उज्जैन : उज्जैन में सड़क चौड़ी करने के लिए मंदिर का ढांचा तोड़ दिया गया। जेसीबी और क्रेन से खड़े हनुमान की प्रतिमा हटाने की कोशिश हुई, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से हिली तक नहीं। करीब 10 दिन की कोशिश के बाद प्रशासन ने एक्सपर्ट्स की मदद लेने का फैसला किया है।
अब IIT इंदौर की टीम को बुलाया गया है। टीम ने स्पेशल इक्विपमेंट से प्रतिमा की गहराई और आसपास की जमीन की जांच की। पुरातत्व एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि प्रतिमा करीब 1000 साल पुरानी हो सकती है। IIT की रिपोर्ट के बाद तय होगा कि इसे सुरक्षित तरीके से हटाया जा सकता है या नहीं।
वहीं, भक्तों के लिए यह सिर्फ प्रतिमा हटाने का मामला नहीं है। खड़े हनुमान को लोग ‘डॉक्टर हनुमान’ और मंदिर को ‘उज्जैन का एम्स’ कहते हैं। मान्यता है कि यहां बच्चों और बीमार लोगों की मन्नतें पूरी होती हैं। इसलिए प्रतिमा के नहीं हिलने को भक्त भगवान का संकेत और चमत्कार मान रहे हैं।
सबसे पहले तस्वीरों में देखिए प्रतिमा को हटाने की कोशिशें…

निगम और प्रशासन की टीम लगातार काम करती रही।

मंदिर के आसपास का क्षेत्र हटाया गया है।

खड़े हनुमान मंदिर में भक्तों की भीड़ रहती है।

भक्तों ने इस तरह का बैनर भी लगाया है।
सड़क चौड़ीकरण में मंदिर आड़े आया था
कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। सड़क की चौड़ाई करीब 15 मीटर की जा रही है। इसी दायरे में खड़े हनुमान का मंदिर आ रहा था। कार्रवाई के दौरान मंदिर का ढांचा हटा दिया गया, लेकिन प्रतिमा को विस्थापित करने में परेशानी हुई।
प्रतिमा हटाने के लिए निगम की टीम कटर लेकर भी पहुंची थी। भक्तों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि ज्यादा बल लगाने या कटर चलाने से प्रतिमा को नुकसान हो सकता है। दो दिन पहले मंदिर के आसपास बैरिकेडिंग की गई थी। भक्तों ने निगम कमिश्नर को ज्ञापन देकर विशेषज्ञों से जांच कराने की मांग की थी।
अब देखिए हनुमानजी के पास पहुंची भक्तों की भीड़..

खड़े हनुमान मंदिर में मुस्लिम परिवार भी मन्नत लेकर आते हैं।

हनुमान मंदिर में भक्तों की भीड़ पहुंच रही।

इस तरह से काले ताबीज भी बांधे जाते हैं।
प्रतिमा के नीचे क्या है, IIT पता लगाएगी
आईआईटी इंदौर की टीम ने मंगलवार को करीब दो घंटे तक जांच की। विशेष उपकरणों से प्रतिमा की जमीन में गहराई और आसपास की संरचना की जानकारी जुटाई गई है। टीम अब अपनी रिपोर्ट देगी।
नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा के मुताबिक मंदिर के पंडित के आग्रह पर आईआईटी की टीम को बुलाया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया और तारीख तय होगी। प्रशासन यह देख रहा है कि प्रतिमा को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह ले जाना संभव है या नहीं।
पुरातत्व विशेषज्ञ बोले- 1000 साल पुरानी हो सकती है प्रतिमा
विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के मुताबिक प्रतिमा करीब 1000 वर्ष पुरानी हो सकती है। उनके अनुसार पुराने समय में बड़ी प्रतिमाओं को इंटरलॉक तकनीक से स्थापित किया जाता था। खड़े हनुमान की प्रतिमा भी इसी तकनीक से स्थापित किए जाने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि प्रतिमा मालवा क्षेत्र में मिलने वाले मजबूत बेसाल्ट पत्थर की है। परमार वंश और राजा भोज के समय इस तरह के पत्थरों पर कलाकृतियां बनाने की परंपरा रही है। लंबे समय से सिंदूर चढ़ाए जाने के कारण प्रतिमा की मूल बनावट और भाव-भंगिमा साफ दिखाई नहीं देती।

