Breaking
Tue. Jul 7th, 2026

पेट्रोल में 25% एथेनॉल मिलाने का प्लान टल सकता है:अभी 20% मिलाया जा रहा; इससे माइलेज घटने का दावा, पार्ट्स खराब होने की शिकायत

नई दिल्ली : पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने के विरोध के बीच इसकी मात्रा बढ़ाकर 25% करने की योजना को सरकार फिलहाल आगे बढ़ा सकती है। सरकार इस ट्रांजिशन को जल्दबाजी में करने के बजाय धीरे-धीरे और व्यवस्थित तरीके से लागू करना चाहती है।

सरकार ने शुरुआत में साल 2030 तक पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का प्लान बनाया था। लेकिन इस टारगेट से बहुत पहले ही E20 फ्यूल (80% पेट्रोल और 20% एथेनॉल) को पूरे देश में स्टैंडर्ड पेट्रोल के रूप में लागू कर दिया गया है और अब हर जगह यही पेट्रोल मिल रहा है।

उधर ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी ARAI की एक स्टडी में सामने आया है कि पुरानी E10 कंप्लायंट गाड़ियों में E20 ईंधन का इस्तेमाल करने से फ्यूल सिस्टम के रबर पार्ट्स खराब हो सकते हैं। हालांकि इस रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

इस फैसले को टालने या धीमा करने की मुख्य वजह

इसकी मुख्य वजह पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा तेजी से बढ़ने के कारण देश भर के वाहन मालिकों और कार निर्माताओं (OEMs) से मिल रहा फीडबैक और चिंताएं हैं।

महज तीन साल में एथेनॉल ब्लेंडिंग दोगुनी होने से कई उपभोक्ताओं ने गाड़ियों के माइलेज में भारी गिरावट की शिकायत की है। इसके अलावा, पुरानी गाड़ियों के इंजन और फ्यूल सिस्टम के पार्ट्स खराब होने की आशंकाओं ने भी सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

वाहन मालिकों की सबसे बड़ी शिकायत माइलेज को लेकर है। पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ने से गाड़ियों का माइलेज कम हुआ है। इसके अलावा, जिन लोगों के पास पुरानी गाड़ियां हैं वे इस बात से परेशान हैं कि बिना किसी पर्याप्त चेतावनी या तैयारी के अचानक E20 पेट्रोल आने से उनके इंजन के पार्ट्स को नुकसान पहुंच रहा है।

इसका सीधा कारण यह है कि एथेनॉल की ‘कैलोरिफिक वैल्यू’ यानी उर्जा क्षमता शुद्ध पेट्रोल के मुकाबले कम होती है। इसका मतलब है कि समान मात्रा में जलने पर एथेनॉल पेट्रोल जितनी ऊर्जा पैदा नहीं कर पाता, जिससे माइलेज गिर जाता है। इसके अलावा, एथेनॉल शुद्ध पेट्रोल की तुलना में अधिक तापमान पर जलता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, E10 गाड़ियों में E20 ईंधन इस्तेमाल करने पर फ्यूल-सिस्टम खराब हो सकता है। इससे गाड़ी के रबर पार्ट्स जैसे पाइप, गैस्केट्स, सील्स और ओ-रिंग्स को नुकसान पहुंचता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन रबर पार्ट्स को बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दो OEMs ने इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट किए थे। इसमें एक निर्माता की गाड़ी के इंजन ने 400 घंटे की टेस्टिंग के बाद कोई समस्या नहीं दिखाई और उसका परफॉर्मेंस E20 ईंधन के साथ सही पाया गया। लेकिन दूसरे निर्माता के मामले में स्थिति अलग रही।

सरकार ने कहा था- टेस्टिंग में गाड़ियों को नुकसान का सबूत नहीं मिला

बीते दिनों एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की ओर से शामिल एक्सपर्ट्स ने कहा था कि बड़े पैमाने पर हुई टेस्टिंग में गाड़ियों को नुकसान पहुंचने का कोई सबूत नहीं मिला है। सोशल मीडिया पर गाड़ी के परफॉर्मेंस को लेकर चल रहे दावों के बीच एक्सपर्ट्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व CMD वर्तिका शुक्ला के अलावा बजाज ऑटो के सर्कल हेड मनप्रीत सिंह, टीवीएस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत कृष्णन मौजूद रहे थे।

उनके साथ टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी, मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती, हुंडई इंडिया के पुनीत आनंद और हीरो मोटो के आशुतोष वर्मा भी शामिल हुए थे।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *