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Wed. Mar 4th, 2026

हर एक दिन गिन रहे बलदेव निकाय के प्रत्याशी, चार दिन बाद किसकी चमकेगी किस्मत ?

  • बलदेव नगर निकाय चुनाव में 70.67 प्रतिशत मतदान हुआ था
  • 4 मई को बलदेव नगर वासियों ने बढ़चढ़कर किया मतदान

बलदेव: बीते छह दिन पहले यूपी नगर निकाय चुनाव के पहले चरण में कई जिलों सहित मथुरा जिले के निकायों के मेयर, अध्यक्ष, पार्षद और सभासद पदों के लिए मतदान हुआ। मथुरा नगर निगम को छोड़कर बाकी निकायों में मतदान प्रतिशत अच्छा देखने को मिला। बलदेव नगर निकाय में भी 70.67 प्रतिशत मतदान देखने को मिला। हालांकि अभी जाने-माने 6 प्रत्याशियों की किस्मत चमकने में 4 दिन और बाकी हैं। प्रत्याशियों के लिए एक-एक दिन भारी पड़ रहा है।

विदित रहे कि बलदेव से निकाय के अध्यक्ष पद हेतु 10 उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें से 4 उम्मीदवार ज्ञानेन्द्र पाण्डेय, विष्णु पांडेय, हेमंत पांडेय एवं रामकृष्ण वर्मा ऐसे थे, जिन्होंने अपना प्रचार-प्रसार करना उचित नहीं समझा। तीनों ने ही 6 प्रत्याशियों निवर्तमान चेयरमैन कमल पांडेय, मेरूकांत पांडेय, मुकेश कुमार, माधव तेहरिया, डाॅ. मुरारीलाल अग्रवाल और देवेश पांडेय को किस्मत आजमाने के लिए मैदान में छोड़ दिया। पहले चरण के निकाय चुनाव तो पूर्ण हो गए। अब सिर्फ प्रत्याशियों के लिए दिन गिनना और माथे पर चिंता की लकीरें शेष रह गई हैं।

अगर देखा जाय तो बलदेव वासी जगह-जगह फड़ लगाकर मतदान किसके पक्ष में अधिक हुआ और किसके पक्ष में कमजोर साबित रहा पर चर्चा करते नजर आ रहे हैं। एक दो प्रत्याशी तो ऐसे रहे हैं, जिनकी मिठाई चुनाव वाले दिन तक नहीं बीती और बीते दिन रविवार को भी बांटते हुए देखे गए।

यह आंकड़े किसी व्यक्ति के माध्यम से शेयर किये गए हैं, जो कि सत्यता पर बिलकुल भी आधारित नहीं, हैं, किसी व्यक्ति ने अनुमान के मुताबिक तैयार कर यह आंकड़े शेयर किये हैं, जो कि सोशल मीडिया से लिए हैं !

कोई कह रहा फूल वाले भारी तो कोई डाॅक्टर साहब…
जिस प्रकार चुनाव खत्म होने के बाद बलदेव नगर में चुनावी फड़ जो सज रहे हैं वहां अधिकतर सुनने में आता है कि फूल वाले भी खूब भारी रहे हैं, तो दूसरे फड़ पर सुना जाये तो वहां डाॅक्टर साहब की चर्चाएं सुनने को मिलती हैं। इससे अलग हटकर रीढ़ा की तरफ मुंह मोड़ दिया जाय तो यहां कुछ अलग ही चर्चा सुनने को मिलती है। यहां तो फरसा वाले भईया बाजी मारते हुए सुनाई देता है। सितारे वाले भी कहीं कम नहीं पड़ रहे है। यह चर्चा भी होली वाला और चौथाई मौहल्ला से लेकर सार्वजनिक स्थानों पर सुनने को मिल सकती है। यहीं बताया जाता है कि हल वाले भईया ने खूब वोटें बटोरी हैं। हाथ वाले भईया भी कुछ न कुछ हासिल करेंगे, लेकिन जमानत बचाना शायद मुश्किल लगता है। हालांकि अब यह सब कुछ 4 दिन बाद आंखों के सामने होगा।

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