मथुरा : विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस हर साल 2 अप्रैल को मनाया जाता है। केएम विश्वविद्यालय के मेडीकल कालेज एंड हॉस्पिटल के बाल रोग विभाग द्वारा रेजींडेस चिकित्सकों ने ऑटिज्म जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति, मेडीकल कालेज के प्राचार्य, अस्पताल के मेडीकल सुप्रीटेंट व डाक्टरों, मेडीकल छात्रों और ऑटिज्म से पीड़ित परिवारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा ऑटिज्म को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इस अवसर पर पोस्टर प्रदर्शनी के विजेताओं में एमबीबीएस के विराट, देवश्री, वंश, उत्कर्षा, युगान्ध्र, सानिकाका को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया एवं विश्व ऑटिज्म जागरूकता पर आधारित वीडियो का प्रदर्शन किया गया। ऑटिज्म को लेकर बाल रोग विभाग की ओपीडी में 3 अप्रैल से 10 अप्रैल तक कैम्प का आयोजन होगा जिसमें इससे ग्रस्त मरीज निःशुल्क परामर्श का लाभ उठा सकेंगे।
जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती मां और श्रीराम दरबार के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके विवि के कुलपति डा. एनसी प्रजापति, मेडीकल प्राचार्य डा. पीएन भिसे, मेडीसिन के विभागध्यक्ष डा. आरपी गुप्ता, बाल रोग विभागाध्यक्ष डा. मनोज कुमार सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर डा. सौरभ ताल्यान, असिटेंट प्रोफेसर डा. पूर्वी सक्सैना ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम का संचालन बाल रोग विभाग की जूनियर रेजींडेस डा. रीर्तिका राय किया।
स्वागत भाषण में केएम विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एनसी प्रजापति ने कहा यह दिन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हमें याद दिलाता है कि हमारे समाज में ऐसे लोग भी हैं जो दुनिया को अलग नजरिए से देखते और समझते हैं। उन्हें सहानुभूति से अधिक, समझ, स्वीकार्यता और सम्मान की आवश्यकता है। ऑटिज्म, जिसे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) भी कहा जाता है, कोई बीमारी नहीं है जिसे ठीक किया जाए। यह दिमाग के काम करने का एक अलग तरीका है। ऑटिज्म से जुड़े लोग दुनिया को, लोगों को और चीजों को अलग नजरिए से महसूस करते हैं। बच्चों के व्यवहार में बदलाव को नजरअंदाज न करें और समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लें।
मेडीकल प्राचार्य डा. पीएन भिसे ने कहा विश्व ऑटिज्म के प्रति हम जागरूकता फैलाने, प्रारंभिक हस्तक्षेप प्रदान करने और यह सुनिश्चित करने के लिए समर्पित हैं कि ऑटिज्म से पीड़ित व्यक्तियों को वह देखभाल मिले जिसके वे हकदार हैं।“
अध्यक्षता भाषण को संबोधित करते हुए बाल रोग विभागाध्यक्ष डा. मनोज कुमार सिंह ने कहा ऑटिज्म डिसऑर्डर स्पेक्ट्रम बच्चों में होने वाला एक न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जिसमें उनके व्यवहार, संवाद क्षमता और सामाजिक विकास पर असर पड़ता है। ऑटिज्म के कुछ सामान्य संकेत बचपन में ही दिखने लगते हैं। जैसे बच्चे का आंखों में कम देखना, बोलने में देरी होना, बार-बार एक ही हरकत करना या दिनचर्या में थोड़ा बदलाव होने पर परेशान हो जाना। कुछ बच्चों को तेज आवाज, रोशनी या कुछ खास चीजों से ज्यादा परेशानी भी हो सकती है। लेकिन हर ऑटिज्म से प्रभावित व्यक्ति अलग होता है। किसी में लक्षण ज्यादा होते हैं, तो किसी में कम।
एसोसिएट प्रोफेसर डा. सौरभ ताल्यान ने कहा समाज में फैली गलतफहमियों को दूर करने के लिए सबसे जरूरी है, दूसरी चीज है स्वीकार्यता। हमें ऑटिज्म वाले लोगों को बदलने की कोशिश करने के बजाय उन्हें वैसे ही स्वीकार करना चाहिए जैसे वे हैं। अगर कोई बच्चा थोड़ा अलग व्यवहार करता है, तो उसे जज करने के बजाय समझने की कोशिश करनी चाहिए। तीसरी और सबसे अहम चीज है सम्मान। हर इंसान की तरह ऑटिज्म से जुड़े लोगों को भी बराबरी का हक है, चाहे वो स्कूल हो, नौकरी हो या समाज। उन्हें भी अपने सपनों को पूरा करने का पूरा अधिकार है। आज के समय में कई संगठन और स्कूल इस दिशा में काम कर रहे हैं। अब पहले की तुलना में लोग ज्यादा जागरूक हो रहे हैं। ऑटिज्म से जुड़े बच्चों के लिए स्पेशल एजुकेशन और थेरेपी जैसी सुविधाएं भी बढ़ रही हैं। अगर ऑटिज्म के लक्षण जल्दी पहचान लिए जाएं, तो सही थेरेपी और सपोर्ट से बच्चों की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। मनो चिकित्सा विभाग के असिटेंट प्रोफेसर डा. हरीश चन्द्रा और डा. नमृता सहित मेडीसन के एचओडी डा. आरके गुप्ता ने कहा ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों में शुरुआती उम्र से ही विकास संबंधी देरी, बोलने में कठिनाई, और सामाजिक संपर्क में कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। समय रहते पहचान और सही उपचार बेहद जरूरी है, ताकि बच्चे को बेहतर जीवन जीने का अवसर मिल सके।
कार्यक्रम को सफल बनाने में बाल रोग विभाग और मनो रोग विभाग सहित अन्य विभागों के जूनियर रेजीडेंस डा. मरीनल, डॉ मोनिका, डॉ निहारिका, डॉ अक्षय, डॉ आस्था, डॉ अर्चिता, डॉ सोनल, डॉ चंदना, डॉक्टर अंकिता ,डॉ वैशाली, डॉ.उर्वशी, डा. सचिन, डॉ अपूर्व डॉ राजकुमार, डॉ मंदीप डॉ प्रतीक, डॉ शाहीन, डॉ निखिल, डा. अमन सहित सभी गायनी के एचओडी डा. धन सिंह, सर्जरी के डा. यशपॉल जिंदल, ईएनटी विभागाध्यक्ष डा. शिवांगी त्रिवेणी तथा सैकड़ों की संख्या में एमबीबीएस छात्र-छात्राएं, बड़ी संख्या में रेसीडेंस चिकित्सक मौजूद रहे।

