मथुरा : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार को मथुरा-वृंदावन में रहेंगी। 7 घंटे के दौरे में वह बांके बिहारी मंदिर, निधि वन और श्रीकृष्ण जन्मभूमि पहुंचेंगी। मगर सबसे ज्यादा चर्चा में 1 ऐसा मंदिर है, जिसे मथुरा आने वाले टूरिस्ट भी ठीक से नहीं जानते। यह है श्रीकुब्जा कृष्ण मंदिर। जो बांके बिहारी मंदिर से सिर्फ 12km दूर है।
हकीकत ये है कि ब्रजवासी भी ठीक से इस मंदिर के बारे में नहीं जानते। अब राष्ट्रपति के अचानक मंदिर आने के प्लान के बाद यह मंदिर सुर्खियों में है।
श्रीकुब्जा कृष्ण मंदिर चर्चा में तब आया, जब राष्ट्रपति के मथुरा आने से पहले अधिकारियों के पास प्रोटोकॉल पहुंचा। सबसे पहले अफसरों ने इस मंदिर की लोकेशन तलाशी। बाद में सामने आया कि यह मंदिर शहर का दिल कहे जाने वाले होलीगेट से सिर्फ 500 मीटर दूर अंतापाडा में है।
होली गेट से जब हम अंतापाडा पहुंचे, वहां रेलवे लाइन से पहले दाएं हाथ पर एक छोटा सा गेट दिखाई पड़ा। इसके ऊपर लिखा है- श्रीकुब्जा कृष्ण मंदिर। इस गेट पर अभी नया पेंट कराया गया था। दीवारों पर श्रीकृष्ण की लीलाएं उकेरी गई थीं। इस मंदिर तक एक संकरी रोड आती है, इस पर इंटरलॉकिंग बिछाने का काम चल रहा था। मंदिर के बगल में खंडहर है, जहां मजदूर मलबा हटाते दिखे।

लोगों का कहना है- यहां कभी सड़क नहीं बनी। पहली बार यहां इंटरलॉकिंग की जा रही है।
मंदिर का रखरखाव 2 दुकानों के किराए से हो रहा
मंदिर की देखभाल कैसे होती है? इस सवाल पर पुजारी कहते हैं- मंदिर परिसर के बाहर 2 दुकान हैं, जिनके किराए से यहां का खर्च चलता है। इस मंदिर में इक्का-दुक्का भक्त ही आते हैं। इसलिए दान वगैरह नहीं मिल पाता।
हमने पूछा- इस वक्त तो मंदिर की मरम्मत हो रही है? रंग रोगन भी नया हुआ है? पुजारी बोले- मंदिर अभी तक टूटा-फूटा था, लेकिन भगवान की कृपा हुई तो इसके दिन भी बदल गए।
मान्यता- यहां दर्शन करने वालों के स्किन रोग दूर होते हैं…
हमने इस मंदिर से जुड़ी मान्यता पर सवाल पूछे। पुजारी आशीष चतुर्वेदी कहते हैं- द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण जब कंस से युद्ध करने मथुरा आए, तब कुब्जा इसी स्थान पर उनसे मिली थीं। कुब्जा के लिए कहा जाता है कि वह कंस की दासी थी, लेकिन वह भक्ति भगवान नारायण की करती थीं।
कुब्जा को चर्म रोग भी था। उसे देखते ही भगवान ने उसके पैर पर पैर रखा और ठोड़ी पर हाथ रखकर उसे सीधा खड़ा कर दिया। श्रीकृष्ण के स्पर्श से कुब्जा सुंदर स्त्री बन गई। उसका रोग भी दूर हो गया। तभी से भगवान इस मंदिर में कुब्जा के साथ विराजमान हो गए।
भक्तों के बीच मान्यता है कि इस मंदिर में चर्म (स्किन) रोग वाले अगर दर्शन करते हैं, तो उन्हें रोगों से मुक्ति मिलती है।

राष्ट्रपति के आने से पहले श्रीकृष्ण और कुब्जा का श्रृंगार किया जा रहा था।
राजेश बोले- कुछ वीडियो पोस्ट होने के बाद भक्त आने लगे
शहर के ठीक बीच में स्थित इस मंदिर के आसपास मिश्रित आबादी है। यहां करीब 15 हजार लोग रहते हैं। इसमें सबसे ज्यादा ब्राह्मण-यादव जाति के लोग हैं। इसके बाद प्रजापति और कुशवाहा बिरादरी के लोग हैं। बाकी धर्म और जाति के लोग भी यहां बसे हुए हैं।
यहीं के रहने वाले राजेश यादव कहते हैं- इस इलाके की स्थिति बहुत खराब रही है। यहां कभी सफाई नहीं होती है। एक बार सड़क बन गई, तो दोबारा किसी ने इस क्षेत्र की तरफ देखने की जहमत तक नहीं उठाई।
राजेश कहते हैं- इस मंदिर को सिर्फ यहां पर रहने वाले लोग ही जानते थे। लोग भी इस मंदिर में कम ही आते-जाते थे। मगर पिछले कुछ महीनों में यहां भक्त आने लगे हैं, क्योंकि सोशल मीडिया पर मंदिर के कुछ वीडियो पोस्ट हुए थे।
घरों की दीवारें भगवा पेंट हुई, लोग खुश
मथुरा के परिक्रमा मार्ग में बने इस मंदिर के रास्ते में दोनों तरफ की दीवारों पर मकानों को भगवा रंग से पोतकर उन पर आकर्षक चित्रकारी भी की जा रही है।
जिन-जिन क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। उस क्षेत्र के लोग राष्ट्रपति के आगमन से खासे खुश नजर आ रहे हैं। उनका मानना है कि अगर राष्ट्रपति नहीं आती तो उनके नारकीय क्षेत्र की दशा कभी नहीं सुधरती।
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