CJI सूर्यकांत ने राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट तक विरोध मार्च पर गुरुवार को कहा कि कोई भी कोर्ट को डराने या धमकाने की कोशिश नहीं कर सकता। ऐसी कोशिशें बेकार हैं। इन पर कोई ध्यान नहीं देता।
CJI ने सुप्रीम कोर्ट में SIR के विरोध प्रदर्शन और मार्च से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान राहुल गांधी और 13 अन्य लोगों की याचिका का भी मामला उठा। कोर्ट ने इस पर केंद्र और चुनाव आयोग (ECI) को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
विपक्ष की तरफ से यह याचिका चीफ जस्टिस सूर्यकांत के मिलने से इनकार के बाद दाखिल की गई थी। 11 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत को पत्र लिखा था और ज्ञापन सौंपने के लिए समय मांगा था। सीजेआई ने मना कर दिया था।
फिर राहुल, प्रियंका, खड़गे के साथ अन्य विपक्षी सांसद 12 अक्टूबर की शाम अचानक सुप्रीम कोर्ट के अंदर पहुंच गए। उससे पहले सांसदों ने दिल्ली के बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला था।
कोर्ट ने CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए
वकील गौरव भाटिया ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के CCTV फुटेज सुरक्षित रखने के लिए अंतरिम आदेश देने की मांग की। दावा किया कि एक गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का दिया गया था।
इस पर जस्टिस बागची ने सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को CCTV और अन्य डिजिटल फुटेज या सामग्री सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। निजी पक्षों को भी ऐसी सामग्री दाखिल करने की छूट दी गई।

तस्वीर सुप्रीम कोर्ट के बाहर की है, जहां राहुल एक महिला का कंधा पकड़कर उसे हटाते दिख रहे हैं।
प्रदर्शन का आह्वान करने वालों की जिम्मेदारी तय करने की मांग वाली याचिका पर CJI सूर्यकांत ने नोटिस जारी किया। याचिका में मांग की गई है कि प्रदर्शन का आह्वान करने वाला व्यक्ति दूसरों पर पड़ने वाले परिणामों की जिम्मेदारी भी ले।
12 अक्टूबर: विपक्ष एकजुट हुए, मार्च निकला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

राहुल, प्रियंका समेत विपक्षी नेता दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब पहुंचे। 13 पार्टियों के नेता एकजुट हुए।

विपक्षी नेताओं ने बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला था।

राहुल सुप्रीम कोर्ट के अंदर जाते हुए। उनके साथ खड़गे, वेणुगोपाल, अखिलेश, तेजस्वी समेत विपक्ष के नेता साथ थे।
विपक्ष के निशाने पर चुनाव आयोग क्यों
SIR पर 14 बार आपत्ति: SIR को लेकर कॉकरोच पार्टी पहले से ही सवाल उठा रही है। इस बीच द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट पब्लिश हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई।
वोटर लिस्ट पर सवाल: दोनों आयुक्तों ने वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया के साथ चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर से जुड़े मामलों पर सवाल उठाए।
फॉर्म-6 में बदलाव पर आपत्ति: एक मामले में फॉर्म-6 में SIR से जुड़ा सवाल जोड़ने पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी।
डेटा और काम के बंटवारे पर चिंता: दोनों ने चुनावी डेटा और सॉफ्टवेयर तक पहुंच को लेकर कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा था। वहीं, काम के बंटवारे से जुड़े एक आदेश को भी उन्होंने नियमों का उल्लंघन बताया था।

