नई दिल्ली : भोले बाबा के भक्त हर साल उनके निवास स्थान कैलाश पर्वत के दर्शनों हेतु जाते हैं। चीन के रास्ते कैलाश यात्रा करने वालों का खर्च 3 से 4 लाख रुपए आता है। जो भारत से यात्रा करते हैं, उनके लगभग 40 हजार रुपए लगते हैं। पाठकों को जानकर प्रसन्नता होगी 1962 के युद्ध उपरांत से वीरान पड़ी उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी फिर से आबाद होने जा रही है। अगर आप सोच रहे हैं नेपाल, चीन अथवा तिब्बत से भारत व्यापारिक संबंध कायम करने जा रहा है तो ऐसा नहीं है। ओल्ड लिपुलेख पास की चोटी पर औसतन 18000 फीट ऊंचाई पर कैलाश व्यू पॉइंट बनने जा रहा है। इसका निर्माण होने में कम से कम 2 साल का समय लगेगा। उसके बाद यहां कार से सीधे पहुंच सकेंगे।
बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) ने धारचूला से 70 कि.मी दूर गुंजी और गुंजी से नाभीढांग तक का 19 कि.मी फैला हुआ मार्ग पहाड़ों की कटाई कर बना दिया है। नाभीढांग से 7 कि.मी दूर ओल्ड लिपुलेख के समीप भी कच्ची सड़क बनकर तैयार है। ओल्ड लिपुलेख से 1800 फीट ऊपर कैलाश व्यू पॉइंट तक 10 से 12 फीट चौड़ा मार्ग भी 70% तक बनकर तैयार है। पूरे रास्ते पर पत्थर बिछ चुके हैं।
बी.आर.ओ की सुपर्विजन में एक कंपनी को यह कार्यभार सौंपा गया है। यही कंपनी धारचूला से नाभीढांग तक का मार्ग बना रही है। जब यह मार्ग आरंभ होगा तो चीन बॉर्डर तक भारतीयों की सीधी पहुंच बन जाएगी।
यहां काम कर रहे जे.एंड.के राइफल्स के जवानों ने कहा कि समीप से व्यू पॉइंट वाली सड़क कार चलाने के लिए तैयार करने में लगभग डेढ़ साल का समय और लगेगा।
पिथौरागढ़ की डी.एम रीना जोशी ने कहा व्यू पॉइंट को केंद्र सरकार सेना की निगरानी में नए तीर्थ के रूप में विकसित कर रही है।

