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जीएलए ने लगाई किसान पाठशाला किसानों ने जानी उन्नत किस्म

  • जीएलए के कृषि विज्ञान ने जैविक खेती सहित विभिन्न उन्नत किस्म पर जोरे देने के लिए लगाई किसान पाठशाला

मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा का कृषि विज्ञान विभाग अपने कृषि के विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने अलावा किसानों को भी गांव-गांव जाकर पाठशाला के माध्यम से उन्नत किस्म एवं जैविक खेती के बारे में जानकारियां प्रदान कर रहा है।

बीते दिन जीएलए विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान संकाय के विशेषज्ञों ने किसान पाठशाला का आयोजन ग्राम उस्फार एवं बाद मथुरा में किया, जिसमें सैकड़ों किसानों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए कृषि से संबंधित नई तकनीक सीखीं। कृशि विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. अमित कुमार ने कीटों के समन्वित प्रबंधन पर जोर देते हुए इंटीग्रेटेड फार्मिंग, फसल चक्र एवं जैविक खेती के तरीके भी सिखाए। जैविक खेती से संबंधित जानकारी देते हुए डा. अमित ने बताया कि रासायनिक खेती के कारण ही इंसान के अंदर कई बीमारियां जन्म ले रही हैं। साथ ही खेत की मिट्टी में पोशक तत्वों में भारी कमी देखने को मिल रही है। इसलिए जैविक की अतिआवश्यकता है। उन्होंने कम मात्रा की खेती वाले किसानों को इंटीग्रेटेड फार्मिंग खेती के बारे में भी जानकारी दी।

डा. प्रदीप जोलिया इकोनॉमिक्स विशेषज्ञ ने किसानों को मिलने वाली विभिन्न सरकारी योजनाओं को बताते हुए केसीसी एवं फसल बीमा योजना का लाभ कैसे लें पर विचार विमर्श किया। डा. वैभव सिंह ने मथुरा में उगने वाली विभिन्न फसलों की उन्नत किस्मों के बारे में जानकारी दी। दोनों ग्राम के किसानों ने जीएलए विवि द्वारा संचालित किसान पाठशाला की सराहना करते हुए आगे भी इसी तरह के कार्यक्रम कराने की मांग की।
जीएलए कृषि विज्ञान विभाग के डीन प्रो. सुरेन्द्र सिंह सिवाच ने ऑर्गेनिक खेती के बारे में बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का कृषि विज्ञान विद्यार्थियों की जानकारी के लिए जैविक खेती कर रहा है। इसी जैविक के माध्यम से कई किस्म की फसलें भी विभाग में शिक्षकों/विद्यार्थियों के द्वारा किए गए प्रयोग के माध्यम से उग रही हैं।

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