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19 लाख का क्लेम नहीं दिया, यूनाइटेड-इंडिया इंश्योरेंस ब्रांच सीज:सड़क हादसे में घायल परिवार को कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं दिए रुपए

जैसलमेर : जैसलमेर में गुरुवार को कोर्ट के आदेश पर यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की जैसलमेर ब्रांच को सीज कर दिया गया।

यह कार्रवाई सोनार दुर्ग पार्किंग लिंक रोड स्थित शाखा पर की गई। मामला साल 2022 में हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा है, जिसमें जोधपुर से जैसलमेर आते समय इनोवा कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी।

हादसे में कार सवार जितेंद्र बिस्सा, उनकी पत्नी श्वेता बिस्सा और बच्ची मयूरी व्यास गंभीर रूप से घायल हो गए थे। लेकिन दुर्घटना बीमा क्लेम नहीं देने पर कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कार्रवाई की।

कोर्ट के आदेश पर प्रशासन की टीम कार्रवाई करने के लिए पहुंची और ब्रांच के ऑफिस को सीज किया।

कोर्ट के आदेश पर प्रशासन की टीम कार्रवाई करने के लिए पहुंची और ब्रांच के ऑफिस को सीज किया।

सड़क हादसे का है मामला

सड़क हादसे में घायल लोगों द्वारा देचू थाने में ड्राइवर व गाड़ी मालिक के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। हादसे के पीड़ितों ने बीमा क्लेम के लिए 19 दिसंबर 2022 को मोटरयान दुर्घटना दावा अधिग्रहण (MACT) न्यायालय, जैसलमेर में दावा पेश किया था।

अदालत ने सभी सबूतों और सुनवाई के बाद 10 मार्च 2025 को यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को दोषी ठहराते हुए कुल 19 लाख 6 प्रतिशत ब्याज सहित दो महीने में जमा करवाने के आदेश दिए थे।

आदेश की अवहेलना, कोर्ट ने कलेक्टर को दिए वसूली के निर्देश

बीमा कंपनी ने अदालत के आदेश की अनदेखी करते हुए तय समय में राशि जमा नहीं करवाई। इस पर न्यायालय ने जैसलमेर कलेक्टर प्रताप सिंह को वसूली की कार्रवाई के आदेश जारी किए।

कलेक्टर के निर्देश पर उपखंड अधिकारी सक्षम गोयल ने तहसीलदार राजेंद्र सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और इंश्योरेंस कंपनी की ब्रांच बिल्डिंग को कुर्क कर सीज कर दिया गया।

भवन के अंदर मौजूद फर्नीचर, कंप्यूटर, प्रिंटर, टेबल-कुर्सियां, अलमारी व स्टेशनरी को यथास्थिति में रखते हुए भवन पर कुर्की नोटिस लगाया गया है।

दो अलग-अलग मामलों में नहीं दिया भुगतान

यह कार्रवाई दो अलग-अलग मामलों में बीमा राशि नहीं देने के कारण की गई। श्वेता बिस्सा बनाम अमीन खान (प्रकरण संख्या 79/2024) में ₹7,61,553 रुपए का भुगतान नहीं किया गया।

जितेंद्र बिस्सा बनाम अमीन खान (प्रकरण संख्या 80/2024) में ₹11,32,581 रुपए की राशि बकाया थी। दोनों मामलों में अधिकरण पारिवारिक न्यायालय (MACT) ने बीमा कंपनी को जिम्मेदार मानते हुए आदेश दिए थे।

बिल्डिंग को सीज करने की कार्रवाई करती हुई टीम।

बिल्डिंग को सीज करने की कार्रवाई करती हुई टीम।

प्रार्थी पक्ष की ओर से एडवोकेट जहांगीर मलिक ने की पैरवी

इस पूरे मामले में प्रार्थी पक्ष की ओर से एडवोकेट जहांगीर मलिक ने कोर्ट में पैरवी की। मलिक ने तर्क दिया- “हमने अदालत में बार-बार बताया कि पीड़ित पक्ष को चार साल से न्याय नहीं मिला। आखिरकार कोर्ट ने आदेश दिए और प्रशासन ने सख्त कार्रवाई कर पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।”

उपखंड अधिकारी सक्षम गोयल ने बताया कि न्यायालय के आदेश की पालना में यह कार्रवाई की गई है। बीमा कंपनी को कई बार नोटिस भेजे गए थे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। तय समय में राशि जमा न करवाने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत ब्रांच को सीज किया गया है।

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