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कफ सिरप कांड : सवाल पूछते बच्चे, मां मेरी जान की कीमत मात्र 96 पैसे है ?

  • सवाल यह भी जो एहतियात बरती जानी थी, क्यों नहीं बरती गई

ग्वालियर : मेरी आंखों पर आज मिट्टी की परत है, मेरी जैसी कई नन्हीं जानें भी मिट्टी में दफन, अपनी-अपनी मां के आँचल को तरस रही हैं। हमारी क्या गलती थी, जो हमारे सपनों को पंख मिलने से पहले ही काट दिया गया। जिन डॉक्टरों को माँ के बाद भगवान का दर्जा दिया गया, उन्होंने ही हमारी जान ले ली। माँ आप तो मुझे बीमारी के निदान के लिए डॉक्टर के पास लेकर गईं थीं। लकिन, चंद रुपयों की खातिर, उस डॉक्टर ने हमारी जान से खिलवाड़ कर दिया। अब सवाल है, क्या आने वाली पीढ़ी अस्पताल और डॉक्टर पर भरोसा करेगी, क्या दवा के नाम पर कमीशनखोरी खत्म होगी? क्या देश में खाँसी और बुखार के नाम पर पुख्ता इलाज मिल पायेगा? क्या ये सिस्टम कभी सुधरेगा? क्या सरकार मेरे जैसे मासूम बच्चों को न्याय दे पाएगी? इन उमड़ते सवालों के बीच माँ आप मुझसे वादा करिए कि तू जवाब दिलवाएगी…।

पहले क्यों नहीं की जांच :

अब कफ सिरप के निर्माण से पहले ही उसमें मिलाए जाने वाले रसायनों की अब जांच होगी। औषधि निरीक्षक दवा निर्माता कंपनी में जाकर इनके नमूने लेंगे। इसके अलावा दवा की दुकानों पर बच्चों के कफ सिरप अब डाक्टर के पर्चे पर ही मिलेंगे। दवा दुकानदारों को बताया जाएगा कि वो बिना पर्चे के बच्चों के कफ सिरप न बेचें।

लोगों को वैध लाइसेंस वाले मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने, बिक्री की रसीद लेने, बैच नंबर और दवा की एक्सपायरी डेट जांचने के बारे में भी जागरूक करने के लिए इंटरनेट मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है।

मेडिसिन एप से न मंगवाएं दवा

आजकल रोजमर्रा की जिंदगी एप पर केंद्रित होकर रह गई है। कई ऐसे एप हैं जो बिना डॉक्टर के पर्चा के आपको घर पर ही किसी भी तरह की दवाई मुहैया करवा देते हैं।

मात्र इतनी है जान की कीमत :

बाजार में हजारों की तादाद में कफ सिरप मौजूद हैं। जिले में मेडिकल स्टोर की संख्या 2800 हो चुकी है। हर निजी अस्पताल से लेकर गली मोहल्ले में किराने की दुकान की तरह मेडिकल स्टोर खुल चुके हैं। इनमें से अधिकांश स्टोर पर फार्मासिस्ट तक उपलब्ध नहीं है जिनकी लागत की बात को जाए तो एक रुपए से भी कम है। वहीं इसको 96 से लेकर 110 दस रुपए तक बेचा जा रहा है।

केंद्र सरकार ने 18 दिसंबर 2023 को एक स्पष्ट आदेश जारी किया था कि 4 साल से छोटे बच्चों को क्लोरफेनिरामाइन मेलिएट (2 एमजी) और फिनाइलफ्राइन एचसीएल (5 एमजी) युक्त कफ सिरप नहीं दिए जाएंगे, क्योंकि इनका लाभ कम और नुकसान ज्यादा पाया गया।

आदेश में यह भी अनिवार्य किया गया था कि ऐसी दवाओं के लेबल पर चेतावनी लिखी जाए। लेकिन इस आदेश का पालन नहीं हुआ, न तो दवा कंपनियों ने लेबल बदले, न ही राज्य सरकारों ने इसे लागू करने या जागरूकता फैलाने के लिए कोई ठोस कदम उठाया। इसका दुखद परिणाम मध्य प्रदेश में सामने आया, जहां कोल्ड्रिफ सिरप से 16 से अधिक बच्चों की मौत हो गई। इस सिरप में वही बैन किया हुआ फॉर्मूला (पेरासिटामोल + क्लोरफेनिरामाइन + फिनाइलफ्राइन) था, और बोतल पर कोई चेतावनी नहीं थी।

इन्होंने कहा –

मेडिकल स्टोर की लगातार जांच कर रिकॉर्ड मांगा जा रहा है, जिनके पास सिरप हैं उनसे सूची मांगी जा रही है।

-अनुभूति शर्मा,

ड्रग इंस्पेक्टर, ग्वालियर

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