अलीगढ़ : नगर निगम के जलकल विभाग में तैनात अवर अभियंता (जल) नरेंद्र सिंह को शासन ने अलीगढ़ से हटाकर इटावा की नगर पालिका भरथना भेज दिया। आदेश हुए करीब 14 महीने बीत गए, लेकिन JE ने नई तैनाती पर जॉइन नहीं किया। शासन की ओर से पहले नोटिस, फिर दूसरा नोटिस और अब तीसरा नोटिस जारी हो चुका है। इसके बावजूद वह अलीगढ़ में ही काम कर रहे हैं। मामला अब शासन के आदेशों के अनुपालन और स्थानीय स्तर पर उन्हें काम करने की अनुमति दिए जाने पर सवाल खड़े कर रहा है।
क्या है पूरा मामला?
14 जून 2025 को शासन के पत्र संख्या 5/923 से नरेंद्र सिंह का स्थानांतरण नगर पालिका परिषद भरथना, इटावा किया गया। इसके बाद 21 अगस्त 2025 को भरथना में जॉइन नहीं करने पर पहला नोटिस जारी हुआ। फिर 13 अक्टूबर 2025 को आदेश का पालन नहीं होने पर दूसरा नोटिस दिया गया। अब अगस्त 2026 के अंतिम सप्ताह में शासन के सचिव उदय भानु त्रिपाठी ने स्थानीय निकाय निदेशालय को पत्र भेजकर दो दिन के भीतर जॉइनिंग कराने के निर्देश दिए। साथ में जॉइनिंग नहीं होने पर शासन ने तीसरा नोटिस जारी कर दिया।
दो दिन में जॉइनिंग के निर्देश, फिर भी नहीं पहुंचे भरथना
शासन के सचिव उदय भानु त्रिपाठी के पत्र में नरेंद्र सिंह को दो दिवस के भीतर नगर पालिका परिषद भरथना में कार्यभार ग्रहण करने और इसकी सूचना शासन को भेजने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन तय समय सीमा गुजरने के बाद भी भरथना में उनकी जॉइनिंग नहीं हुई।
तीसरे नोटिस के बाद भी सवाल कायम
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन का स्थानांतरण आदेश लागू है और तीन बार नोटिस जारी हो चुके हैं, तो नरेंद्र सिंह अलीगढ़ नगर निगम के जलकल विभाग में किस आदेश या अनुमति के आधार पर काम कर रहे हैं? यदि शासन के आदेश के बावजूद स्थानांतरित अधिकारी पुरानी जगह पर काम कर रहा है, तो उसकी जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है। वहीं, तीसरे नोटिस के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि शासन इस मामले में विभागीय कार्रवाई, निलंबन या अन्य प्रशासनिक कदम उठाता है या मामला एक और नोटिस तक सीमित रहता है।
एक साल से ज्यादा समय से आदेश फाइलों में?
इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम बात यह है कि स्थानांतरण आदेश के बाद भी अधिकारी का पुरानी जगह पर बने रहना और लगातार तीन नोटिस जारी होना विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अब मामला सिर्फ JE के जॉइन न करने का नहीं, बल्कि यह भी जांच का विषय है कि इतने लंबे समय तक उन्हें अलीगढ़ में कार्य करने की अनुमति कैसे मिलती रही।

