वाराणसी : शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने काशी पहुंचकर गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि पूरे देश में लोगों ने वीडियो में देखा कि बटुकों को उनकी चोटी पकड़कर उन्हें अपमानित किया जा रहा है। अपनी गलती को गलती न मानना और अपने अपराध को न स्वीकार करना ये उन पर निर्भर करता है। जो अपराध किया वो सबके सामने आ ही गया है। अपने लोगों ने तो संयम से 11 दिन प्रयागराज में रहकर उनको मौका दिया कि आपसे जो अपराध हुआ है चाहे तो आप सुधार सकते हैं, लेकिन उन्होंने नहीं सुधारा। इसके बाद काशी वापस लौट गए हैं। इस पार्टी की सरकार में न्याय की कोई आशा न करे यही संदेश मिला है।
वो माघ मेले में धरने के दौरान डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की टिप्पणी पर बोल रहे थे। डिप्टी सीएम ने कहा था कि मुख्यमंत्रीजी ने संज्ञान लिया है। मुझे जब बात करने के लिए कहा जाएगा, जरूर करूंगा। मैं प्रार्थना कर सकता हूं। चरणों में शीश झुका सकता हूं। सपा मुखिया अखिलेश यादव के बयान पर शंकराचार्य ने कहा कि जब स्वयं राजनीतिक नेता इस घटना को अनिष्टकारी बता रहे हैं, तो यह स्पष्ट है कि मामला केवल धार्मिक नहीं, बल्कि शासन और संवेदनशीलता से भी जुड़ा है।
इसके अलावा, अविमुक्तेश्वरानंद ने संगम स्नान न कर पाने को अनिष्टकारी और अकल्पनीय बताया। कहा- 11 दिनों तक लगातार अवसर दिए जाने के बावजूद गलती न सुधारना दुर्भाग्यपूर्ण है। सनातन परंपरा में यज्ञ तब तक पूर्ण नहीं माना जाता, जब तक पूर्णाहुति न हो। यह माना जाता था कि शंकराचार्य के स्नान के साथ ही समस्त सनातन धर्मियों का स्नान पूर्ण होता है। इस बार पूर्णाहुति नहीं हुई।

काशी के मठ में शंकराचार्य ने पूजन के बाद प्रसाद बांटा।

दर्शन को आए श्रद्धालुओं से गोहत्या के खिलाफ आंदोलन में साथ देने को कहा।

शंकराचार्य ने श्रद्धालुओं से भेंट की, बोले-प्रयागराज में सनातन का अपमान हुआ।
यूजीसी का नया एक्ट समाज को लड़ाने वाला है
काशी आगमन पर उन्होंने मठ में विधिवत दर्शन-पूजन किया। इस दौरान संत समाज के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक भी हुई। इसमें गोरक्षा आंदोलन और हालिया घटनाक्रमों पर गंभीर चर्चा हुई।
यूजीसी (UGC) से जुड़े विवाद पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह किसी एक पार्टी का मुद्दा नहीं, बल्कि समाज को आपस में लड़ाने वाला विषय है। एक जाति को दूसरी जाति के सामने खड़ा कर देना, उन्हें आपस में लड़ाना, यह हिंदू समाज को कमजोर करने का रास्ता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंचों से एक बात कही जाती है और व्यवहार में ठीक उसका उलटा किया जाता है। मंच से कहा जाता है ‘बंटोगे तो कटोगे’, लेकिन व्यवहार में बांटने और काटने की मशीनें लाई जा रही हैं।
सरकारें गोहत्या बंद करने के लिए गंभीर नहीं
शंकराचार्य ने कहा कि केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर सरकारें गोहत्या बंद करने के लिए गंभीर नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग गौ-हत्या का मुद्दा उठाते हैं, उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया जाता है। शंकराचार्य ने साफ शब्दों में कहा कि सनातन परंपरा किसी सरकार, किसी नेता या किसी राजनीतिक दल से संचालित नहीं होती।
शंकराचार्य ने कहा- हमारी आवाज बंद करने की कोशिश की जाएगी, लेकिन हम रुकेंगे नहीं। गोमाता की रक्षा के लिए जो कदम हमने आगे बढ़ाया है, उसमें अब हर सनातनी को जुड़ना होगा। कौन सरकार है, कौन मुख्यमंत्री है, कौन नेता है, कौन पार्टी है, यह हम नहीं देख रहे।
कहने से पाकिस्तानी नहीं होंगे, सिद्ध करना होगा
शंकराचार्य ने बताया कि विश्व हिंदू रक्षा परिषद (वीएचआरपी) जैसे संगठनों ने रायबरेली में उनके खिलाफ पोस्टर लगाए, जिनमें उन्हें कलयुगी रावण और पाकिस्तानी एजेंट तक कहा गया। इन आरोपों को सिद्ध करना पड़ेगा। केवल बोल देने से कुछ नहीं होता। हम जो कहते हैं, उसके पीछे प्रमाण और तर्क देते हैं।
शंकराचार्य ने माघ मेले के दौरान बवाल पर कहा कि जो कुछ हुआ, उसका पूरा सच आज भी सामने नहीं आया है। जनता ने घटना का केवल एक अंश देखा है। अगर पूरा वीडियो सामने आता, तो तस्वीर बिल्कुल अलग होती।
उन्होंने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि घटना के बाद न तो ठोस जांच हुई और न ही न्याय होता दिखा। एक पुलिसकर्मी को डांट पड़ी, एक सस्पेंड हुआ—क्या यही न्याय है? क्या कोई स्वतंत्र जांच दल गठित हुआ?”
केंद्र और राज्य सरकार की चुप्पी पर नाराजगी
केंद्र के हस्तक्षेप को लेकर पूछे गए सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि जब गलत होता है, तब ऊपर-नीचे का भेद समाप्त हो जाता है। उस समय जो सही होता है, वह सही बोलता है और जो गलत होता है, वह गलत। लेकिन यहां कोई बोल ही नहीं रहा।
उन्होंने बताया कि घटना के बाद वे 11 दिनों तक शांति और धैर्य के साथ वहीं बैठे रहे, इस उम्मीद में कि कोई सुधारात्मक कदम उठाया जाएगा। हम साक्षी थे। हमें लगा कि शायद यह स्थानीय स्तर पर हुई नासमझी होगी, लेकिन इतने बड़े मामले के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।”

शंकराचार्य ने कहा कि चारों पीठ के शंकराचार्य में कोई मतभेद नहीं है, सब एक साथ हैं।
चारों शंकराचार्यों को लेकर भ्रम पर दिया जवाब
चारों पीठों के शंकराचार्यों की एकता को लेकर उठ रहे सवालों पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि चारों शंकराचार्य अलग-अलग हैं, जबकि वास्तविकता इसके ठीक विपरीत है।
उन्होंने कहा कि चारों शंकराचार्य सदा से एक हैं। ये कब अलग थे? जो लोग कहते हैं कि चारों शंकराचार्य एक नहीं हैं, वे गलत संदेश फैला रहे हैं। अभी जो घटनाएं हुईं, उनमें चारों शंकराचार्य एक ही थे। कोई अलग नहीं था। उन्होंने यह भी साफ किया कि शंकराचार्य सनातन परंपरा में सर्वोच्च स्थान रखते हैं। उनकी भूमिका को कम करके नहीं आंकी जानी चाहिए।

