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Sat. Feb 14th, 2026

जेल में मुस्कान बेटी को टूटे खिलौने से बहला रही:बैरक में पलंग, पतला गद्दा और कंबल

मेरठ : नीले ड्रम में पति सौरभ को काटकर सीमेंट से जमा देने वाली मुस्कान 10 महीने से जेल में है। 24 नवंबर को उसने बेटी राधा को जन्म दिया। पहले वो कॉमन बैरक में थी, जिसमें 30 महिला बंदी थीं। हॉस्पिटल से डिस्चार्ज के बाद मुस्कान को क्वारैंटाइन बैरक में रखा गया है।

जेल में पहले वह सिलाई-बुनाई के काम करती थी, मगर अब वह सिर्फ बेटी की देखभाल करती है। उसे फोल्डिंग बेड, पतला गद्दा और ओढ़ने के लिए कंबल दिया गया है। झुनझुना और एक छोटे हाथी के टूटे खिलौने से अपने बच्चे को बहला रही है।

फोल्डिंग बेड, पतला गद्दा, ओढ़ने के लिए कंबल

मुस्कान को जेल की 8X10 की बैरक में रखा गया है। इस बैरक में एक तरफ लोहे की सलाखें हैं, जबकि 3 तरफ दीवार है। इस बैरक में उसके अलावा सिर्फ उसकी बेटी है। एक कोने में फोल्डिंग बेड है, जिस पर एक पतला गद्दा बिछा रहता है। मुस्कान के पास ओढ़ने के लिए कंबल है।

इस बैरक के एक कोने में लकड़ी की छोटी अलमारी है, जो दीवार में बनी हुई है। इसमें ही मुस्कान अपने और बेटी के कपड़े रखती है। बेड के पास जमीन पर एक कटोरी और चम्मच रखा रहता है। पास ही पीने के पानी के लिए एक बोतल रहती है।

इस बैरक की 1 दीवार पर छोटा रोशनदान है। अक्सर बेटी के गीले कपड़े सुखाने के लिए मुस्कान यही पर कपड़े टांग देती है। बैरक में एक झुनझुना और एक छोटा हाथी का टूटा खिलौना है, जिससे मुस्कान बेटी को बहलाती है।

बच्ची की देखभाल में निकल रहा पूरा दिन

मुस्कान सुबह 6 बजे उठती है, 7 बजे जेल में चाय दी जाती है। फिर नित्यकर्म करते-करते 8 बज जाते हैं। जेल की तरफ से मुस्कान को 9 बजे नाश्ता दिया जाता है। 10 बजे बाकी बंदी तो जेल की तरफ से तय किए गए काम करते हैं, लेकिन मुस्कान को फिलहाल छूट मिली हुई है।

वो बैरक में और उसके सामने बने मैदान में बेटी के साथ समय बिताती है, धूप में बेटी की मालिश करती है। फिर उसको नहलाती है, तैयार करती है। इस दौरान कुछ बंदी महिलाएं भी उसके पास आ जाती हैं, बच्ची को तैयार करने के बाद उसको दूध पिलाती है और फिर सुला देती है।

ये सब करते-करते 2 बज जाते हैं, अब बंदियों के लंच का समय हो जाता है। लंच करने के बाद मुस्कान को उसको बैरक में वापस भेज दिया जाता है। इस दौरान बंदियों की गिनती होती है। अब मुस्कान अपनी बेटी के साथ बेड पर आराम करती है।

बच्ची की देखभाल में ठीक से खाना नहीं खा पाती मुस्कान

इसके बाद शाम 5 बजे मुस्कान को चाय दी जाती है। बाकी बंदी तो इसके बाद शाम को एक बार फिर काम करने के लिए बैरक से बाहर आ जाते हैं, मगर मुस्कान को छूट मिली हुई है। वह धूप ढलने तक बैरक से बाहर रहती है, फिर बेटी को लेकर बैरक के अंदर चली जाती है।

इसके बाद वो रात 8 बजे तक अपनी बेटी के साथ बैरक में ही रहता है। इसके बाद जेल की तरफ से मुस्कान को खाना दिया जा रहा है। एक बार फिर जेल की बैरकों में रहने वाले बंदियों की गिनती होती है। मुस्कान जेल में अपनी बैरक में ही समय बिताती है।

जेल के अधिकारियों ने बताया कि दोपहर में कई बार ऐसा होता है कि बेटी की देखभाल करते हुए मुस्कान खाना नहीं खा पाती है, इसलिए वो बचे हुए खाने को अपने पास रख लेती है, बाद में बैरक में खाती रहती है।

ज्यादा प्रोटीन वाला फूड लेती है मुस्कान

मुस्कान को प्रोटीन वाला फूड आइटम ज्यादा दिया जाता है। सुबह के नाश्ते में दूध-फल शामिल रहता है। जेल के डॉक्टर के मुताबिक, मुस्कान बच्चे को फीड करवाती है, इसलिए उसको हेल्दी फूड दिया जाता है।

दिन के खाने में सब्जी, रोटी, दाल के साथ दलिया शामिल किया गया है। बंदियों को गुड़ भी जाड़े में दिया जा रहा है। हॉस्पिटल की महिला डॉक्टर ने मुस्कान को आयरन, मल्टीविटामिन की टैबलेट और सिरप दिए हैं। बच्ची का वैक्सीनेशन भी शुरू हो चुका है। उसका हेल्थ कार्ड भी बना है।

मुस्कान का ट्रायल और टाइम टेबल

कोर्ट ट्रायल की जब तारीख आती है, तो मुस्कान जेल के वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग के कमरे में जाती है, इस दौरान महिला वॉर्डन और गार्ड उसके साथ रहते हैं। जेल एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, जेल में सब कुछ मैन्युअल के मुताबिक होता है।

मतलब, हर चीज का टाइम टेबल सेट है। मगर मुस्कान के केस में ये मैन्युअल लागू नहीं होता है। क्योंकि वो अभी मां बनी है। उसके पास नवजात बच्ची है, जो पूरी तरह से अपनी मां पर डिपेंड है, इसलिए मुस्कान का टाइमटेबल कई बार मिसमैच हो जाता है। बच्ची कई बार रात में उठकर रोने लगती है, उसे फिडिंग करवाती है। उसके कपड़े भी बदलवाने पड़ते हैं।

10 महीनों में मुस्कान से मिलने के लिए कोई नहीं आया है। दादी का परिवार तो उसके खिलाफ दर्ज सौरभ हत्याकांड का वादी ही है। वहीं, बेटी के नाना-नानी ने भी मुस्कान से मुंह मोड़ लिया है। उसके पास अपने कपड़े और रोजमर्रा में काम आने वाले चीजें नहीं हैं। NGO से दान में मिलने वाले कपड़े और खिलौने ही मुस्कान की जिंदगी में मददगार साबित हो रहे हैं।

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