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जीएलए विश्वविद्यालय के साथ जान हापकिंस और लंदन स्कूल करेंगे मलेरिया पर शोध

  • अमेरिकी के प्रसिद्ध नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने दी शोध को लगभग 30 करोड़ रुपए की धनराशि

दैनिक उजाला, मथुरा : मलेरिया जैसी घातक बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए अमेरिका का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ पिछले कई दशकों से निरंतर शोध कर रहा है। इसी के चलते इस वर्ष विभिन्न देशों के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों के वैज्ञानिकों को करीब 30 करोड़ की धनराशि अमेरिका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान ने इस शोध को आगे ले जाने के लिए दी है। इस बड़ी उपलब्धि में जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा भी शामिल है।

मलेरिया पर किए जाने वाले शोध में जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के साथ जान हापकिंस मलेरिया इंस्टीट्यूट, लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रोपिकल मेडिसिन, रीजनल मेड़िकल रिसर्च सेंटर, भुवनेश्वर एवं उडीसा के कम्यूनिटी वेलफेयर सोसाइटी हॉस्पिटल में किया जाएगा।
इस शोध दल में जीएलए विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. हिमांशु गुप्ता का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। डा. हिमांशु गुप्ता लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन में लगभग तीन वर्ष तक मलेरिया पर शोध कर चुके हैं एवं वह मलेरिया पर शोध करने वाले विश्व में श्रेष्ठतम वैज्ञानिकों में शुमार भी हैं। हाल ही में उनको हार्वर्ड विश्वविद्यालय की ओर से सेनेगल देश में हुए मलेरिया को समाप्त करने वाले विशिष्ट वैज्ञानिकों के दल के साथ एक मलेरिया पर होने वाले लीडरशिप कार्यक्रम के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था।

यह शोध दल पूर्वी आदिवासी राज्य उडीसा में शोध करेगा। डा. हिमांशु एवं उनकी टीम मलेरिया संक्रमण से जुडे़ बायोमार्कर का भी मूल्यांकन करेगी, जिससे पूरे भारत में मलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जा सके।

डा. हिमांशु ने बताया कि भारत में मलेरिया के अधिकांश मामलों में पालज्मोडियम वाईवैक्स जिम्मेदार है, जो कि मादा मच्छर के काटने से फैलता है और यह परजीवी महीनों या वर्षां तक शरीर में निष्क्रिय रूप में जिंदा रह सकता है एवं मनुष्य की रोगनिरोधक क्षमता को कभी भी कम होने पर सक्रिय हो सकता है। मलेरिया के संक्रमण को कम करने के लिए इन व्यक्तियों को पहचान करना और उनका उपचार करना मलेरिया उन्मूलन के लिए अत्यन्त आवश्यक है।

लन्दन स्कूल ऑफ हाइजीन एवं ट्रोपिकल मेडिसन के वैज्ञानिक प्रो. सैमुअल वासेमर ने जीएलए विश्वविद्यालय का भ्रमण किया। उन्होंने बताया कि अन्य सहयोगी संस्थान जीएलए विश्वविद्यालय के साथ मिलकर मलेरिया की विभिन्न पहलुओं पर गहन शोध करेंगे, ताकि भारत में मलेरिया उन्मूलन प्रयासों को और मजबूत बनाया जा सके।

जीएलए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने बताया कि विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डा. हिमांशु गुप्ता ने अमेरिका के प्रसिद्ध नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ से यह शोध की राशि हासिल करके संस्थान को गौरवान्वित किया है। यह उल्लेखनीय उपलब्धि विश्वविद्यालय के बायोटेक्लॉजी विभाग की उत्कृष्टता को दर्शाती है एवं वैश्विक सहयोग के प्रति विश्वविद्यालयों के समर्पण की पुष्टि करती है।

जीएलए विश्वविद्यालय के सीईओ नीरज अग्रवाल एवं सीएफओ विवेक अग्रवाल ने विश्वविद्यालय को मिली बड़ी उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने पिछले वर्षों में शोध के क्षेत्र कई उपलब्धियां हासिल की हैं। इसके साथ कई भारत सरकार एवं निजी औद्योगिक संस्थानों द्वारा प्रायोजित शोध परियोजनाओं पर कार्य किया और कर रहे हैं। यही कारण है कि आज विश्वविद्यालय स्तर से 74 से पेटेंट ग्रांट तथा 630 से अधिक पेटेंट पब्लिश हो चुके हैं।

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