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Sat. Feb 14th, 2026

रंगबिरंगी सांझियों से चमका रसखान समाधि स्थल

  • ब्रज तीर्थ विकास परिषद और जीएलए का “सांझी महोत्सव” प्रारंभ
  • रसखान समाधि पर पांच दिवसीय महोत्सव में चित्रकारों ने पोट्रेट, सांझी, जल सांझी और गोबर सांझी बनायी

दैनिक उजाला, गोकुल/मथुरा : उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद, उप्र पर्यटन और जीएलए विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में गोकुल और कार्ष्णि आश्रम रमणरेती के मध्य सुरम्य वातावरण में स्थित रसखान समाधि स्थल मंगलवार से रंगबिरंगी सांझियों से चमक उठा। विभिन्न चित्रकारों द्वारा रंग बिरंगी अनेक सांझी का निर्माण पहले दिन सांझी महोत्सव में किया गया। 10 से 14 अक्टूबर तक यानि पांच दिन चलने वाले इस ‘सांझी महोत्सव’ में न केवल चित्रकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल रहा है, बल्कि सायं काल सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए कलाकारों को ओपन एयर थिएटर (ओएटी) का मंच प्रदान किया गया।

सांझी महोत्सव का शुभारंभ जीएलए विश्वविद्यालय के उप कुलपति डा. अनूप गुप्ता, डिप्टी सीईओ जेपी पांडेय, जिला पर्यटन अधिकारी डी के शर्मा, तकनीकी सलाहकार आर के जायसवाल ने संयुक्त रूप से किया। शुभारंभ मौके पर ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डा उमेश चंद्र शर्मा, सहायक अभियंता आर पी सिंह यादव व दूधनाथ सिंह, गीता शोध संस्थान वृंदावन के समन्वयक चन्द्र प्रताप सिंह सिकरवार आदि अधिकारीगण उपस्थित रहे।

प्रथम दिन जिन चित्रकारों ने विभिन्न प्रकार की रंग-बिरंगी सूखे रंगों की सांझी पर तैयार की। यह अष्टकोंण की वेदी पर तैयार की गयी है। यह देवालय सांझी है जो मंदिरों में बनायी जाती है। इसे साझी चित्रकार शशांक गोस्वामी, चित्रांग गोस्वामी, पुष्पांग गोस्वामी ने बनाया।
खजानी इंस्टीट्यूट की छात्राएं भावना दीक्षित, मुस्कान प्रजापति, यामिनी मिश्र, प्राची मिश्रा, गायत्री ने सूखे रंगों से कैनवास पर रासलीला का चित्रण किया। उनको इंस्टीट्यूट की सचिव शिप्रा राठी के नेतृत्व में रिंकी चौधरी ने दिशा निर्देशन किया।
चित्रकार श्रीकृष्ण इंटर कालेज के कला शिक्षक अनिल सोनी ने सैंड कलर से रखखान का चित्रांकन किया। स्वतन्त्र चित्रकार श्रीमती खुशबू उपाध्याय सोनी ने लड्डू गोपाल का चित्रण किया।

मेला के सह प्रायोजक जीएलए विश्वविद्यालय है। महोत्सव में अनेक कलाकार और चित्रकारों को सरकारी मंच पर प्रतिभा दिखाने का मौका मिल रहा है। समूचे रसखान समाधि प्रांगण में आकर्षक रंगोली भी सजायी जा रही हैं। स्कूली छात्र व छात्राओं द्वारा रंगोली सजायी जा रही है।
सांझी के साथ सेल्फी लेने के लिए भी लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। महोत्सव में सायं काल 4 से 7 बजे के मध्य सांस्कृतिक कार्यक्रम के रूप में भजन संध्या हुई जिसमें संत विहारी शरण ने रसखान के पद आदि का गायन किया। उनके साथ हरिओम शास्त्री, कपिल, बलराम, विनय आदि ने संगत की।

बुधवार को रसखान के पदों पर आधारित संगीतमयी इस प्रस्तुति दी जाएगी। कलाकारों का एक दल अपनी तैयारियां गीता शोध संस्थान में कर रहा है। उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने सभी प्रधानाचार्य, समस्त शिक्षकगण, समस्त छात्र व छात्राओं से इस महोत्सव को सफल बनाने की अपील की है। जिले भर के स्कूली बच्चे भव्य व सुरम्य रसखान समाधि स्थल पर लग रहे सांझी मेला में आने लगे हैं।
उल्लेखनीय है कि विगत वर्ष भी आठ दिवसीय सांझी महोत्सव जीएलए विश्वविद्यालय के तत्वावधान में संयुक्त रूप से सफलतापूर्वक आयोजित किया था।

गुजरात के तीर्थ यात्री और स्कूली बच्चे ब्रज की सांझी देख गदगद

मथुरा : उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद, पर्यटन विभाग एवं जीएलए विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सांझी मेला में आज बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राओं ने, गुजरात के तीर्थ यात्रियों ने एवं स्थानीय तीर्थ यात्रियों ने भ्रमण किया।
सभी ने अलग अलग साझी को निहारा। ये तीर्थ यात्री रमणरेती में दर्शन करने आये थे।
गुजरात के यात्रियों का बड़ा सुखद अनुभव रहा। सौराष्ट्र से आए गुजरात के अवकाश प्राप्त शिक्षक भी भीखू मरजानी ने बताया कि अष्टछाप के मंदिरों में सौराष्ट्र में सांझी के चित्र बने हुए हैं। गुजरात से आये तीर्थ यात्रियों में भीखू मरजादी के अलावा भगवान जी भाई, कांति भाई, शांता वैन, काला वैन व काजल वैन थीं। ये सभी रसखान समाधि पर सौराष्ट्र के गिरि सोमाना नामक स्थान से आए थे।

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