प्रयागराज : द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा- 3 शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में हैं। प्रशासन उनका सर्टिफिकेट मांगने वाला कौन होता है? उसे कोई अधिकार नहीं। प्रशासन ने निर्दोष ब्राह्मणों के साथ जो निर्दयता से मारपीट की, वह बेहद निंदनीय है। सदानंद सरस्वती ने यह बात जबलपुर में नर्मदा जन्मोत्सव कार्यक्रम में कही।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई से नाराज बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने 5 पेज के लेटर में लिखा कि प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के शिष्यों की चोटी पकड़ी गई। इससे आहत होकर यह फैसला लिया।
इधर, माघ मेले में शिविर के बाहर धरने पर बैठे अविमुक्तेश्वरानंद ने तिरंगा फहराया। उन्होंने कहा- अगर केशव मौर्य का बस चलता तो वो कब का हमें नहलाकर चले गए होते। उनको डांटा जा रहा। यहां आने नहीं दिया जा रहा। एक समझदार नेता को दबा दिया गया।

अविमुक्तेश्वरानंद ने शिविर के बाहर ही सोमवार को झंडा फहराया।
दरअसल, रविवार को केशव मौर्य प्रयागराज पहुंचे। सर्किट हाउस में शंकराचार्य विवाद से जुड़े सवाल पर कहा- जब मुझसे बात करने को कहा जाएगा, जरूर करूंगा। मैं पूज्य शंकराचार्य से प्रार्थना कर सकता हूं, उनके चरणों में शीश झुकाकर निवेदन करता हूं कि संगम में स्नान कर विवाद खत्म करें।
माघ मेला प्रशासन और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच 9 दिन से विवाद चल रहा है। कम या खत्म होने की बजाय मामला बढ़ता जा रहा। रविवार को अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था- कितने भी जुल्म कर लो, पीछे नहीं हटूंगा।
माघ मेले किन्नरों ने देशभक्ति गानों पर लगाए ठुमके
गणतंत्र दिवस पर माघ मेले के सेक्टर- 6 स्थित किन्नर अखाड़े के शिविर में ध्वजारोहण किया गया। किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर और प्रदेश अध्यक्ष स्वामी कल्याणी नंद गिरी (छोटी गुरु मां) ने अपने शिष्यों के साथ ध्वजारोहण किया और राष्ट्रगान गाया। इस मौके पर किन्नरों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किया। देशभक्ति के गीत सुनाए और जमकर डांस किया। इस कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
बटुकों की पिटाई से नाराज PCS अफसर का इस्तीफा
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से पिटाई से नाराज बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने 5 पेज के लेटर में लिखा है कि प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के शिष्यों की चोटी पकड़ी गई। इससे आहत होकर उन्होंने यह फैसला लिया।
उन्होंने लिखा-

ऐसी घटना किसी भी साधारण ब्राह्मण को अंदर से हिला देती है। इससे ऐसा लगता है कि प्रशासन और मौजूदा सरकार ब्राह्मणों और साधु-संतों के खिलाफ सोच के साथ काम कर रहे हैं। उनकी इज्जत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। ब्राह्मण की बात करने वाला कोई नहीं है।

