मथुरा : धर्म और संस्कृति की नगरी मथुरा स्थित प्रतिष्ठित केएम विश्वविद्यालय के सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा ’विश्व स्वास्थ्य दिवस’ के उपलक्ष्य में एक विशाल जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष की वैश्विक थीम “टुगेदर फॉर हेल्थ, स्टैंड विद साइंस” (सेहत के लिए एकजुटता, विज्ञान के साथ अटूट विश्वास) के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने आधुनिक समय की सबसे बड़ी चुनौती-सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारियों और चिकित्सा क्षेत्र में व्याप्त अंधविश्वास पर गहरा प्रहार किया।
सामुदायिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डा. विजय कुमार की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एनसी प्रजापति, प्रति कुलपति डॉ. शरद अग्रवाल, कुलसचिव डॉ. पूरन सिंह, परीक्षा नियंत्रक समीक्षा भारद्वाज, मेडिकल प्राचार्य डॉ. पीएन भिसे, एवं मेडिकल सुपरिटेंडेंट की गरिमामयी उपस्थिति में माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इस अवसर पर सामुदायिक चिकित्सा विभाग के छात्र-छात्राओं ने समस्त मुख्य अतिथियों का पटुका पहनाकर भव्य स्वागत किया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एमबीबीएस (बैच 2023) के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत किया गया एक प्रभावशाली नाटकीय रूपांतरण रहा। इस नाटक के माध्यम से छात्रों ने वर्तमान समय की एक कड़वी सच्चाई को उजागर किया कि कैसे लोग गंभीर बीमारियों की स्थिति में डॉक्टर के पास जाने के बजाय सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के अधूरे ज्ञान और झाड़-फूंक जैसे अंधविश्वासों के चंगुल में फंस जाते हैं। विद्यार्थियों ने मंच से नारा दिया “इलाज विश्वास से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक प्रमाणों (एविडेंस) से होता है।“
विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी रचनात्मकता से स्वास्थ्य चुनौतियों को प्रदर्शित किया। जिसमें प्रथम स्थान एएनएम विभाग की वर्षा, नीशा और प्रीति ने सामूहिक रूप से अपनी बेहतरीन कलाकृति के लिए प्रथम स्थान प्राप्त किया। जबकि द्वितीय स्थान जीएनएम की छात्रा पलक, सुराज और भावना को मिला तथा तृतीय स्थान एएनएम प्रथम वर्ष की शांति, मनमहेन्द्री और हेमलता ने तृतीय स्थान पर अपनी जगह बनाई। सभी मेधावी विजेताओं को कुलपति एवं अन्य अतिथियों द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।
प्रति कुलपति डॉ. शरद अग्रवाल ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत जैसे देश में जहाँ जनसंख्या घनत्व अधिक है, वहाँ टीकाकरण और पोषण जैसे विषयों पर केवल विज्ञान पर आधारित निर्णय ही सकारात्मक परिणाम ला सकते हैं। कुलसचिव डॉ. पूरन सिंह ने जोर दिया कि बदलते मौसम और नई महामारियों के युग में वैज्ञानिक अनुसंधान ही हमारा सबसे बड़ा हथियार है।
मेडिकल प्राचार्य डॉ. पीएन भिसे ने विद्यार्थियों को वर्ष 1948 में डब्ल्यूएचओ की स्थापना से लेकर अब तक की चिकित्सा जगत की उपलब्धियों के बारे में विस्तार से अवगत कराया और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एचओडी डा. विजय कुमार ने कहा “स्वास्थ्य ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। 7 अप्रैल का दिन हमें याद दिलाता है कि वैज्ञानिक सहयोग और अनुसंधान के बिना मानवता की रक्षा संभव नहीं है। हमें जानवरों, पौधों और पूरे ग्रह के स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील होना होगा।“
कार्यक्रम को सफल बनाने में अस्पताल के एएमएस डॉ. नामित गौतम, मेडिसिन एचओडी डॉ. आरके गुप्ता, सामुदायिक चिकित्सा विभाग के डॉ. सुनील, डॉ. पुष्पेंद्र, अंजली भारद्वाज, डॉ. पीके जैन, डॉ. एसटी वलि सहित आदित्य सिंह, नंदनी, अविका, वेदुन्शी, ब्रजेश, नीलेश, जानवी, अविरल, दीपक, बाला और आदित्य शर्मा का विशेष सहयोग रहा। इस दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के डीन, प्रोफेसर और सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

