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Fri. Jul 31st, 2026

Ethanol नहीं होता तो किस रेट पर बिकता पेट्रोल? सरकार ने संसद में समझाया पूरा गणित

  • सरकार ने संसद में बताया कि अगर पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग नहीं की जाती, तो मिडिल ईस्ट संकट के दौरान देश में पेट्रोल की कीमत 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी

दैनिक उजाला, बिज़नेस डेस्क : पेट्रोल की कीमतों को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि अगर पेट्रोल में इथेनॉल नहीं मिलाया जाता, तो इसकी कीमत कितनी होती। अब सरकार ने संसद में इस सवाल का जवाब देते हुए पूरा गणित समझाया है। सरकार का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति ने न केवल देश की तेल आयात पर निर्भरता कम की है, बल्कि वैश्विक संकट के दौर में भी आम लोगों को महंगे पेट्रोल से राहत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि मिडिल ईस्ट संकट के दौरान जब कच्चे तेल की कीमत करीब 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, तब भारत में पेट्रोल की कीमत लगभग 125 रुपये प्रति लीटर तक जा सकती थी। लेकिन सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग नीति, कच्चे तेल की उपलब्धता और तेल कंपनियों की खरीद रणनीति के कारण उपभोक्ताओं को करीब 94.77 रुपये प्रति लीटर की दर से पेट्रोल उपलब्ध कराया जा सका।

E20 फ्यूल से इंजन को नुकसान नहीं

सरकार ने यह भी साफ किया कि E20 पेट्रोल से पुरानी या नई गाड़ियों के इंजन को किसी तरह का नुकसान होने के दावों की पुष्टि नहीं हुई है। E20 को लागू करने से पहले ARAI, SIAM, इंडियन ऑयल और वाहन निर्माताओं के साथ व्यापक परीक्षण किए गए। इन परीक्षणों में इंजन की क्षमता, परफॉर्मेंस और पार्ट्स पर किसी बड़े नकारात्मक असर का प्रमाण नहीं मिला।

करोड़ों वाहन कर रहे हैं इस्तेमाल

सरकार के अनुसार, देश में पिछले कई वर्षों से इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल हो रहा है। वर्तमान में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चल रही हैं। इतने बड़े स्तर पर उपयोग के बावजूद इंजन खराब होने, जंग लगने या पुर्जों के जल्दी घिसने जैसी कोई व्यापक शिकायत सामने नहीं आई है।

किसानों और देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा

सरकार का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग से सिर्फ पेट्रोल की कीमतों पर कंट्रोल ही नहीं मिलता, बल्कि किसानों को भी लाभ होता है। तेल कंपनियां इथेनॉल की खरीद कृषि क्षेत्र को समर्थन देने और ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने के लिए करती हैं। इससे देश का विदेशी मुद्रा खर्च कम होता है और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता भी घटती है। सरकार का मानना है कि आने वाले समय में इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।

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