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Wed. Mar 4th, 2026

इटावा कांड- यादव कथावाचकों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट:ब्राह्मणों ने सिर मुंडवाकर नाक रगड़वाई थी

इटावा : इटावा में जिन यादव कथावाचकों को ब्राह्मणों ने पीटा था, उनके खिलाफ एसीजेएम कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। मुकट सिंह यादव और संत सिंह पर जाति छिपाकर धार्मिक आयोजन में भाग लेने और दो फर्जी आधार कार्ड रखने का आरोप है।

इनकी अग्रिम जमानत की अर्जी पहले ही खारिज हो चुकी है। शुक्रवार को कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद दोनों कथावाचकों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। 22 जून को ब्राह्मणों ने दोनों कथावाचकों को पीटकर उनका सिर मुंडवा दिया था। महिला के पैर पर नाक रगड़वाई थी। बाद में अखिलेश यादव ने कथावाचकों को लखनऊ बुलाकर सम्मानित किया था।

कथावाचकों के गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद अखिलेश यादव ने X पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा- न्याय व्यवस्था न्याय के लिए होती है, अन्याय के लिए नहीं।

यह फोटो 22 जून का है। दबंगों ने एक कथावाचक की चोटी काटी। उनका सिर भी मुंडवा दिया।

यह फोटो 22 जून का है। दबंगों ने एक कथावाचक की चोटी काटी। उनका सिर भी मुंडवा दिया।

यह फोटो 22 जून का है। जब महिला यजमान के पैरों पर कथावाचक से नाक रगड़वाई।

यह फोटो 22 जून का है। जब महिला यजमान के पैरों पर कथावाचक से नाक रगड़वाई।

क्या था मामला

कथा वाचक मुकुट मणि सिंह यादव कानपुर के रहने वाले हैं। इटावा में सिविल लाइन के जवाहरपुरा राजा का बाग में रहते हैं। संत सिंह यादव अछल्दा औरैया और श्याम कठेरिया बकेवर के साथ मिलकर भागवत पाठ करते हैं।

मुकुट मणि सिंह ने पुलिस को दी रिपोर्ट में बताया था- दादरपुर गांव के पप्पू बाबा ने 21 से 27 जून तक भागवत कथा की बुकिंग कराई थी। पहले ही दिन देर शाम भोजन करते वक्त पप्पू बाबा ने मुझसे मेरी जाति पूछी। जब मैंने बताया कि मैं यादव बिरादरी से हूं तो उन्होंने मुझ पर दलित होने का आरोप लगाया। कहा- ब्राह्मणों के गांव में भागवत पाठ करने की हिम्मत कैसे की।

मुकुटमणि ने बताया था- पप्पू बाबा के साथ अतुल, डीलर, मनीष और लगभग 50 अज्ञात लोगों ने मुझे लात-घूसे, जूते और चप्पलों से पीटा। गांव वालों के सामने मेरा सिर मुंडवाया गया। परीक्षित (यजमान) बनी महिला के पैरों में जबरन नाक रगड़वाई गई।

22 जून को एक वीडियो सामने आया। इसमें कुछ लोग कथावाचक मुकुट मणि और उनके साथी के साथ मारपीट करते नजर आ रहे थे। कथावाचक ने एएसपी से इसकी शिकायत की। एएसपी के आदेश पर पुलिस ने मारपीट करने वाले लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। इसके बाद 4 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा दिया गया था।

यजमान ने कथावाचकों पर दर्ज कराई FIR

SSP कार्यालय के बाहर पति जयप्रकाश के साथ रेनु तिवारी (नीले रंग की साड़ी में)। इनके घर में कथा हो रही थी

SSP कार्यालय के बाहर पति जयप्रकाश के साथ रेनु तिवारी (नीले रंग की साड़ी में)। इनके घर में कथा हो रही थी

इस घटना के दो दिन बाद यानी 24 जून को कथा के यजमान रेनू तिवारी ने कथावाचकों के खिलाफ थाना बकेवर में FIR दर्ज कराई। आरोप लगाया गया कि कथावाचक मुकट सिंह यादव और संत सिंह ने अपनी जाति छिपाकर कथा कही और दो अलग-अलग आधार कार्ड दिखाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच झांसी पुलिस को सौंप दी गई। झांसी के पूंछ थाना प्रभारी जेपी पाल को विवेचक नियुक्त किया गया।

गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों कथावाचकों ने अग्रिम जमानत की अर्जी दी थी, जिसे कोर्ट ने 16 जुलाई को खारिज कर दिया। इसके बाद विवेचक जेपी पाल ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर गिरफ्तारी वारंट की मांग की। शुक्रवार को कोर्ट ने दोनों कथावाचकों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया।

ब्राह्मणों ने जिस कथावाचक को पीटा…अखिलेश ने उसे सम्मानित किया

अखिलेश यादव ने 22 जून को ही कथावाचक और उनके साथियों को लखनऊ बुलाया। उन्हें ढोलक और हारमोनियम गिफ्ट की, कथा भी कहलवाई। 51-51 हजार रुपए देने का ऐलान किया। 21-21 हजार रुपए लिफाफे में मौके पर दिए।

अखिलेश ने कहा- प्रभुत्ववादी सीमाएं लांघ गए हैं। ये वर्चस्ववादी लोग सिर तक मुड़वा दे रहे हैं, रातभर पीटते हैं, ढोलक छीन लेते हैं और पैसों की मांग करते हैं। आखिर ये वर्चस्ववादी और प्रभुत्ववादी लोग ताकत कहां से पा रहे हैं? यह सरकार हार्टलेस है, हर असंवैधानिक काम का समर्थन करती है।

अखिलेश ने पीड़ित को हारमोनियम गिफ्ट की और कथा भी कहलवाई।

अखिलेश ने पीड़ित को हारमोनियम गिफ्ट की और कथा भी कहलवाई।

कथावाचन के लिए कानून बना दो…

अखिलेश यादव ने कहा- इस सरकार का रवैया क्या है? इसका रास्ता क्या है? कई मौकों पर मैंने कहा है- सरकार हार्टलेस है। हर असंवैधानिक काम का समर्थन करती है। बाबा साहेब के संविधान की प्रस्तावना के हिसाब से फैसले लेने लगें तो जिनके साथ अन्याय हो रहा है, उन्हें न्याय मिलने लगे। सरकार में बैठे लोग लगातार अन्याय करा रहे हैं।

वर्चस्ववादी लोगों को इतनी तकलीफ है तो कह दें कि पिछड़ों की ओर से दिया गया दान कभी स्वीकार नहीं करेंगे। कथावाचन के लिए कानून बना दो कि यह सिर्फ वर्चस्ववादी लोग ही करेंगे। चंदा, दान, चढ़ावा स्वीकार न करें।

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