वाराणसी : मणिकर्णिका घाट को लेकर मचे बवाल को लेकर सीएम योगी ने शनिवार को वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। रानी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को तोड़े जाने के आरोपों पर कहा- काशी को बदनाम करने की साजिश हुई। कुछ लोग काशी के विकास में बैरियर बन रहे हैं। इसलिए आज मुझे खुद यहां आना पड़ा है।
योगी ने कहा- काशी अविनाशी है। काशी के लिए हर भारतीय श्रद्धा का भाव रखता है, लेकिन स्वतंत्र भारत में काशी का जो विकास होना चाहिए था, वो नहीं हुआ। 11 सालों में काशी एक बार फिर से अपने अध्यात्मिक विरासत का संरक्षण कर रहा है। एक नई ऊंचाई को छू रहा है। काशी को वैश्विक नई पहचान मिल रही है।
उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए कहा- काशी में 2014 के पहले कैसे हालात थे। ये किसी से छिपा हुआ नहीं था। गंगा जल आचमन तो दूर स्नान करने के लायक भी नहीं था। आज आचमन भी करिए, स्नान भी करिए। घाटों की दुर्गति की बात तो सब जानते ही हैं। आज ये घाट सबको आकर्षित करते हैं।

सीएम योगी आदित्यनाथ काल भैरव की आरती उतारी।

सीएम योगी ने बाबा विश्वनाथ को बेलपत्र और माला चढ़ाई।

मणिकर्णिका घाट पर पुलिस बल तैनात है। आज सीएम योगी घाट का निरीक्षण करेंगे।
2014 से पहले गंगा का जल आचमन तो दूर स्नान करने लायक नहीं था
- सीएम ने कहा- काशी विश्वनाथ धाम बनने से पहले 5 हजार से 25 हजार श्रद्धालु आते थे, अब निर्माण होने के बाद 1.25 से डेढ़ लाख श्रद्धालु हर दिन पहुंच रहे हैं। सावन, शिवरात्रि और अन्य त्योहारों पर 6 से 10 लाख श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
- उन्होंने कहा- पिछले साल में 11 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने काशी विश्वनाथ में दर्शन किए। विकास की परियोजनाओं को देखा। काशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद देश की जीडीपी 1.3 लाख करोड़ का योगदान दिया। फिर चाहे पुरोहित, गाइड और व्यापार के रूप में लोगों को रोजगार मिले, नाविक और टैक्सी के लिए भी लोगों को रोजगार मिले
- सीएम ने कहा- देश के अलग-अलग कोने तक वंदे भारत से लेकर अमृत भारत की ट्रेनों की कनेक्टिविटी बढ़ी है। देश का पहला रोपवे काशी में बना है। काशी विश्वनाथ धाम के साथ आध्यात्मिक महत्व के साथ बाकी स्थलों के संरक्षण करते हुए विरासतों को नए कलेवर में पेश करने का काम किया गया है।
- योगी ने कहा- यहां के पवित्र मंदिर और मां गंगा से यहां की पहचान है, 2014 से पहले गंगा जल आचमन तो दूर स्नान करने योग्य भी नहीं था। आज आचमन भी करिए, स्नान भी करिए।
पहले काशी में कैसी स्थितियां थीं, किसी से छिपा नहीं
सीएम ने कहा- देश की संसद में काशी का प्रतिनिधि खुद पीएम मोदी करते हैं। शुरू से उन्होंने कहा है कि पुरातन काया को संरक्षित करते हुए नए कलेवर में देश के सामने पेश करना चाहिए उसके अनुरूप काशी के लिए योजनाएं बनीं, 55 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट बने, 36 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट काम पूरे हुए हैं। बाकी पर काम चल रहा है।
शिक्षा, स्वस्थ्य, कनेक्टिविटी, इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर काशी में नए संस्थान खुल सके, उद्यमियों के उत्पादों को जी-टैग के जरिए पहचान दिलाने की दिशा में हम काम कर रहे हैं।
योगी बोले- काशी को बदनाम करने की साजिश हुई
काशी को बदनाम करने की साजिश हुई। कुछ लोग विकास में बैरियर बन रहे हैं। 11 सालों में हुए विकास के रास्ते में बाधक बन रहे हैं, इसलिए आज मुझे यहां आना पड़ा है। काशी अविनाशी है, काशी के लिए हर भारतीय श्रद्धा का भाव रखता है, लेकिन स्वतंत्र भारत में काशी का जो विकास होना चाहिए था, उस समग्र विकास के कार्यक्रम को महत्व नहीं मिला, जैसा होना चाहिए था पिछले 11 सालों में काशी एक बार फिर से अपने अध्यात्मिक विरासत का संरक्षण कर रहा है। एक नई ऊंचाई को छू रहा है। काशी को वैश्विक नई पहचान मिली है।
मंदिरों को नहीं तोड़ा गया है, न तोड़ा जायेगा- मेयर

मेयर बोले-कुम्भा महादेव मंदिर को तोड़ने की बात चला रहा विपक्ष, मंदिर विश्वनाथ कॉरिडोर में सुरक्षित।
वहीं, इस मामले में महापौर अशोक तिवारी ने कहा – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी और अयोध्या में सनातन धर्म के गौरव को पुनर्स्थापित करने का ऐतिहासिक कार्य किया है। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे झूठ और तकनीक का सहारा लेकर आस्था पर चोट करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जिस ‘कुम्भा महादेव मंदिर’ को लेकर दुष्प्रचार किया जा रहा है, वह अपने स्थान पर ससम्मान विराजमान है। उन्होंने कहा कि मंदिर में नंदी और गणेश जी की प्रतिमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और वहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना हो रही है। इसी प्रकार रानी अहिल्याबाई की मूर्ति को भी सुरक्षित (संरक्षित) किया गया है, जिसे परियोजना के बाद स्थापित किया जाएगा।
प्रशासन सिर्फ दो मूर्तियों की बात ही कर रहा

प्रशासन द्वारा की जा रही अपील।
इन सात दिनों में से शुक्रवार तक तीन दिन बीत चुके हैं। शेष चार दिन और प्रतीक्षा के बाद ही ट्रस्ट की ओर से कोई कदम उठाया जाएगा। ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंत राव होल्कर ने कहा- मुझे यह सूचना मिल रही है कि जिला प्रशासन सिर्फ दो मूर्तियों की बात ही कर रहा है।
जो दो साबूत मूर्तियां मिली हैं वह तो महत्वपूर्ण हैं ही लेकिन रानी मां की शिवलिंग लेकर बैठी हुई मुद्रा में जो दो मूर्तियां थी वह अधिक महत्वपूर्ण हैं। हमने चारों मूर्तियां ट्रस्ट की सुपुर्दगी में देने का अनुरोध जिला प्रशासन से किया है।
सभी कलाकृतियों एवं मूर्तियों को सुरक्षित रखा गया- DM
वाराणसी के डीएम ने भी एक बार फिर से ट्वीट किया कि, ‘पुनर्निर्माण क्षेत्र में एक मढ़ी और दीवारों पर स्थित कुछ कलाकृतियां भी थी, जो कार्य के दौरान प्रभावित हुई हैं. इसे लेकर सोशल मीडिया पर कुछ भ्रामक एवं निराधार दावे प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। घाट पर मौजूद सभी कलाकृतियों एवं मूर्तियों को सुरक्षित रखा गया है।
उन्होंने बताया कि तथ्य यह है कि संस्कृति विभाग द्वारा सभी कलाकृतियों को विधिवत संरक्षित कर सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। पुनर्निर्माण कार्य के बाद इन्हें पहले के जैसा स्वरूप में फिर से स्थापित किया जाएगा। जनसामान्य से आग्रह है कि भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही विश्वास करें।

