दैनिक उजाला, मथुरा: जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल रिसर्च (आईपीआर) ने फार्मेसी शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) एवं क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) के संयुक्त संस्थागत मूल्यांकन में सर्वोच्च ग्रेड ‘ए’ प्राप्त किया है। यह उपलब्धि संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसंधान, नवाचार, छात्र विकास, उद्योग से जुड़ाव और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था का प्रमाण है।
पीसीआई-क्यूसीआई द्वारा फार्मेसी संस्थानों का मूल्यांकन विभिन्न गुणवत्ता मानकों के आधार पर किया जाता है। इसमें संस्थागत नेतृत्व एवं प्रशासन, नियामकीय अनुपालन, फैकल्टी की गुणवत्ता, शैक्षणिक आधारभूत ढांचा, शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, विद्यार्थी सहायता एवं प्रगति, अनुसंधान एवं नवाचार, उद्योग-संस्थान सहयोग, प्लेसमेंट, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा संस्थागत परिणाम जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जाता है। जीएलए विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल रिसर्च ने इन सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सर्वोच्च ग्रेड ‘ए’ हासिल किया।
मूल्यांकन के दौरान संस्थान की आधुनिक प्रयोगशालाओं, प्रशिक्षित एवं अनुभवी फैकल्टी, परिणाम आधारित शिक्षा प्रणाली, अनुसंधान गतिविधियों, नवाचार, उद्योगों से मजबूत जुड़ाव तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों को विशेष महत्व मिला। संस्थान में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण फार्मेसी शिक्षा के साथ अनुसंधान और नवाचार के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है।
जीएलए के कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता तथा सीएफओ डा. विवेक अग्रवाल ने इस उपलब्धि पर इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल रिसर्च के सभी शिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों, विद्यार्थियों, पूर्व छात्रों एवं अन्य हितधारकों को बधाई दी। सीएफओ ने कहा कि पीसीआई-क्यूसीआई मूल्यांकन में सर्वोच्च ग्रेड ‘ए’ मिलना संस्थान की निरंतर गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे फार्मेसी शिक्षा के क्षेत्र में जीएलए विश्वविद्यालय की पहचान और मजबूत होगी। मथुरा क्षेत्र के लिए भी यह उपलब्धि गौरव का विषय है।
इस उपलब्धि पर इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल रिसर्च के निदेशक प्रोफेसर डॉ. कमल शाह ने कहा कि पीसीआई-क्यूसीआई मूल्यांकन में प्राप्त सर्वोच्च ग्रेड ‘ए’ पूरे संस्थान के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की शैक्षणिक प्रतिबद्धता, गैर-शिक्षण कर्मचारियों की कार्यनिष्ठा, विद्यार्थियों की उपलब्धियां, पूर्व छात्रों का सहयोग तथा विश्वविद्यालय प्रशासन के निरंतर मार्गदर्शन ने इस उपलब्धि को संभव बनाया है। संस्थान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान उत्कृष्टता और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण वातावरण को लगातार प्राथमिकता देता रहा है।
पुस्तकालय अब किताबों के साथ डिजिटल संसाधनों का भी केंद्र

भारत में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के जनक पद्मश्री डॉ. एस. आर. रंगनाथन की जयंती के उपलक्ष्य में को जीएलए विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस मनाया गया। इस अवसर पर छात्रों को ज्ञानवर्धन और बदलते वैश्विक रुझानों से अवगत कराने के लिए एक भव्य पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। पुस्तकालय सदस्यों द्वारा पारंपरिक से आधुनिक पुस्तकालय, एंटी प्लेगरिज्म सॉफ्टवेयर टर्निटिन, ओपन-सोर्स डिजिटल रिपॉजिटरी सॉफ्टवेयर के बारे में अपना व्याख्यान दिया। कुलपति प्रो अनूप कुमार गुप्ता ने कहा कि किताबें पढ़ना केवल परीक्षा पास करने का एक माध्यम नहीं, बल्कि सोचने और समझने की ताकत देता है। एसोसिएट डीन अकादमिक डा. आशीष शुक्ला ने कहा कि जीएलए विश्वविद्यालय का पुस्तकालय सिर्फ किताबों का घर नहीं, बल्कि डिजिटल संसाधनों, इ बुक्स, ऑडियो बुक्स, शोध डाटा बेस और डिजिटल अभिलेखों का केंद्र है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. अजय कुमार शर्मा ने स्वागत किया। कार्यक्रम का सफल आयोजन के लिए सभी अतिथियों और पुस्तकालय कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया।

