भोपाल/दिल्ली : मध्य प्रदेश से राज्यसभा सीट के लिए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के खिलाफ कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात 1 बजकर 48 मिनट पर डिजिटल माध्यम से दायर की गई। इस पर कब सुनवाई होगी, यह फिलहाल तय नहीं है।
दरअसल, मामले पर चुनाव आयोग (ECI) की चुप्पी ने कांग्रेस की धड़कनें बढ़ा दी हैं। सूत्रों के अनुसार, आयोग इस मामले में कानूनी राय लेने के बाद फैसला करेगा। आज गुरुवार को दोपहर 3 बजे तक का समय सबसे अहम माना जा रहा है, क्योंकि यही नाम वापसी की अंतिम समय-सीमा है।
यदि तब तक आयोग कांग्रेस के पक्ष में कोई फैसला नहीं करता या खामोश ही रहता है तो भाजपा उम्मीदवार महेश केवट का निर्वाचन तय हो जाएगा। बाकी दो सीटों पर भाजपा उम्मीदवार तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल का निर्विरोध हैं। ऐसे में प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटें भाजपा बिना लड़े जीत जाएगी।
उधर, कांग्रेस आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेगी। आज ही दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में भी सीनियर नेताओं की एक बैठक होगी।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा- ये सीट चोरी का मामला है।
आयोग नामांकन बहाल करता है तो चुनाव फिर मुकाबले में बदल जाएगा
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत के अनुसार, यदि चुनाव आयोग यह मानता है कि रिटर्निंग ऑफिसर से त्रुटि हुई है तो वह स्पष्ट आदेश जारी कर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन वैध घोषित कर सकता है। ऐसे में फिर से वोटिंग होगी।
आयोग राहत नहीं देता तो भाजपा उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन होगा
यदि आयोग हस्तक्षेप नहीं करता या रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को बरकरार रखता है, तो कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव से बाहर मानी जाएंगी। ऐसे में भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध जीतेंगे।
आज दोपहर 3 बजे का समय क्यों महत्वपूर्ण?
11 जून दोपहर 3 बजे तक नाम वापसी का समय निर्धारित है। यदि आयोग को मीनाक्षी के पक्ष में कोई फैसला देना है तो उसे इसी समय तक देना होगा। इसलिए सबकी नजर इस पर है कि फैसला कब आता है।
कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट गई तो क्या होगा?
आयोग से राहत नहीं मिलने पर कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। वहां फैसले की न्यायिक समीक्षा मांग सकती है और अंतरिम राहत की भी मांग कर सकती है। हालांकि, केवल याचिका दाखिल होने से चुनाव प्रक्रिया नहीं रुकेगी। यह सब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर निर्भर करेगा।
राष्ट्रपति के पास जाने से कांग्रेस को क्या मिलेगा?
राष्ट्रपति से मिलकर कांग्रेस गलत तरीके से नामांकन निरस्त करने का मुद्दा उठा सकती है। राष्ट्रपति मामले का संज्ञान लेकर चुनाव आयोग या संबंधित संवैधानिक संस्थाओं से जानकारी मांग सकते हैं। हालांकि, राष्ट्रपति सीधे चुनाव आयोग, रिटर्निंग ऑफिसर या चुनाव प्रक्रिया के किसी फैसले को रद्द नहीं कर सकते। इस मुलाकात का महत्व संवैधानिक और राजनीतिक संदेश के रूप में अधिक माना जा रहा है।
कोर्ट में मामला लंबित होने की शिकायत हुई थी
राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र 9 जून को स्क्रूटनी के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने खारिज कर दिया था। भाजपा उम्मीदवार महेश केवट और पार्टी नेताओं ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई थी। भाजपा का आरोप है कि मीनाक्षी ने अपने चुनावी हलफनामे (फॉर्म 26) में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित एक कानूनी मामले की जानकारी छिपाई है।
कांग्रेस की दलील- यह केस नहीं, सिर्फ नोटिस है
चुनाव आयोग के सामने कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा- मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज ही नहीं है। सिंघवी के मुताबिक, तेलंगाना में एक निजी शिकायत के आधार पर अदालत ने केवल एक कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि संज्ञान क्यों न लिया जाए?
कांग्रेस का कहना है कि जब तक अदालत किसी मामले में संज्ञान लेकर आरोप तय नहीं करती, तब तक उसे लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता। इसलिए इसे हलफनामे में लिखना अनिवार्य नहीं था। कांग्रेस ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को गैर-कानूनी और सीटों की चोरी करार दिया है।

