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जम्मू-कश्मीर में पहली बार एक साथ होंगे पंचायत, BDC और DDC चुनाव, बचेंगे समय-संसाधन, पंचायत राज को मिलेगी असली ताकत

श्रीनगर : केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर प्रदेश में पंचायत राज व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश चुनाव आयोग (एसईसी) पंचायत हल्कों,ब्लाक विकास परिषद(बीडीसी) और जिला विकास परिषद (डीडीसी) के चुनाव एक साथ्र कराने की तैयारी में जुटा हुआ है।

इससे पहले जम्मू कश्मीर में पंचायत राज व्यवस्था के तहत इन तीनों संस्थानों के गठन के लिए अलग अलग चुनाव हुए थे। मौजूदा समय में जम्मू-कश्मीर में पंचायत, बीडीसी और डीडीसी निष्क्रिय हैं और संबंधित संस्थानों की शक्तियों व अधिकारों का प्रयोग ब्लाक विकास अधिकारी और जिला उपायुक्त कर रहे हैं।

जम्मू कश्मीर में अंतिम बार पंचायत चुनाव नवंबर-दिसंबर 2018 में हुए थे जबकि बीडीसी के चुनाव अक्टूबर 2019 में कराए गए थे। डीडीसी के चुनाव नवंबर-दिसंबर 2020 में कराए गए थे। पंचायतों और बीडीसी का कार्यकाल जनवरी 2024 में जबकि डीडीसी का कार्यकाल इसी वर्ष फरवरी में संपन्न हुआ है।

केंद्र शासित जम्मू कश्मीर प्रदेश में 20 जिलाें में 285 ब्लाक, 4291 सरपंच हल्के, 33592 पंच और 280 डीडीसी निर्वाचन क्षेत्र हैं। प्रत्येक जिले में 14 डीडीसी हैं। प्रदेश चुनाव आयोग(एसईसी) के कार्यालय के अनुसार, पंचायत राज अधिनियम के तहत पंचायत राज व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए पंचायत, बीडीसी और डीडीसी का गठन एक साथ होना चाहिए।

पंचायत-डीडीसी का चुनाव एक साथ कराएं

पंचायत और डीडीसी का चुनाव एक साथ कराया जाना चाहिए। जम्मू कश्मीर में पहली बार डीडीसी के चुनाव 2020 में हुए थे। हालांकि यह चुनाव पंचायत चुनाव के साथ होने चाहिए थे लेकिन तत्कालीन परिस्थितियों में नहीं हुए थे। अलबत्ता, अब आयोग का प्रयास है कि यह सभी चुनाव एक साथ हों। इससे समय और संसाधन दोनों की बचत होगी और पंचायत राज व्यवस्था को उसकी मूल भावना के अनुरूप लागू करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि जम्मू कश्मीर में 2020 से पहले कभी डीडीसी का गठन नहीं हुआ था। पंचायत ,बीडीसी और डीडीसी की चुनाव प्रक्रिया को एक साथ संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक विषयों पर गहनता से विचार विमर्श किया जा रहा है। इसी क्रम में प्रदेश के चुनाव अधिकारियों को एक दल पड़ौसी राज्यों मेंं जहां पंचायत राज व्यवस्था के तहत पंचायत, बीडीसी, डीडीसी के गठन के चुनाव हुए हैं, अध्ययन के लिए भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि एसइसी कार्यालय इस संदर्भ में जम्मू कश्मीर प्रदेश सरकार और जम्मू कश्मीर पंचायती राज मामले विभाग के साथ लगातार संवांद-संपर्क बनाए हुए है।

ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास को तेजी मिलेगी

इस बीच, ऑल जम्मू एंड कश्मीर पंचायत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन अनिल शर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पंचायत राज अधिनियम को पूरी तरह से लागू किया जाना चाहिए। यह तभी संभव होगा जब पंचायत, बीडीसी और डीडीसी का गठन एक साथ किया जाए। इसके साथ ही डीडीसी निर्वाचन क्षेत्रों का युक्तिकरण भी किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यहां ऐसे जिले हैं जहां आबादी लगभग पांच लाख है और तीन विधायक हैं, वहां भी 14 डीडीसी सदस्य चुने जाते हैं, जबकि जिन जिलों में नौ-नौ विधायक हैं, वहां भी 14 डीडीसी का ही प्रावधान है। ऐसे में डीडीसी हल्कों का परिसीमन किया जाना चाहिए अथवा मतदाताओं की संख्या के आधार पर डीडीसी चुनाव कराए जाने चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि यहां जिला योजना एवं विकास बोर्ड का प्रावधान है, जिसे अब जिला विकास परिषद का नाम दिया गया है। इसमें संबंधित जिले के बीडीसी सदस्यों को भी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए और उन्हें मतदान का अधिकार दिया जाना चाहिए। तभी डीडीसी सही मायनों में कार्य कर पाएंगे और संबंधित जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास पर प्रभावी रूप से ध्यान दे सकेंगे।

सही अर्थों में मजबूत और प्रभावी बनेगी संस्थाएं

अनिल शर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पंचायत राज अधिनियम, 1989 में जिला योजना एवं विकास बोर्ड का स्पष्ट प्रावधान है और उसी तर्ज पर जिला योजना एवं विकास बोर्ड का गठन किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि तभी पंचायत राज संस्थाएं सही अर्थों में मजबूत और प्रभावी बन सकेंगी।

इसके साथ ही उन्होंने पंचायतों में परिसीमन तथा मतदाताओं के पुनर्विन्यास (माइग्रेशन) की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि एक पंचायत से दूसरी पंचायत में मतदाताओं का संतुलित वितरण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक पंचायत में परिसीमन कर मतदाताओं की संख्या लगभग 1000 से 1500 के बीच रखी जानी चाहिए। जिन पंचायतों में मतदाताओं की संख्या 4000 तक पहुंच गई है, उन्हें विभाजित कर कम से कम तीन पंचायतों का गठन किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि इससे सरकार की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक और लोगों के घर-घर तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेंगी।

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