- 400 मीटर सड़क पर जलभराव, कीचड़ और गंदगी से ग्रामीण परेशान, अंतिम यात्रा में अर्थी लेकर गुजरना भी हुआ मुश्किल
दैनिक उजाला, मथुरा/बलदेव : बलदेव नगर से खड़ैरा घाट स्थित यमुना तट तक जाने वाले मुख्य मार्ग की हालत वर्षों से बदहाल है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के चलते अब स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। खड़ैरा गांव में करीब 400 मीटर मार्ग पर घुटनों तक गंदा पानी, कीचड़, गंदगी और दुर्गंध का आलम है। यह वही रास्ता है, जिससे बलदेव क्षेत्र के दर्जनों गांवों की शवयात्राएं खड़ैरा श्मशान घाट तक पहुंचती हैं। इसके बावजूद मार्ग की बदहाली दूर करने और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था करने को लेकर प्रशासन गंभीर नजर नहीं आ रहा है।
गुरुवार को अग्रवाल समाज समिति के पूर्व अध्यक्ष सीताराम अग्रवाल की शवयात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। अंतिम यात्रा जब इस बदहाल मार्ग पर पहुंची तो लोगों की मुश्किलें और बढ़ गईं। घुटनों तक भरे गंदे पानी और कीचड़ के बीच लोगों को अर्थी लेकर आगे बढ़ना पड़ा। रास्ते में दो बार अर्थी गिरने से बाल-बाल बची। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। वाहनों की रफ्तार भी थम गई और काफी देर तक लोग रास्ते में फंसे रहे।
अंतिम यात्रा में भी नहीं बख्श रहा बदहाल रास्ता
इस दृश्य ने ग्रामीणों के आक्रोश को और बढ़ा दिया। लोगों का कहना था कि जिस रास्ते से किसी व्यक्ति की अंतिम यात्रा निकलती है, उस मार्ग की ऐसी दुर्दशा बेहद शर्मनाक है। लोगों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्षों से शिकायतों के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। उनका कहना था कि मरने वाले व्यक्ति की अंतिम यात्रा भी इस मार्ग पर हिचकोले खाते हुए निकलती है और पीछे चलने वाले लोग गंदे पानी व कीचड़ में संघर्ष करते हैं।
पूर्व चेयरमैन रामकृष्ण वर्मा, संजीव गोयल और हरिओम अग्रवाल ने कहा कि खड़ैरा घाट बलदेव क्षेत्र के दर्जनों गांवों का प्रमुख श्मशान स्थल है। यहां पहुंचने के लिए यही मुख्य मार्ग है। सड़क काफी नीचे होने के साथ नालियों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण बरसात ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक सड़क पर पानी भरा रहता है। जलभराव के कारण कीचड़ और गड्ढे बन गए हैं, जिससे पैदल निकलना भी मुश्किल है। कई लोग इस मार्ग पर फिसलकर चोटिल हो चुके हैं।
सोनू अग्रवाल, राजू सोनी और बल्लू पांडेय ने कहा कि समस्या कोई नई नहीं है। वर्षों से ग्रामीण स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अंतिम यात्रा के दौरान भी लोगों को गंदे पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़े, इससे अधिक शर्मनाक स्थिति और क्या हो सकती है। विधायक, सांसद, नगर पालिका, ब्लॉक कार्यालय, एसडीएम और जिलाधिकारी तक समस्या से अवगत कराया जा चुका है, फिर भी हालात नहीं बदले।
एसडीएम महावन के कानों पर क्यों नहीं रेंग रही जूं?
मनोज पांडेय, दिनेश अग्रवाल और पवन गोयल ने कहा कि वर्षों से सड़क जलभराव, कीचड़, गंदगी और दुर्गंध की समस्या से जूझ रही है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई स्थायी समाधान नहीं कराया गया। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि बलदेव क्षेत्र के कई गांवों की शवयात्राएं इसी मार्ग से होकर खड़ैरा घाट पहुंचती हैं, फिर भी एसडीएम महावन समेत जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। आखिर अधिकारी इस गंभीर समस्या की अनदेखी कर सरकार की किरकिरी कराने पर क्यों तुले हैं?
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि करीब 400 मीटर सड़क को ऊंचा कराकर उसका स्थायी निर्माण कराया जाए, जलभराव वाले हिस्से की मरम्मत कराई जाए, नालियों की तत्काल सफाई कराई जाए और पानी की निकासी के लिए स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कार्य के लिए जाने वाले रास्ते की यह स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कम से कम अंतिम यात्रा में शामिल लोगों को गंदे पानी, कीचड़ और दुर्गंध से होकर न गुजरना पड़े, इसके लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष सामूहिक रूप से अपनी आवाज उठाने को मजबूर होंगे।

