- दिल्ली हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के बाद दोस्तों के बीच हुए झगड़े से जुड़ी FIR रद्द कर दी और साथ ही उन्हें सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया है
दिल्ली हाईकोर्ट ने दोस्तों के बीच हुए विवाद के बाद दर्ज FIR को रद्द करते हुए दोनों पक्षों को मणिपुर के एक हॉस्पिटल में सामुदायिक सेवा करने का निर्देश जारी किया। हाईकोर्ट ने यह निर्देश दोनों पक्षों में विवाद सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझ जाने के बाद दिया है।
दोनों पक्षों के बीच अब नहीं है कोई झगड़ा
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता और दोनों आरोपी अब भी मित्र हैं। उनके बीच फिलहाल कोई मौजूदा शिकायत नहीं है। इसलिए इस केस में दोषसिद्धि की संभावना काफी कम है और आपराधिक कार्यवाही जारी रखने से कोई मकसद पूरा नहीं होगा।
मेरी राय में FIR रद्द करने की मांगी गई राहत को कम्युनिटी सर्विस और उपयुक्त मुआवजे का भुगतान करने की शर्त के अधीन करना उचित रहेगा। याचिकाकर्ता और प्रतिवादी संख्या चार (दोनों आरोपी) को मणिपुर के रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में 2-2 घंटे के 6 सेशन में सामुदायिक सेवा करनी होगी: जस्टिस प्रतीक जालान
अस्पताल से सर्टिफिकेट लाकर अदालत में करना होगा जमा
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों दोस्तों को हॉस्पिटल के Medical Superintendent के पास रिपोर्ट करना होगा, जो उन्हें उपयुक्त काम देंगे। सामुदायिक सेवा शुरू होने की तारीख से इन 6 सेशन को 2 महीने में पूरा करना होगा। इसके बाद Medical Superintendent उन्हें अनुपालन प्रमाणपत्र देंगे, जिसे अदालत के रिकॉर्ड में डाला जाएगा।
डाबड़ी पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई थी इस केस की FIR
इसके अलावा, हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों को दो हफ्ते में दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन को सामूहिक तौर पर 10 हजार रुपये का भुगतान करने का निर्देश भी दिया। गौरतलब है कि यह आदेश यहां डाबड़ी पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR को रद्द करने की अपील से जुड़ी याचिका को मंजूर करते हुए दिया।
फ्लैट में जबरन घुसकर की गई थी मारपीट
जान लें कि पिछले साल मार्च में एक शख्स की शिकायत पर ये FIR दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि वह अपने दोस्त के साथ किराए के एक फ्लैट में रह रहा था। उस समय दोनों आरोपियों ने जबरन घर में आकर उसके और उसके दोस्त से मारपीट की थी।
बिना किसी दबाव के दोनों पक्षों ने किया समझौता
अब हाईकोर्ट को बताया गया कि दोनों पक्षों ने बिना किसी प्रेशर या अनुचित प्रभाव के विवाद को सुलझा लिया है। साथ ही, सुलहनामा पर भी साइन किए हैं। इसके अलावा, घटना में घायल हुए शख्स ने भी हाईकोर्ट को बताया कि वह अपनी चोट से उबर गया है और उसे इसका कोई स्थायी दुष्प्रभाव नहीं हुआ है। दोनों पक्षों ने बताया कि वे अब भी दोस्त हैं और एक-दूसरे के विरुद्ध उनकी कोई मौजूदा शिकायत नहीं है।

