Breaking
Wed. Mar 4th, 2026

बलदेव के सफाईकर्मियों की अनदेखी पर SDM महावन पर सवाल, न सुनवाई हुई न निरीक्षण

  • नगर पंचायत बलदेव के हालात बिगड़े, अब कर्मचारियों ने जिलाधिकारी से लगाई गुहार

दैनिक उजाला, मथुरा/बलदेव : नगर पंचायत बलदेव में सफाईकर्मियों की गंभीर समस्याओं को लेकर SDM महावन की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि न तो SDM महावन ने सफाईकर्मियों की समस्याएं सुनीं और न ही नगर पंचायत का कोई औचक निरीक्षण किया। इतना ही नहीं, अधिशासी अधिकारी से भी किसी प्रकार का स्पष्टीकरण या जवाब तलब नहीं किया गया, जिससे कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है।


वेतन-पेंशन संकट पर भी नहीं हुई सुनवाई

सफाई कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से वेतन, पेंशन और अन्य देयों को लेकर परेशान हैं। इसके बावजूद SDM महावन द्वारा अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। कर्मचारियों का आरोप है कि कई बार मौखिक व लिखित रूप से समस्या से अवगत कराने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर चुप्पी साधे रखी गई।


नगर पंचायत का निरीक्षण तक नहीं किया

कर्मचारियों और सभासदों का कहना है कि यदि SDM महावन समय-समय पर नगर पंचायत का निरीक्षण करते, तो वेतन और पेंशन जैसी बुनियादी समस्याएं स्वतः सामने आ जातीं।
बिना निरीक्षण और बिना समीक्षा के ही मामले को नजरअंदाज कर दिया गया, जिससे नगर पंचायत के हालात और बिगड़ते चले गए।


ईओ से जवाब तलब न करना बना बड़ा मुद्दा

सबसे गंभीर आरोप यह है कि SDM महावन ने नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी से किसी भी प्रकार का जवाब तलब नहीं किया। न ही यह पूछा गया कि वर्षों से कर्मचारियों को समय पर वेतन और पेंशन क्यों नहीं दी जा रही। इससे यह संदेश गया कि स्थानीय प्रशासन कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा।


अब सफाईकर्मियों ने DM से लगाई गुहार

SDM स्तर पर कोई सुनवाई न होने के बाद अब सफाई कर्मचारियों ने सीधे जिलाधिकारी से गुहार लगाई है। उत्तर प्रदेशीय सफाई मजदूर संघ के माध्यम से जिलाधिकारी को अवगत कराते हुए कर्मचारियों ने मांग की है कि

  • नगर पंचायत की वित्तीय स्थिति की जांच कराई जाए
  • दीनदयाल उपाध्याय नगर विकास योजना के अंतर्गत नए ऋण पर रोक लगे
  • वेतन, पेंशन व लंबित देयों का तत्काल भुगतान सुनिश्चित कराया जाए

हड़ताल की चेतावनी, जिम्मेदारी तय करने की मांग

सफाई कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि अब भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे मजबूरन हड़ताल का रास्ता अपनाएंगे। कर्मचारियों का कहना है कि इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी, जिन्होंने समय रहते न तो निरीक्षण किया और न ही कोई कार्रवाई की।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *