दैनिक उजाला, मथुरा : केंद्र और प्रदेश सरकार पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को घर-घर पहुंचाने के लिए जोर दे रही हैं, लेकिन मथुरा में विद्युत विभाग के एक अधिकारी की कार्यप्रणाली योजना की रफ्तार पर ही सवाल खड़े कर रही है। सोलर लगने के बाद भी डिस्कॉम स्तर पर निरीक्षण की ऑनलाइन प्रक्रिया करीब 14-15 दिन से आगे नहीं बढ़ी है। इसके चलते प्रोजेक्ट कमीशनिंग और सब्सिडी की प्रक्रिया भी अटकी हुई है।
मामला गणेश्वरा निवासी योगेश कुमार जायस की पीएम सूर्य घर योजना से जुड़ी फाइल का है। पोर्टल के अनुसार आवेदन, फीजिबिलिटी, वेंडर चयन, एग्रीमेंट अपलोड और इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। 17 अगस्त 2026 से डिस्कॉम इंस्पेक्शन ‘In Progress’ दिखाई दे रहा है, जबकि इसके आगे एक्सईएन शहरी पंकज तिवारी के स्तर से Project Commissioning और Subsidy Request ‘Pending’ हैं।
एक्सईएन शहरी के स्तर से आखिर क्यों नहीं बढ़ रही फाइल?
जब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है और फाइल संबंधित विद्युत अधिकारियों के पोर्टल पर उपलब्ध है, तो 14-15 दिन से निरीक्षण की प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ी? सवाल यह भी है कि एक्सईएन शहरी की ओर से इस काम को आगे बढ़ाने के लिए आखिर क्या कार्रवाई की गई? उपभोक्ता का कहना है कि मामले से संबंधित अधिकारियों को अवगत भी कराया जा चुका है, बावजूद इसके कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
ऐसा भी नहीं है कि इस दौरान लगातार सरकारी छुट्टियां रही हों। इसके बावजूद एक ऐसी फाइल, जिसमें उपभोक्ता और वेंडर की ओर से निर्धारित प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, अधिकारी स्तर पर लंबित पड़ी है।
सरकार सोलर लगाने को कह रही, अफसर फाइल तक आगे नहीं बढ़ा रहे
एक तरफ केंद्र और प्रदेश सरकार पीएम सूर्य घर योजना के जरिए लोगों को अपने घरों पर सोलर लगवाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। दूसरी तरफ यदि विभागीय अधिकारी ही निरीक्षण और कमीशनिंग जैसे जरूरी चरणों को समय से पूरा नहीं करेंगे, तो योजना का लाभ उपभोक्ताओं तक कैसे पहुंचेगा?
यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि क्या एक्सईएन शहरी स्वयं इस योजना के तहत आने वाली फाइलों को गंभीरता से ले रहे हैं? यदि एक उपभोक्ता की फाइल करीब दो सप्ताह से लंबित है तो अन्य उपभोक्ताओं की फाइलों की स्थिति क्या होगी?
ऐसे तो लोग दूसरों को योजना का लाभ कैसे बताएंगे?
पीएम सूर्य घर योजना की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि उपभोक्ताओं को प्रक्रिया आसान और समयबद्ध महसूस हो। जब कोई व्यक्ति सोलर लगवाकर भी निरीक्षण और कमीशनिंग के लिए 14-15 दिन इंतजार करेगा, तो वह अपने आसपास के लोगों को योजना की सरलता और लाभ के बारे में किस आधार पर बताएगा?
सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक परिवार सौर ऊर्जा अपनाएं, लेकिन यदि विभागीय स्तर पर ही फाइलें रफ्तार नहीं पकड़ेंगी तो योजना जन-जन तक पहुंचाने का लक्ष्य कैसे पूरा होगा?
योगेश कुमार जायस ने लंबित फाइल का तत्काल निरीक्षण कराकर प्रोजेक्ट कमीशनिंग और आगे की सब्सिडी प्रक्रिया शुरू कराने की मांग की है। अब देखना यह है कि एक्सईएन शहरी इस लंबित फाइल पर कब कार्रवाई करते हैं और उपभोक्ता को योजना का लाभ कब तक मिल पाता है।
SE शहरी आखिर क्या कर रहे हैं, मॉनिटरिंग क्यों नहीं?
मामले में सबसे बड़ा सवाल SE शहरी की मॉनिटरिंग व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। पीएम सूर्य घर जैसी महत्वपूर्ण योजना की फाइलें ऑनलाइन लंबित हैं तो उनकी नियमित समीक्षा आखिर कौन कर रहा है? अधीनस्थ स्तर पर कितनी फाइलें निरीक्षण और कमीशनिंग के लिए लंबित हैं, क्या इसकी कोई निगरानी हो रही है?
यदि किसी उपभोक्ता की फाइल दो सप्ताह तक ‘Inspection in Progress’ में पड़ी रहती है और आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं होती, तो आखिर इसके पीछे क्या कारण है? क्या संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है या फिर जानकारी होने के बावजूद फाइलों के निस्तारण को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा?

