मेरठ : मेरठ में पस्तरा गांव के ललित कुमार डेढ़ साल पहले अग्निवीर बनकर फौज में भर्ती हुए थे। जाट रेजीमेंट में ललित को पोस्टिंग मिली। 6 महीने पहले वो जम्मू-कश्मीर के पुंछ में तैनात हुए।
25 जुलाई को पेट्रोलिंग के दौरान पुंछ में अचानक लैंडमाइन ब्लास्ट हुआ। ललित उसी जगह पेट्रोलिंग कर रहे थे, जहां ब्लास्ट हुआ। ब्लास्ट में ललित शहीद हो गए।
हालांकि सेना की टीम ने उन्हें इमरजेंसी मेडिकल सर्विसेज दी। लेकिन ललित बच नहीं सके।
27 जुलाई को ललित का शव मेरठ सैन्य सम्मान के साथ लाया गया। यहां उनका अंतिम संस्कार हुआ। परिवार में पिता, मां, एक बड़ी बहन और दो बड़े भाई हैं। ललित सबसे छोटे थे। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। ऐसे में घर को चलाने वाले ललित इकलौता सहारा थे।
घर की हर मुश्किल दूर करना था
ललित के घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। पूरा परिवार मजदूरी करता है। महज दो कमरे के छोटे से घर में आधुनिक सुख, सुविधा का कोई साधन नहीं है। परिवार की इसी गरीबी को दूर करने के लिए ललित फौज में गया था।
लेकिन सपने पूरे करने से पहले ही वो दुनिया छोड़ गया। उसका सपना था नया घर बनवाएगा। बहन की अच्छी जगह शादी कराएगा। घर में हर वो चीज लाएगा, जो होना चाहिए। अपने लिए उसका कोई सपना नहीं था। वो अपने परिवार के लिए ही सबकुछ करना चाहता था।
मां तू चिंता क्यों करती हो… अब तेरा बेटा फौजी है। तेरे सारे दुख दूर कर दूंगा। दोनों बड़े भईया क्या करते हैं तुम ये मत सोचो। मुझे देख तेरा बेटा सेना में है। वो भारत मां की सेवा करेगा, अपनी मां का भी ख्याल रखेगा। राखी बाद घर आऊंगा तो तुझे इतने पैसे दूंगा कि घर का सारा सामान खरीद लेना।
ये वो वादा है जो अग्निवीर ललित कुमार ने अपनी मां से किया था। पिछले 7 दिनों से ललित जब भी मां से फोन पर बात करता, तो दिलासा देता कि अब दुखभरे दिन ढल चुके हैं। मां तेरी सारी परेशानी मैं जल्दी खत्म कर दूंगा।
ललित की मां के लिए ये बातें अब सिर्फ दिलासा बन चुकी हैं… मां रोते हुए यही कहती है बेटा मुझे कुछ नहीं चाहिए। बस तू वापस लौट आ मेरे लाल…

ललित 9 जुलाई को ही घर से ड्यूटी के लिए गए थे।
तस्वीरें

मेरठ में अग्निवीर ललित के शव का गांव में ही अंतिम संस्कार किया गया।

तिरंगे में बेटे का शव लिपटा देखकर मां और बहन फूट-फूटकर रोईं।

अग्निवीर ललित को सेना के जवानों ने अंतिम सलामी दी।
शहीद ललित ने आखिरी कॉल में अपनी मां से जो कहा, वो पढ़िए…
24 जुलाई को आखिरी कॉल
ललित की मां सरोज बाला की आंखों के आंसू नहीं थम रहे। घर में पहुंची महिलाओं से सरोज रोते हुए बार-बार यही कहती हैं मेरे बेटे तू आ जा…
तुझे तो बड़े-बड़े काम करने थे। तू तो इतनी छोटी उम्र में कैसे चला गया। मां सरोज ने दैनिक भास्कर को बताया- 24 जुलाई को ललित से शाम के टाइम फोन पर बात हुई थी। उस दिन उसकी आखिरी बार आवाज सुन पाई हूं।
पता नहीं था कि उसके बाद अपने बेटे की आवाज कभी नहीं सुन पाऊंगी। आधे घंटे की बातचीत में ललित ने 10 मिनट सिर्फ मां से ही बात की। इसके बाद बहन काजल फिर भाइयों और पिता से बात की थी।

