गुरुग्राम : गुरुग्राम के एक थार मालिक ने DGP ओम प्रकाश सिंह के बयान से आहत होकर अपने वकील के माध्यम से लीगल नोटिस भेजा है। जिसमें उसने कहा कि गुरुग्राम की प्रेस कॉन्फ्रेंस में थार मालिकों के खिलाफ दिए बयान को वापस लें और माफी मांगे। क्योंकि इस बयान के बाद उसे ताने सुनने पड़ रहे हैं।

डीजीपी ने 8 नवंबर को गुरुग्राम में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि जिसके पास भी थार होगी तो दिमाग घुमा हुआ होगा उसका, मानो वह स्टेटमेंट है। थार गाड़ी नहीं है, स्टेटमेंट है कि हम ऐसे हैं। अब थार गाड़ी है, इसे छोड़ने का क्या मतलब है। बुलेट मोटरसाइकिल है… सारे बदमाश इसी से चलते हैं। जिस तरह की गाड़ी का चॉइस है… वो आपका माइंडसेट शो करता है।

यह वीडियो यूट्यूब पर वायरल हो गया और कुछ ही घंटों में लाखों बार देखा गया। जिसमें मीडिया कर्मियों के हंसने की आवाजें भी साफ सुनाई दे रही हैं। अब इसी बयान पर गुरुग्राम के बीपीटीपी अमस्टोरिया, सेक्टर-102 निवासी सर्व मित्तर ने अपने वकील वेदांत वर्मा के जरिए DGP को 15 दिन में जवाब देने के लिए कानूनी नोटिस भेज दिया है। नोटिस में आपराधिक मानहानि, दीवानी मानहानि और हर्जाने की मांग की गई है।

डीजीपी ओपी सिंह को लीगल नोटिस भेजने वाले गुरुग्राम के एडवोकेट वेदांत वर्मा।

डीजीपी ओपी सिंह को लीगल नोटिस भेजने वाले गुरुग्राम के एडवोकेट वेदांत वर्मा।

मजबूरी में गाड़ी का इस्तेमाल बंद किया

सर्व मित्तर ने नोटिस में बताया है कि उन्होंने जनवरी 2023 में 30 लाख रुपए से ज्यादा की कीमत देकर थार LX हार्डटॉप (HR26-EZ-6161) खरीदी थी। इसकी वजह थी कि यह मजबूत बॉडी, ऊंचा ग्राउंड क्लियरेंस और परिवार के साथ लॉन्ग ड्राइव के लिए अच्छी सुरक्षा मिलती है, लेकिन DGP के बयान के बाद उन्हें हर जगह ताने सुनने पड़ रहे हैं। आखिरकार मानसिक तनाव के चलते उन्होंने थार का इस्तेमाल बंद कर दिया और दूसरी गाड़ी ले ली।

जानकार पूछते हैं-भाई दिमाग तो ठीक है

उसने बताया कि पड़ोसी, रिश्तेदार और ऑफिस के लोग मिलते ही पूछते हैं कि अरे भाई, दिमाग तो ठीक है ना? उनके दोनों बच्चे स्कूल में सहपाठियों से रोज सुनते हैं कि तेरे पापा थार चलाते हैं, दिमाग घुमा हुआ है क्या।

उसने नोटिस में लिखा है कि DGP के पद की गरिमा और उनके शब्दों का वजन इतना है कि आम आदमी इसे सच मान लेता है। मेरे पूरे परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।

एडवोकेट बोले-यह अपराध की श्रेणी में आता है

वकील वेदांत वर्मा का कहना है कि किसी कंपनी, संघ या निश्चित व्यक्ति वर्ग के खिलाफ की गई मानहानिकारक टिप्पणी भी अपराध है। थार मालिक एक स्पष्ट, पहचानने योग्य और निश्चित वर्ग है। भारत में करीब 2 लाख से ज्यादा थार गाड़ियां रजिस्टर्ड हैं। इसलिए इस वर्ग का हर सदस्य पीड़ित व्यक्ति है और उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चल सकता है। यह पहला मामला है जब BNS 2023 की इस नई व्याख्या का इस्तेमाल किसी बड़े अधिकारी के खिलाफ हो रहा है।

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