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अब 30 नहीं 5 मिनट में साफ होगा पान का दाग, रेलवे ने शुरू किया ‘जर्मन नैनो-कोटिंग’ का पायलट प्रोजेक्ट, क्या सुधरेंगे थुकैये?

  • वेस्टर्न रेलवे ने माटुंगा रोड स्टेशन पर पान के दाग साफ करने के लिए जर्मन नैनो-कोटिंग का पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर दिया है, इस कोटिंग की लागत 5 लाख रुपये बताई जा रही है

पश्चिम रेलवे ने गुटखा और पान मसाला के दागों से निपटने के लिए एक उन्नत जर्मन तकनीक पर आधारित पायलट परियोजना शुरू की है। इसके परिणामों के आधार पर इसे अन्य स्टेशनों तक विस्तारित करने का फैसला लिया जाएगा। माटुंगा रोड स्टेशन पर इस परियोजना को शुरू कर दिया गया है। वेस्टर्न रेलवे का दावा है कि जर्मन नैनो-कोटिंग से पान के दाग साफ करने का समय 30 मिनट से घटकर पांच मिनट रह जाएगा। इस नैनो-कोटिंग की लागत 5 लाख रुपये बताई जा रही है। लेकिन इस परियोजना को लेकर सवाल भी खड़े हो गए हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक, एक अनूठी पहल के तहत पश्चिम रेलवे (WR) ने माटुंगा रोड स्टेशन पर गुटखा और पान मसाला के जिद्दी दागों की समस्या से निपटने के लिए जर्मन नैनो-टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल शुरू किया है। लगभग 5 लाख रुपये की लागत वाली इस पायलट परियोजना से दाग साफ करने में लगने वाला समय करीब 30 मिनट से घटकर मात्र 5 मिनट रह जाने की उम्मीद है, जिससे स्टेशन की साफ-सफाई और रखरखाव में काफी सुधार होगा।

कैसे काम करती है जर्मन नैनो-कोटिंग?

यह विशेष नैनो-कोटिंग स्टेशन के भीतर आठ स्थानों पर लगभग 3,700 वर्ग फुट क्षेत्र में लगाई गई है। इनमें दीवारें, खंभे, छतें, लिफ्ट और धातु की सतहें शामिल हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह कोटिंग एक सुरक्षात्मक परत बनाती है, जिससे दाग, पेंट और गंदगी सतह के अंदर नहीं जा पाते। इसके कारण सफाईकर्मी केवल पानी और सामान्य सफाई के तरीकों से दागों को आसानी से हटा सकते हैं।

अधिकारी क्या बोले?

इस प्रोजेक्ट को लेकर वेस्टर्न रेलवे के CPRO विनीत अभिषेक से जब पूछा गया कि आम जनता को भी इस प्रोजेक्ट पर भरोसा नहीं हो रहा? तो उनका कहना है कि “यह एक पायलट प्रोजेक्ट है। हमने इनीशिएटिव लिया है, हमें उम्मीद है कि यह सफल होगा। इस पेंट पर गंदगी नहीं जमा होती और आसानी से सफाई भी जल्दी हो जाती है, समय भी बचता है।”

पिछले तीन महीनों में थूकने वालो पर जो कार्यवाही की गई उसके आंकड़े भी बताए हैं।

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थूकने वालों पर कार्रवाई के आंकड़े।

परियोजना पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

1. सवाल यह है, कि क्या लोग लाल रंग की दीवार को निशाना बनाकर सीधे उसी पर थूकेंगे? 

2.  रेलवे गंदगी फैलाने वालों पर कठोर कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रही?

3.  लाल रंग की दीवार के आसपास गंदगी फैली हुई है, और केवल वह दीवार चमक रही है? 

4.  क्या एक जगह पर छोटी सी दीवार को लाल रंग से रंग देने से यह परेशानी खत्म हो जाएगी?

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