लखनऊ : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें दिल्ली में हुए प्रदर्शनों पर सवाल उठाए। राजनाथ ने कहा कि कांग्रेस और उनके सहयोगी दल युवाओं को भटका रहे हैं। बांग्लादेश की तर्ज पर देश में जबरन सरकार बदलना चाहते हैं। उनका एजेंडा लोकतांत्रिक संस्थाओं को खत्म करना और देश में आतंकी पैदा करना है।
राजनाथ ने राहुल गांधी से पूछा- क्या आप बिना सपा के समर्थन के अपनी रायबरेली सीट जीत पाएंगे। कांग्रेस 37 साल से यूपी की सत्ता से बाहर है। यह वोट चोरी के कारण नहीं, बल्कि काम चोरी के कारण है।
लखनऊ में कांग्रेस दफ्तर में हुई मारपीट पर राजनाथ ने कहा- कांग्रेस के लोगों को खुद ही एक दूसरे पर भरोसा नहीं है, तभी वो आपस से मारपीट करते नजर आ रहे हैं। उनका इशारा लखनऊ में कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में रविवार को पार्षद ममता चौधरी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के समर्थकों के बीच हुई बहस और मारपीट की तरफ था।
यूपी में 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। कुल 80 सीटों में से सपा ने 63 और कांग्रेस ने 17 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें रायबरेली और अमेठी की सीट भी शामिल हैं। रायबरेली से राहुल और अमेठी से किशोरी लाल शर्मा ने जीत हासिल की थी।

राजनाथ ने कहा- राहुल और सहयोगियों को समझना होगा कि लोकतंत्र संवैधानिक संस्थाओं को भंग करने या विकास यात्रा में रोड़ा पैदा करने का लाइसेंस नहीं है।
विपक्ष का एकमात्र एजेंडा देश में आग लगाना
देश के युवाओं को अराजकता की राजनीति का मोहरा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। ये सरकार को डंके की चोट पर गिराने की बात करते हैं। इससे साफ है कि उनका एकमात्र एजेंडा लोकतांत्रिक संस्थाओं को ध्वस्त करना और देश में आग लगाना है।
सत्ता हासिल करने की साजिश रची जा रही है
‘Regime Change’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाना साफ करता है कि उनकी लड़ाई चुनाव सुधार के लिए नहीं है। उनकी लड़ाई SIR और ज्ञानेश कुमार के लिए नहीं है और न ही उनकी लड़ाई देश के नौजवानों के उज्ज्वल भविष्य के लिए है। बल्कि, यह लड़ाई देश में अराजकता पैदा करने और किसी भी तरह सत्ता हासिल करने की साजिश का हिस्सा है।
कांग्रेस के इतिहास के पन्ने में कई काले अध्याय
कांग्रेस के इतिहास के पन्ने में कई काले अध्याय मिलेंगे। कांग्रेस ने चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया को कठपुतली बनाकर रखा। 1993 में रातों-रात 2 नए चुनाव आयुक्त नियुक्त कर दिए। तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने के लिए राष्ट्रपति को पत्र लिखा। नवीन चावला को कांग्रेस ने बचाया और फिर मुख्य चुनाव आयुक्त बना दिया।
चुनाव आयुक्त एमएस गिल कांग्रेस सरकार में मंत्री बने
कांग्रेस राज में नियुक्त चुनाव आयुक्त एमएस गिल कांग्रेस सरकार में मंत्री बने थे। 5 दशक तक बिना वोटर आईडी के चुनाव होते थे। जब से वोटर आईडी आया है, कांग्रेस के लिए बहुमत दूर की बात हो गई है। कांग्रेस ने कभी बहुमत की सरकार नहीं बनाई। यूपी में कांग्रेस को 1985 में आखिरी बार जीत मिली थी।
राहुल का हाइड्रोजन बम पटाखा भी नहीं निकला
राहुल ने वोट चोरी को हाइड्रोजन बम बताया था, लेकिन वह पटाखा भी साबित नहीं हुआ। कांग्रेस ने मतदाता सूची पर कोर्ट में आधिकारिक अपील दायर नहीं की। भाजपा ने कभी चुनावी व्यवस्था पर संदेह नहीं किया। संवैधानिक संस्थान को बदनाम कर जनता को गुमराह नहीं किया।
राजीव गांधी की हत्या के बाद पूरे देश में चुनाव टाले गए
राजीव गांधी की हत्या के बाद पूरे देश में चुनाव स्थगित किया गया था। प्रावधान था कि किसी उम्मीदवार की मृत्यु के कारण उसी सीट का चुनाव स्थगित होता है, लेकिन पूरे देश में चुनाव स्थगित कर दिया गया। जबकि, सच्चाई है कि उस समय अमेठी का चुनाव हो गया था।
विदेशी शक्ति के हाथों में खेल रहे विपक्षी दल
दशकों से चुनाव हार रहे राजनीतिक दल विदेशी शक्ति के हाथ में खेलते नजर आ रहे हैं। सत्ता परिवर्तन, संसद नहीं, सड़क के रास्ते निकलता है, यह कहना भारत को पटरी से उतरने का प्रयास है। ये अपनी राजनीतिक पराजय का बदला देश से लेना चाहते हैं। कांग्रेस देश को हिंसा और अराजकता की आग में झोंकना चाहती है। कांग्रेस ने गांधी नाम उपयोग करने का अधिकार खो दिया है।

