Breaking
Sun. Feb 15th, 2026

भारतीयों के हाथ-पैर चेन से बांधकर प्लेन में चढ़ाया: वॉशरूम में निगरानी, खाने के लिए भी हाथ नहीं खोले

वॉशिंगटन/नई दिल्ली : अमेरिका से डिपोर्ट किए गए 104 भारतीयों को लेकर US मिलिट्री का C-17 प्लेन 5 फरवरी को पंजाब के अमृतसर एयरपोर्ट पर उतरा।

इन लोगों के पैर में चेन बांधी गई थी, जबकि हाथ भी बेड़ियों में जकड़े हुए थे। अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोल चीफ माइकल बैंक ने अपने X हैंडल पर इसका वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में भारतीयों के हाथों और पैरों में बेड़ियां साफ देखी जा सकती है।

माइकल बैंक्स ने X पर लिखा,

QuoteImage

अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोल USBP ने अवैध एलियंस को सफलतापूर्वक भारत वापस भेजा। यह अब तक की सबसे लंबी डिपोर्टेशन फ्लाइट थी, जिसके लिए मिलिट्री एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया गया। यह मिशन अवैध प्रवासियों के निष्कासित करने की हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है। आप अवैध रूप से सीमा पार करते हैं, तो आपको वापस भेजा जाएगा।QuoteImage

यह सोशल मीडिया पर पोस्ट किए वीडियो का स्क्रीन ग्रैब है। इसमें प्लेन में चढ़ते लोगों के पैरों में चेन बंधी हुई हैं।

यह सोशल मीडिया पर पोस्ट किए वीडियो का स्क्रीन ग्रैब है। इसमें प्लेन में चढ़ते लोगों के पैरों में चेन बंधी हुई हैं।

टेक्सास के सेंट एंटोनियो एयरपोर्ट पर अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने इन्हें ऐसी हालत में ही मिलिट्री प्लेन में चढ़ाया था। वहां से भारत आने के बीच 40 घंटे का सफर इन लोगों ने बेड़ियों में जकड़े हुए ही तय किया।

कुछ लोगों ने मीडिया को बताया कि उन्हें प्लेन में एक जगह बैठे रहने को कहा गया था। उन्हें वॉशरूम तक नहीं जाने दिया गया। जब लोगों ने बहुत जोर दिया तो प्लेन का क्रू अपने साथ वॉशरूम तक लेकर गया और दरवाजा खोलकर अंदर धकेल दिया।

लोगों ने बताया कि उन्हें बहुत थोड़ा सा खाना दिया गया, जिसे हाथ बांधकर ही खाना पड़ा। डिपोर्ट किए गए लोगों में महिलाएं और बच्चे भी थे। अमेरिका से भारत के बीच प्लेन ने चार जगह रीफ्यूलिंग के लिए स्टॉप लिया, लेकिन अंदर बैठे लोगों को प्लेन से निकलने की इजाजत नहीं थी।

अमेरिकी सेना ने एक लाइन में चेन से बंधे भारतीयों को प्लेन में चढ़ाया।

अमेरिकी सेना ने एक लाइन में चेन से बंधे भारतीयों को प्लेन में चढ़ाया।

अवैध अप्रवासी भारतीयों को लेकर सेंट एंटोनियो एयरबेस से टेक ऑफ करता अमेरिकी मिलिट्री विमान।

अवैध अप्रवासी भारतीयों को लेकर सेंट एंटोनियो एयरबेस से टेक ऑफ करता अमेरिकी मिलिट्री विमान।

कल अमेरिका से डिपोर्ट किए गए अवैध अप्रवासी गुजरात पहुंचे।

कल अमेरिका से डिपोर्ट किए गए अवैध अप्रवासी गुजरात पहुंचे।

पंजाब के 30 और हरियाणा-गुजरात के 33-33 लोग

प्लेन में पंजाब के 30, हरियाणा-गुजरात के 33-33 लोग शामिल थे। अमेरिका के 45 अफसर इन्हें भारत लेकर आए। 11 क्रू मेंबर भी साथ थे।

अमृतसर एयरपोर्ट के सुरक्षा अधिकारियों के बताया कि इन लोगों का वैरिफिकेशन करके इमिग्रेशन और कस्टम क्लियरेंस के बाद पंजाब पुलिस को सौंप दिया गया। इन 104 अवैध प्रवासी में से 48 की उम्र 25 साल से कम है। 13 नाबालिग हैं, जिनमें 4 साल का बच्चा भी है।

अमृतसर पहुंचने वाले पंजाब के लोगों को पुलिस की गाड़ियों से उनके घर भेजा गया। बाकी राज्यों के लोगों को फ्लाइट के जरिए भेजा गया। ये सभी अमेरिका समेत 20 देशों में कभी नहीं जा पाएंगे।

अमेरिकी सैन्य विमान 4 फरवरी की सुबह 3 बजे अमेरिका के सैन एंटोनियो रवाना हुआ था।

अमेरिकी सैन्य विमान 4 फरवरी की सुबह 3 बजे अमेरिका के सैन एंटोनियो रवाना हुआ था।

अमेरिका ने पहली बार सैन्य विमान भेजा

यूएस मिलिट्री का यह विमान भारतीय समय के मुताबिक, 4 फरवरी की सुबह 3 बजे अमेरिका के सैन एंटोनियो रवाना हुआ था। यह पहली बार है जब अमेरिका ने अप्रवासियों को भेजने के लिए सैन्य विमान का इस्तेमाल किया। करीब साढ़े 3 घंटे बाद US एयरफोर्स विमान वापस लौट गया।

इससे पहले अलग-अलग रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अमेरिका ने कुल 205 अवैध भारतीयों को डिपोर्ट करने के लिए चिह्नित किया है। इन्हें भारत भेजा जाएगा। 186 भारतीयों को डिपोर्ट करने वाली लिस्ट भी सामने आई थी। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बाकी बचे लोग कहां हैं और कब डिपोर्ट किए जाएंगे।

ट्रम्प ने अमेरिकी राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद अवैध तरीके से रह रहे बाहरी लोगों को डिपोर्ट करने के आदेश दिए थे। ग्लोबमास्टर को भारत भेजने पर लगभग 6 करोड़ रुपए का खर्च आया है।

इस प्लेन से अवैध अप्रवासियों को भेजने का खर्च चार्टर्ड प्लेन से लगभग छह गुना ज्यादा है।

इस प्लेन से अवैध अप्रवासियों को भेजने का खर्च चार्टर्ड प्लेन से लगभग छह गुना ज्यादा है।

अवैध अप्रवासियों को क्यों निकाल रहे ट्रम्प

ट्रम्प ने 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेते ही एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन करके अवैध अप्रवासियों की एंट्री बैन करने और उन्हें पकड़ कर बॉर्डर पर छोड़ने की पॉलिसी का ऐलान किया था। ट्रम्प ने चुनाव कैंपने में भी अवैध अप्रवासियों को देश से निकालने का वादा किया था।

उन्होंने अमेरिका के इतिहास का सबसे बड़ा डिपोर्टेशन करने को कहा था। ट्रम्प का मानना है कि दूसरे देशों से लोग अमेरिका में अवैध तरीके से घुसकर अपराध करते हैं। यहां नौकरियों के बड़े हिस्से पर अप्रवासियों का कब्जा है, इससे अमेरिकी लोगों को नौकरी नहीं मिलती।

ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले कानून ‘लैकेन रिले एक्ट’ पर साइन किए। इस कानून के तहत फेडरल अधिकारियों को उन अवैध अप्रवासियों को हिरासत में लेकर डिपोर्ट करने का अधिकार है, जो किसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *