- जीएलए में नवप्रवेशी छात्रों से सीईओ बोले- मंजिल के लिए ‘भूख’ और इंटरनल मोटिवेशन जरूरी
- कुलपति, सीएफओ एवं कुलसचिव ने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को लक्ष्य, आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत के साथ सफलता की नई ऊंचाइयां छूने का दिया संदेश
दैनिक उजाला, मथुरा : नए सपनों, नई उम्मीदों और बेहतर भविष्य की आकांक्षाओं के साथ जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा में नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं के विश्वविद्यालयी जीवन की शुरुआत हुई। विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षारंभ ओरिएंटेशन कार्यक्रम में विद्यार्थियों को न केवल उच्च शिक्षा की दिशा और विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली से परिचित कराया गया, बल्कि वक्ताओं ने उन्हें लक्ष्य निर्धारित कर अपनी क्षमताओं को पहचानने और सफलता के लिए निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया। कार्यक्रम में विशेष रूप से जीएलए के सीईओ नीरज अग्रवाल का प्रेरक संबोधन विद्यार्थियों के बीच चर्चा का केंद्र रहा।
कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में प्रवेश उनके जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों को सीखने के साथ अपने व्यक्तित्व, सोच और क्षमताओं को विकसित करने पर ध्यान देने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जीएलए में विद्यार्थियों को ऐसा वातावरण देने का प्रयास किया जाता है, जहां वे अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ते हुए अपनी प्रतिभा को बेहतर तरीके से पहचान और विकसित कर सकें।
कुलपति ने विद्यार्थियों को यह भी संदेश दिया कि कॉलेज जीवन केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह उनके व्यक्तित्व और भविष्य के निर्माण का महत्वपूर्ण चरण है। विश्वविद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक, तकनीकी, शोध, प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और अन्य अवसरों का बेहतर उपयोग कर विद्यार्थी अपनी क्षमताओं को नई ऊंचाई दे सकते हैं। वक्ताओं ने विद्यार्थियों से अनुशासन, निरंतर सीखने की आदत और सकारात्मक सोच को अपने विद्यार्थी जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

‘भूख’ और इंटरनल मोटिवेशन पैदा हो : नीरज
विश्वविद्यालय के सीईओ नीरज अग्रवाल ने अपने खास अंदाज में विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि जीवन में केवल बाहरी प्रेरणा के भरोसे आगे नहीं बढ़ा जा सकता। कुछ समय के लिए किसी प्रेरक भाषण से उत्साह जरूर पैदा हो सकता है, लेकिन वास्तविक सफलता तब मिलती है, जब व्यक्ति के भीतर आगे बढ़ने की ‘भूख’ और इंटरनल मोटिवेशन पैदा हो। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें यह तय करना होगा कि वे जीवन में सामान्य तरीके से आगे बढ़ना चाहते हैं या अपनी पहचान खुद बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग बिना अपना मिशन, विजन और लक्ष्य तय किए जीवन की सामान्य गति में चलते रहते हैं, लेकिन असाधारण उपलब्धियां हासिल करने के लिए अपनी सोच को सामान्य सीमाओं से बाहर ले जाना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि दूसरों की अपेक्षाओं के अनुसार नहीं, बल्कि अपनी क्षमता और सपनों के अनुसार जीवन का लक्ष्य तय करें। उन्होंने ‘मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है’ का उल्लेख करते हुए कहा कि उड़ान पंखों से नहीं, हौसलों से होती है।
सीईओ ने कहा कि विद्यार्थियों के पास विश्वविद्यालय में सीखने और आगे बढ़ने के लिए अनेक अवसर मौजूद हैं। उन्होंने प्लेसमेंट प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की टीम विद्यार्थियों के लिए कंपनियों को कैंपस तक लाने के लिए लगातार मेहनत करती है। कई बार अधिकारी घंटों तक कंपनियों के मानव संसाधन अधिकारियों से संपर्क और संवाद करते हैं, ताकि विद्यार्थियों को अधिक से अधिक अवसर मिल सकें।
सीखने की इच्छा और खुद पर विश्वास सबसे महत्वपूर्ण : विवेक
मुख्य वित्त अधिकारी डॉ. विवेक अग्रवाल ने कहा कि आज से विद्यार्थियों की कॉलेज लाइफ शुरू हो रही है और निश्चित रूप से कुछ वर्षों बाद यही दिन उनकी सबसे खूबसूरत यादों का हिस्सा होगा। उन्होंने कहा कि बड़े लक्ष्य तक पहुंचने के लिए छोटे-छोटे कदमों को सही दिशा देना जरूरी है। पाठ्यक्रम कोई भी हो, सफलता के लिए मेहनत, सीखने की इच्छा और खुद पर विश्वास सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि अभिभावकों ने भरोसे के साथ अपने बच्चों को यहां भेजा है और उस भरोसे को मेहनत से मजबूत करना विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है। जीएलए विश्वविद्यालय उनके सपनों को उड़ान देने के लिए हर संभव सहयोग देगा।
कुलसचिव अशोक कुमार सिंह ने कहा कि नवप्रवेशित विद्यार्थी अब परंपरागत शिक्षा के बाद तकनीकी एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से जुड़ रहे हैं, जहां से उनके विद्यार्थी जीवन को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने ओरिएंटेशन के माध्यम से विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की 28 वर्षों की उपलब्धियों से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि कुलाधिपति नारायण दास अग्रवाल ने वर्ष 1998 में जीएलए इंस्टीट्यूट की स्थापना की थी और उनका सपना देश में उच्चकोटि का विश्वविद्यालय स्थापित करना था, जहां छात्र-छात्राएं अपने सपनों और लक्ष्यों को पूरा कर सकें। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सफलता के लिए सबसे पहले अपना गोल सेट करना जरूरी है। अपनी रुचि और प्रतिभा को पहचानकर सोच-समझकर लक्ष्य तय करें, क्योंकि प्रत्येक विद्यार्थी के भीतर कोई न कोई विशेष प्रतिभा जरूर होती है।
जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों में स्नातक स्तर पर बीटेक, बीफार्मा, बीएससी, बायोटेक, बीए, बीकॉम, बीए-एलएलबी एवं बीकॉम-एलएलबी ऑनर्स, डिप्लोमा इन फार्मेसी तथा स्नातकोत्तर स्तर पर एमटेक, एमबीए, एमफार्मा (फार्माकोलॉजी एवं फार्मास्यूटिक्स) सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों के नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं ने ओरिएंटेशन कार्यक्रम में सहभागिता की।
इस अवसर पर डीन एकेडमिक प्रो. आशीष शर्मा, आईटी निदेशक प्रो. अशोक भंसाली, मुख्य परीक्षा नियंत्रक प्रो. अतुल बंसल, डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. हिमांशु शर्मा, प्रबंधन संकाय निदेशक प्रो. अनुराग सिंह, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो. विनय देवलिया सहित विभिन्न पदाधिकारियों ने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के शिक्षण सत्र एवं विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन अंग्रेजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. दिव्या गुप्ता ने किया। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी दीपक गौड़ सहित विभिन्न अधिकारियों एवं कर्मचारियों का सहयोग रहा।

