वॉशिंगटन डीसी : अमेरिका ने गुरुवार रात नाइजीरिया में आतंकी संगठन ISIS के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। ट्रम्प का आरोप है कि यहां ISIS ईसाइयों को निशाना बनाकर बेरहमी से हत्या कर रहा है।
उन्होंने ISIS आतंकियों को ‘आतंकी कचरा’ बताते हुए लिखा कि यह संगठन लंबे समय से निर्दोष ईसाइयों की हत्या कर रहा है। ट्रम्प के मुताबिक इस ऑपरेशन में अमेरिकी सेना ने कई परफेक्ट स्ट्राइक कीं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि अमेरिका ‘कट्टर इस्लामी आतंकवाद को पनपने नहीं देगा।’ पोस्ट के अंत में ट्रम्प ने लिखा- सभी को क्रिसमस की बधाई, मारे गए आतंकियों को भी। अगर ईसाइयों की हत्याएं जारी रहीं, तो आगे और भी आतंकी मारे जाएंगे।
ट्रम्प बोले- ऐसी कार्रवाई सिर्फ अमेरिका कर सकता है
ट्रम्प ने रक्षा मंत्रालय को ‘डिपार्टमेंट ऑफ वॉर’ कहते हुए सेना की तारीफ की और कहा कि ऐसी सटीक कार्रवाई सिर्फ अमेरिका ही कर सकता है।
इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर सिविल लिबर्टीज एंड द रूल ऑफ लॉ की एक रिपोर्ट के अनुसार, नाइजीरिया में जनवरी से 10 अगस्त तक धार्मिक हिंसा बढ़ने के कारण 7,000 से ज्यादा ईसाइयों की हत्या कर दी गई है। इन हत्याओं के लिए बोको हरम और फुलानी जैसे आतंकी संगठन जिम्मेदार हैं।
टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया
अमेरिकी रक्षा विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, ये हमले नौसेना के एक जहाज से दागी गई दर्जन से ज्यादा टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से किए गए। गिनी की खाड़ी से दागी गईं ये मिसाइलें नाइजीरिया के सोकोतो राज्य में ISIS के दो ठिकानों पर गिरीं। यह इलाका नाइजर सीमा के पास है, जहां ISIS-सहेल नाम का गुट सक्रिय है।
अमेरिकी अफ्रीका कमान (AFRICOM) ने कहा कि शुरुआती जांच में कई ISIS आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि हमला कब हुआ और इसमें कितना नुकसान हुआ।
अफ्रीका कमान के प्रमुख जनरल डैगविन एंडरसन ने कहा कि अमेरिका नाइजीरिया और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर आतंकवाद से लड़ाई तेज कर रहा है, ताकि निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सके।
सैन्य कार्रवाई में नाइजीरिया ने भी मदद की
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी इस हमले की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई नाइजीरिया सरकार के सहयोग से की गई है और आने वाले वक्त में और भी हमले हो सकते हैं। उन्होंने नाइजीरिया सरकार को मदद और सहयोग के लिए शुक्रिया कहा।
नाइजीरिया सरकार ने कहा है कि यह हमला अमेरिका के साथ चल रहे सुरक्षा सहयोग का हिस्सा है। दोनों देश मिलकर आतंकवाद से लड़ने के लिए खुफिया जानकारी साझा कर रहे हैं और रणनीति बना रहे हैं।
हमले से एक दिन पहले ट्रम्प प्रशासन ने नाइजीरिया को फिर से ‘कंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न’ घोषित किया था। यह दर्जा उन देशों को दिया जाता है, जहां धार्मिक आजादी के गंभीर उल्लंघन माने जाते हैं। ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल के अंत में भी ऐसा किया था, जिसे बाद में बाइडेन सरकार ने हटा दिया था।
नाइजीरियाई सरकार बोली- हिंसा को धर्म से जोड़कर नहीं देखें
नाइजीरिया सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। राष्ट्रपति बोला अहमद टीनूबू ने कहा कि उनका देश धार्मिक आजादी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि नाइजीरिया एक लोकतांत्रिक देश है, जहां संविधान सभी धर्मों को बराबरी का अधिकार देता है। विदेश मंत्रालय ने भी कहा कि आतंकवाद चाहे किसी के खिलाफ हो, वह देश के मूल्यों और वैश्विक शांति के खिलाफ है।
नाइजीरिया में लंबे समय से हिंसा जारी है। यहां करीब 22 करोड़ की आबादी है, जिसमें बड़ी संख्या में ईसाई और मुसलमान रहते हैं। उत्तर-पूर्व में बोको हराम और उसका सहयोगी संगठन ISIS वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस जैसे आतंकी गुट सक्रिय हैं, जिन्होंने बीते दस साल में हजारों लोगों को मारा है। ये हमले ईसाइयों और मुसलमानों, दोनों पर होते रहे हैं।
इसके अलावा देश के मध्य हिस्से में चरवाहों और किसानों के बीच जमीन और पानी को लेकर झड़पें होती रहती हैं, जिनमें धर्म और जातीय तनाव भी जुड़ा रहता है। उत्तर-पश्चिमी इलाकों में फिरौती के लिए अपहरण करने वाले गिरोह भी बड़ी समस्या हैं।
ट्रम्प ने 2 नवंबर को हमले की धमकी दी थी
ट्रम्प ने 2 नवंबर नाइजीरिया को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर नाइजीरिया में ईसाइयों की हत्या और हमले बंद नहीं हुए, तो अमेरिका तुरंत नाइजीरियाई सरकार को दी जाने वाली सभी आर्थिक और सैन्य सहायता रोक देगा।
ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर लिखा था कि अगर जरूरत पड़ी, तो अमेरिका ‘गन के साथ’ नाइजीरिया में कार्रवाई करेगा। हम आतंकियों को खत्म कर देंगे जो ईसाइयों पर हमला कर रहे हैं। ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने अपने डिपार्टमेंट ऑफ वॉर को संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी के आदेश दे दिए हैं।

