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मां दुनिया में नहीं, बकरी का दूध पी रहा नवजात:परिजन बोले- वह दर्द से तड़प रही थी, नॉर्मल डिलीवरी करवाना चाहते थे डॉक्टर

बांसवाड़ा : बांसवाड़ा में 4 प्रसूताओं की मौत के बाद राज्य सरकार से आई टीम अस्पताल में जांच में जुटी है। 3 प्रसूताओं के परिजन उन्हें ले गए। 1 प्रसूता का लक्ष्मी का परिवार सामने आया है, परिजनों का आरोप है कि हीमोग्लोबिन कम आने के बाद भी डॉक्टरों ने नॉर्मल डिलीवरी करवाने की बात कही। इसके बाद खून चढ़ाया तब भी लक्ष्मी दर्द से तड़प रही थी।
इसके बावजूद ध्यान नहीं दिया गया। पीछे बचा लक्ष्मी का नवजात बेटा बिलखता है तो परिजनों की आंखों में आंसू आ जाते हैं। कोई उपाय नहीं होने पर उसे बकरी का दूध पिलाया जा रहा है।
मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन का कहना है- पांच डॉक्टरों की टीम गठित की है। टीम को अति शीघ्र जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

लक्ष्मी का नवजात बेटा जब रोता है तो उसे बकरी का दूध पिलाया जाता है।

लक्ष्मी का नवजात बेटा जब रोता है तो उसे बकरी का दूध पिलाया जाता है।

8 जुलाई को कराया था भर्ती, हीमोग्लोबिन 7.40 ग्राम आया

परिजनों के अनुसार लक्ष्मी अपने पीहर में थी। उसे 8 जुलाई को दोपहर 2 बजे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। शाम 5 बजे आई ब्लड रिपोर्ट में उसका हीमोग्लोबिन 7.40 ग्राम आया था। परिजनों का आरोप है कि इसके बावजूद हॉस्पिटल स्टाफ ने उन्हें बताया कि डिलीवरी नॉर्मल हो जाएगी।

परिजनों का कहना है कि रात करीब 12 बजे स्टाफ ने उन्हें बताया कि महिला को तुरंत खून चढ़ाने की जरूरत है। इसके बाद परिवार ने जनामेड़ी गांव से अपने दो रिश्तेदारों को बुलाया, लेकिन कम उम्र होने के कारण वे ब्लड डोनेट नहीं कर पाए। इसके बाद रात 3 बजे एक अन्य रिश्तेदार युवक को बुलाया गया और रिप्लेसमेंट में ब्लड देने के बाद लक्ष्मी को पहली यूनिट ब्लड चढ़ाया गया।

मृतका के ससुर पप्पू लाल चरपोटा ने बताया कि 9 जुलाई की सुबह डॉक्टरों ने एक और यूनिट ब्लड की व्यवस्था करने के लिए कहा, जिसके बाद परिजनों ने एक परिचित को बुलाकर खून की व्यवस्था की। सुबह 11 बजे महिला का सिजेरियन किया गया। इसके बाद सुबह 11:30 बजे उसे जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।

दूसरी यूनिट ब्लड चढ़ाने के दौरान बिगड़ी तबीयत

परिजनों के मुताबिक दोपहर 12 बजे जनरल वार्ड में ही लक्ष्मी को दूसरी यूनिट ब्लड चढ़ाया जाने लगा। उनका आरोप है कि यह ब्लड बिना किसी जरूरी री-चेक या रिपोर्ट के सीधे चढ़ा दिया गया। खून चढ़ने के दौरान ही लक्ष्मी की तबीयत बिगड़ने लगी। उसे तेजी से पसीना आने लगा और घबराहट होने लगी। परिजनों के अनुसार वह दर्द से तड़पने लगी थी।

परिजनों का कहना है कि उन्होंने वहां मौजूद नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों को महिला की बिगड़ती हालत के बारे में बताया। उन्होंने दर्द कम करने के लिए इंजेक्शन लगाने की भी मांग की। आरोप है कि स्टाफ ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया और कहा कि ऑपरेशन के बाद ऐसा होता है तथा ब्लड की बोतल पूरी चढ़ने तक दूसरी दवा नहीं दी जा सकती।

लक्ष्मी की डिलीवरी के दौरान मौत हो गई थी।

लक्ष्मी की डिलीवरी के दौरान मौत हो गई थी।

ब्लड रिएक्शन और वाइटल्स मॉनिटर नहीं करने का आरोप

परिजनों ने आरोप लगाया कि महिला के शरीर में ब्लड रिएक्शन हो रहा था। उनका कहना है कि ब्लड चढ़ाने से पहले, ब्लड चढ़ने के दौरान और उसके बाद भी बीपी, पल्स समेत अन्य वाइटल्स की सही तरीके से निगरानी नहीं की गई। परिजनों के अनुसार यदि समय रहते ब्लड रोककर इलाज शुरू किया जाता तो लक्ष्मी की जान बचाई जा सकती थी।

रात में हालत ज्यादा बिगड़ी, आईसीयू में हुई मौत

परिजनों के अनुसार दिनभर दर्द से जूझने के बाद रात 11 बजे लक्ष्मी की हालत फिर ज्यादा बिगड़ गई और वह दोबारा तड़पने लगी। इसके बाद उसे आईसीयू में शिफ्ट किया गया, लेकिन रात करीब डेढ़ बजे उसकी मौत हो गई।

परिवार का कहना है कि उन्होंने हॉस्पिटल प्रशासन की ओर से मांगी गई हर व्यवस्था समय पर पूरी की और जरूरत के मुताबिक खून का इंतजाम भी किया, लेकिन इसके बावजूद उनकी बहू को बचाया नहीं जा सका। उन्होंने मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

हॉस्पिटल के PMO ड़ॉ. राजीव गौतम ने बताया कि पांच डॉक्टरों की टीम गठित की है। जिसमें एनेस्थीसिया ड़ॉ. ममता डामोर, ज्यूरिस्ट सुनील मईड़ा, सर्जन वारुलाल डामोर, फिजिशियन ड़ॉ. मयंक शर्मा, गायनिक कीर्तिश जैन शामिल हैं। टीम को अति शीघ्र जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

लक्ष्मी की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

लक्ष्मी की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

नवजात को पिलाया जा रहा बकरी का दूध

लक्ष्मी अपने पीछे एक नवजात बच्चे को छोड़ गई है। परिवार के लोगों का कहना है कि जिस बच्चे को इस समय अपनी मां का दूध मिलना चाहिए था, वह अब मां के बिना है। घर में जब बच्चा भूख से रोता है तो परिवार के लोगों की आंखें भर आती हैं। मां के नहीं रहने के कारण फिलहाल उसकी भूख मिटाने के लिए उसे बकरी का दूध पिलाया जा रहा है।

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