बारिश का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
यूपी में 8% बारिश कम होगी
सीनियर साइंटिस्ट अतुल सिंह बताते हैं- इस साल यूपी समेत पूरे देश में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। आमतौर पर यूपी में जून से सितंबर के बीच करीब 820 से 840 मिलीमीटर बारिश होती है। लेकिन, इस साल 8% कम यानी लगभग 754 से 773 मिलीमीटर तक ही पानी बरसेगा।
खेती-किसानी पर होगा असर, महंगाई बढ़ेगी
यूपी में अल-नीनो की वजह से कम बारिश का सीधा असर राज्य की इकोनॉमी, खेती-किसानी और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ेगा। धान जैसी फसलों के उत्पादन में 20% तक की कमी आ सकती है। जून-जुलाई में बारिश न होने से धान की रोपाई में देरी हो सकती है। रकबा भी घट सकता है।
सिंचाई के लिए किसानों को ट्यूबवेल पर निर्भर रहना पड़ेगा। बिजली और डीजल का खर्च बढ़ने से खेती की लागत बहुत ज्यादा बढ़ सकती है। उत्पादन घटने से अनाज, दालों और सब्जियों के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं। बुंदेलखंड और दक्षिण-पश्चिमी यूपी के जिलों (जैसे झांसी, महोबा, ललितपुर, मथुरा) में सूखे की आशंका गहरा सकती है।

