- जोन्स रोग पर शोध को मिली विश्वस्तरीय पहचान, ड्रेसडेन सम्मेलन में जीएलए की उपलब्धियों की गूंज
दैनिक उजाला, मथुरा: जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय शोध जगत में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए जर्मनी के ड्रेसडेन शहर में आयोजित 17वें इंटरनेशनल कोलोक्वियम ऑन पैराट्यूबरकुलोसिस (आईसीपी-2026) में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। पशुओं में होने वाले गंभीर संक्रामक रोग जोन्स रोग पर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और शोधार्थियों द्वारा किए जा रहे शोध कार्यों को वैश्विक मंच पर सराहना मिली, वहीं विश्वविद्यालय के बायोटेक विभाग की शोधार्थी समीक्षा अग्रवाल एवं अलुम्ना विधि मिश्रा को प्रतिष्ठित हेल्पिंग हैंड अवार्ड से सम्मानित किया गया।
यह सम्मेलन पैराट्यूबरकुलोसिस एवं उससे जुड़े रोगों पर कार्य करने वाले विश्वभर के वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों, शोधकर्ताओं एवं जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच माना जाता है। सम्मेलन में जीएलए विश्वविद्यालय की ओर से प्रो. शूरवीर सिंह, विभागाध्यक्ष, जैव प्रौद्योगिकी विभाग तथा डॉ. सौरभ गुप्ता, असिस्टेंट प्रोफेसर (रिसर्च) के नेतृत्व में सात सदस्यीय शोध दल ने भारत का प्रतिनिधित्व किया।
सम्मेलन के दौरान जीएलए विश्वविद्यालय की टीम ने जोन्स रोग की पहचान, महामारी विज्ञान, आणविक विश्लेषण तथा नियंत्रण रणनीतियों से संबंधित अपने नवीनतम शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए। विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा कुल 13 शोध सार (रिसर्च एब्स्ट्रैक्ट) प्रस्तुत किए गए, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय ने अत्यंत सराहा।
विशेष उपलब्धि के रूप में पीएचडी शोधार्थी समीक्षा अग्रवाल को जोन्स रोग पर आधारित उनके उत्कृष्ट शोध, वैज्ञानिक योगदान एवं सम्मेलन में सक्रिय सहभागिता के लिए हेल्पिंग हैंड अवार्ड प्रदान किया गया। उनके शोध में रोग की पहचान, प्रसार और नियंत्रण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया गया, जिसकी विशेषज्ञों ने प्रशंसा की।
इसके साथ ही जीएलए विश्वविद्यालय की अलुम्ना विधि मिश्रा को भी उनके शोध प्रबंध कार्य की उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए इसी प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया। दोनों युवा शोधकर्ताओं की यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति और वैज्ञानिक उत्कृष्टता का प्रमाण मानी जा रही है।
सम्मेलन में जीएलए विश्वविद्यालय के शोधार्थियों समीक्षा अग्रवाल, विधि मिश्रा, शुभांग आर्य एवं हर्षित बंसल ने भी अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए तथा अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के प्रश्नों का आत्मविश्वास के साथ उत्तर देकर भारतीय शोध क्षमता का परिचय दिया।
प्रो. शूरवीर सिंह ने बताया कि जोन्स रोग पशुओं में होने वाला एक दीर्घकालिक संक्रामक एवं लाइलाज रोग है, जो माइकोबैक्टीरियम एवियम उपप्रजाति पैराट्यूबरकुलोसिस जीवाणु के कारण होता है। यह रोग डेयरी एवं पशुपालन उद्योग को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाता है तथा वन हेल्थ अवधारणा के तहत मानव स्वास्थ्य से भी जुड़ा महत्वपूर्ण विषय माना जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में हो रहे शोध भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने बताया कि यह वही अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जिसके सहयोग से अक्टूबर 2024 में वृंदावन में सोल्वाह संस्करण का सफल आयोजन जीएलए विश्वविद्यालय द्वारा किया गया था। आज उसी मंच पर विश्वविद्यालय के शोधार्थियों और वैज्ञानिकों को सम्मान मिलना संस्थान के लिए गर्व का विषय है।
डीन रिसर्च प्रो. कमल शर्मा एवं बायोटेक विभाग के डॉ. सौरभ गुप्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर शोध प्रस्तुत करने से विद्यार्थियों को वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के साथ संवाद स्थापित करने का अवसर मिलता है। इससे शोध की गुणवत्ता बढ़ती है और युवा वैज्ञानिकों को नई दिशा प्राप्त होती है।
जीएलए के कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में शोध एवं नवाचार को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। जर्मनी में प्राप्त यह सम्मान दर्शाता है कि जीएलए के शोधार्थी और वैज्ञानिक वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली योगदान दे रहे हैं।

