नोएडा : नोएडा में 16 जनवरी की रात सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की पानी में डूबने से मौत हो गई थी। शासन की ओर से घटना को लेकर विशेष जांच दल (SIT) गठित की गई। SIT ने 22 से ज्यादा सवाल प्राधिकरण समेत तीन विभागों से पूछे।
नोएडा प्राधिकरण ने अपनी 150 पन्रों की, जबकि पुलिस विभाग ने 450 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी है। SIT का सवाल रहा कि रेस्क्यू में 2 घंटे की देरी क्यों हुई? इसका जवाब अधिकारियों को देते नहीं बना। इन रिपोर्ट को लेकर SIT टीम मेरठ रवाना हो गई।
सोर्सेज की मानें तो नोएडा में युवराज मेहता मौत हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम के फेल्योर की तरह सामने आ रहा है। ये फैक्ट पुलिस और नोएडा प्राधिकरण की रिपोर्ट में सामने आ गया है।
SIT रिपोर्ट का एनालिसिस करने के बाद इसे सीएम योगी आदित्यनाथ को सौंपेगी। इन रिपोर्ट में कुछ खास चेहरों को जिम्मेदार ठहराया गया है। कौन किस वजह से गलत पाया गया।
नोएडा शहर के रखरखाव की जिम्मेदारी प्राधिकरण के सीईओ की होती है। प्लॉट के पास हादसा होने के बावजूद अधीनस्थ अधिकारियों से जवाब-तलब नहीं किया गया। फाइल अप्रूव होने के बाद रोड के कट पर काम आगे नहीं बढ़ाया गया। इसका फालोअप करना सीईओ की जिम्मेदारी है।
यही वजह है कि जूनियर इंजीनियर को हटाने के बाद पहला बड़ा एक्शन सीईओ लोकेश एम. पर लिया गया। उनको पद से हटाकर वेटिंग लिस्ट में रखा गया है। SIT की रिपोर्ट के बाद आगे का एक्शन होगा।
नोएडा डीएम मेधा रूपम जिले की डिजास्टर मैनेजमेंट हेड हैं। हेड होने के बाद भी कोई विभागीय एक्शन नहीं लिया। वो हादसे के बाद चौथे दिन SIT के साथ मौके पर पहुंचीं। युवराज के परिवार से बात तक नहीं की। जबकि, घटना से एक दिन पहले ही उन्होंने आपदा प्रबंधन के साथ बैठक की थी।
युवराज की कार पानी में डूबने के दौरान रेस्क्यू के लिए पुलिस के बाद अग्निशमन की टीम ही मौके पर पहुंची थी। कर्मचारियों ने कहा कि हमें तैरना नहीं आता, हमारे पास उपकरण भी नहीं हैं। चीफ फायर ऑफिसर होने के नाते मौके पर भी नहीं पहुंचे, न ही किसी कर्मी को गाइड किया।
हादसे के बाद सबसे पहले पुलिस कट के स्पॉट पर पहुंची थी। डायल-112 का रिस्पांस टाइम विजिबिलिटी के अनुसार सही था, लेकिन एसएचओ सर्वेश सिंह मौके पर नहीं पहुंचे। न ही अधिकारियों को अपनी तरफ से रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी दी। SIT ने इनसे ये भी पूछा कि आपने एनडीआरएफ को भी समय पर जानकारी क्यों नहीं दी।
युवराज मेहता की मौत के मामले में जिन बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, उनमें अभय कुमार, संजय कुमार, मनीष कुमार, अचल वोहरा और निर्मल कुमार शामिल हैं।
अब तक 4 बिल्डरों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, जिस प्लाट में पानी भरा था और हादसा हुआ, वो अभय कुमार का है, जोकि बिज टाउन प्लानर के नाम पर रजिस्टर्ड है। बेसमेंट पर गड्ढा इन्होंने ही खुदवाया और खाली छोड़ दिया। अब यहां पानी भरा था, इसकी वजह से कार गिरने के बाद भी युवराज बाहर सुरक्षित नहीं निकल सका।

