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Mon. Sep 7th, 2026

ASI अफसर मस्जिद के नीचे मिले कुएं में उतरे: कहा- 250 साल पुराना हो सकता है, सहारनपुर जा रहे अजय राय गिरफ्तार

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में ढहाई गई मस्जिद के नीचे मिले कुएं की जांच के लिए सोमवार सुबह ASI की टीम पहुंची। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 3 अफसर दोपहर 2 बजे कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे। कुएं के अंदर उतरकर जांच की। फीता डालकर उसकी गहराई मापी। एएसआई अफसर ने कहा- कुआं 200 से 250 साल पुराना हो सकता है।

मामले में सियासत भी तेज है। सहारनपुर जा रहे सपा विधायक अतुल प्रधान को पुलिस ने मेरठ में हाउस अरेस्ट कर लिया। प्रधान जैसे ही अपने घर में कार पर सवार हुए। पुलिस ने आगे जीप खड़ी कर दी। विधायक ने कहा- आपके पास लाठी है। आप चलाओ, लेकिन हम जरूर जाएंगे। सपा विधायक आशु मलिक, सपा नेता शायान मसूद को भी पुलिस ने रोक दिया।

लखनऊ में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को गिरफ्तार कर लिया गया। विपक्षी डेलिगेशन के सहारनपुर पहुंचने को लेकर सपा सांसद इकरा हसन ने कहा- हम लोग रूट बदलकर किसी तरह से यहां पहुंचे हैं। जिन अधिकारियों की मौजूदगी में कार्रवाई हुई, वो मिलने से मना कर रहे हैं। सपा सांसद हरेंद्र मलिक कमिश्नर ऑफिस भी गए थे, लेकिन उन्हें वहां कोई अफसर नहीं मिला।

शनिवार को 16 घंटे बुलडोजर चलाकर मस्जिद ढहाई गई थी। रविवार सुबह जब मलबा हटाया गया तो नीचे कुआं मिला। यह 20 फीट गहरा और डेढ़ मीटर चौड़ा है। पुलिस ने इसे लोहे की चादर से ढंक दिया है, ताकि मलबा अंदर न जाए। कुआं कितना पुराना है? इसका पता लगाने के लिए प्रशासन ने ASI को बुलाया है।

मस्जिद वाली जगह पर फोर्स की तैनाती के साथ बैरिकेडिंग भी की गई है। वहीं, मस्जिद की शिकायत करने वाले विकास त्यागी ने दावा किया- यहां पहले मंदिर रहा होगा। उसे तोड़कर मस्जिद बनाई गई। जांच होनी चाहिए। मुस्लिम धर्मगुरुओं और मस्जिद पक्ष का दावा है कि मस्जिद करीब 100 साल पुरानी थी। 70 साल पुराने वक्फ के दस्तावेजों में इसका जिक्र है।

मस्जिद के नीचे मिले कुएं की जांच करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 3 अफसर पहुंचे।

मस्जिद के नीचे मिले कुएं की जांच करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 3 अफसर पहुंचे।

सहारनपुर आ रहे सपा विधायक अतुल प्रधान को पुलिस ने मेरठ में हाउस अरेस्ट कर लिया गया।

सहारनपुर आ रहे सपा विधायक अतुल प्रधान को पुलिस ने मेरठ में हाउस अरेस्ट कर लिया गया।

पोस्टर पर लिखा था- मुजफ्फरनगर दंगा न भूले थे और न भूलेंगे।

पोस्टर पर लिखा था- मुजफ्फरनगर दंगा न भूले थे और न भूलेंगे।

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय को पुलिस ने गिरफ्तार किया, सहारनपुर जा रहे थे

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय को पुलिस ने लखनऊ में गिरफ्तार कर लिया। अजय राय ने X पर लिखा- सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को ध्वस्त करने की घटना के पीड़ितों और मस्जिद कमेटी के सदस्यों से मिलने जाने से मुझे और हमारे कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए भाजपा सरकार के इशारे पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने पूरी तरह से तानाशाही रवैया अपनाया है।

भाजपा सरकार के सीधे कहने पर पुलिस ने बल प्रयोग कर हम सबको गिरफ्तार कर लिया है। सरकार यह भली-भांति सुन ले कि इस तरह के दमनकारी हथकंडों और पुलिसिया बल से हमारी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। पीड़ितों को न्याय दिलाने की हमारी लड़ाई हर हाल में जारी रहेगी।

ASI अफसर बोले- सहारनपुर का इतिहास बहुत समृद्ध

ASI अफसर ने कहा- सहारनपुर का इतिहास बहुत समृद्ध है। यहां वैदिक काल से लेकर हड़प्पा काल और बाद के विभिन्न राजवंशों से जुड़े मानव निवास के प्रमाण मिलते हैं। सहारनपुर में अलग-अलग कालखंडों की मानवीय संस्कृतियों के अवशेष जमीन के भीतर मिल सकते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल संभावना के आधार पर इस संरचना को शाहजहां कालीन नहीं बताया जा सकता। इसके लिए कोई प्रमाणिक सामग्री, जैसे सील, सिक्का अथवा अन्य प्रामाणिक पुरातात्विक साक्ष्य मिलना जरूरी होगा।

संरचना के मंदिर अथवा किसी अन्य धार्मिक स्थल से जुड़े होने के सवाल पर अधिकारी ने कहा कि जब तक कोई प्रमाणिक साक्ष्य नहीं मिलता, तब तक इसके बारे में कुछ भी कहना उचित नहीं होगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि संभावनाओं में इतिहास नहीं लिखा जा सकता। पुरातात्विक निष्कर्ष प्रमाणों के आधार पर ही निकाले जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मौके पर फिलहाल किसी मंदिर अथवा अन्य भवन की स्पष्ट संरचना दिखाई नहीं दे रही है। प्रत्यक्ष रूप से जो दिखाई दे रहा है, वह कुएं जैसी संरचना है।

ASI अधिकारी बोले- लखौरी ईंटों की संरचना उत्तर मध्यकालीन

  • कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद नीचे मिली करीब 20 फीट गहरी संरचना की जांच के लिए सोमवार को लखनऊ से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के सहायक पुरातत्व अधिकारी मनोज कुमार यादव मौके पर पहुंचे। उन्होंने सीढ़ी के जरिए संरचना के अंदर उतरकर करीब 10 मिनट तक निरीक्षण किया। बाहर आने के बाद उन्होंने प्रथम दृष्टया इसे उत्तर मध्यकालीन वास्तुकला से संबंधित लखौरी ईंटों से बनी कुएं जैसी संरचना बताया।
  • मनोज कुमार यादव ने कहा कि वे माननीय न्यायालय के आदेश के अनुपालन में सामने आई इस संरचना के निरीक्षण के लिए विभाग की ओर से पहुंचे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय संरचना की पूरी तरह पहचान करना संभव नहीं है, क्योंकि इसके अंदर मलबा भरा हुआ है। हालांकि, प्रथम दृष्टया इसकी बनावट कुएं जैसी दिखाई दे रही है।
  • अधिकारी के मुताबिक, यह संरचना मौजूदा सतह से करीब 20 फीट नीचे है और इसका व्यास लगभग तीन फीट है। इसमें इस्तेमाल हुई ईंटें लखौरी ईंटें हैं। उन्होंने बताया कि संरचना में लगी ईंटों का आकार लगभग 20×10×5 सेंटीमीटर के आसपास है। संरचना के ऊपरी हिस्से में करीब तीन फीट का मिट्टी और अन्य सामग्री का डिपॉजिट मिला है।
  • अधिकारी ने बताया कि ऊपर की तरफ करीब तीन फीट की गहराई पर एक मोल्डेड ईंटनुमा संरचना भी मिली है। ऐसा प्रतीत होता है कि किसी ईंट को काटकर गोलाकार रूप दिया गया था। संरचना के संबंध में मौके पर जो चीजें प्रत्यक्ष दिखाई दे रही हैं, उनके आधार पर ही फिलहाल इसका आकलन किया जा रहा है।

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