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‘हील इन इंडिया समिट 2025’ में साझा किया संस्कृति वेलनेस का योगदान

दैनिक उजाला, मथुरा : देशभर से चिकित्सा और वेलनेस टूरिज्म के विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और वैश्विक प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित होटल ‘द ललित’ में ‘हील इन इंडिया– मेडिकल एंड वेलनेस टूरिज्म समिट 2025’ का आयोजन किया गया। इस भव्य समिट का आयोजन फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन्स ऑफ इंडिया (एफएचआरएआई) द्वारा भारत सरकार के सहयोग से किया गया था। इस समिट के माध्यम से भारत को एक वैश्विक मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म हब के रूप में सशक्त बनाने का उद्देश्य है।

संस्कृति विवि के प्रतिनिधि के रूप में समिट में भाग लेने वाले प्रोफेसर रतीश कुमार ने बताया कि समिट में चार प्रमुख सत्र आयोजित किए गए, जिनमें चिकित्सा पर्यटन, वेलनेस थैरेपी, वैश्विक सहयोग और नीति निर्माण जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विभिन्न देशों के राजनयिकों और भारत के शीर्ष चिकित्सा व वेलनेस विशेषज्ञों ने इन सत्रों में अपने विचार साझा किए। एफएचआरएआई के अध्यक्ष के. श्यामा राजू ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की और भारत की पर्यटन क्षमता पर प्रकाश डाला।

इस महत्वपूर्ण आयोजन में शिक्षा जगत से संस्कृति विश्वविद्यालय को आमंत्रित किया गया था। विवि की ओर से प्रोफेसर रतीश कुमार समिट में वेलनेस टूरिज्म के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के योगदान को साझा किया। एक मुलाकात में प्रो. रतीश कुमार ने सुरिनाम के राजदूत अरुन्कुमार हार्दिएन को संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा चिकित्सा और वेलनेस टूरिज्म के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों, विशेष रूप से संस्कृति वेलनेस सेंटर की विशेषताओं से अवगत कराया। उन्होंने राजदूत को विश्वविद्यालय आने का औपचारिक आमंत्रण भी दिया। साथ ही उन्होंने इथियोपिया के उप मिशन प्रमुख मोलालिन अस्फाव से भी मुलाकात की। दोनों अधिकारियों ने भारत और अफ्रीकी देशों के बीच वेलनेस टूरिज्म और शैक्षणिक सहयोग के विस्तार की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।

प्रो. रतीश ने बताया कि भारत में मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म एक तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है। 2023 में भारत ने मेडिकल टूरिज्म से सात अरब डॉलर से अधिक का राजस्व प्राप्त किया और 2025 तक यह आंकड़ा 13 अरब डॉलर तक पहुँचने की संभावना है। योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा जैसे आयुष आधारित उपचार वैश्विक पर्यटकों को भारत की ओर आकर्षित कर रहे हैं। भारत सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2047 तक देश का पर्यटन क्षेत्र तीन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बने, जिसमें मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

प्रो. रतीश कुमार ने कहा कि संस्कृति विश्वविद्यालय न केवल गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा प्रदान कर रहा है, बल्कि वेलनेस टूरिज्म को शैक्षणिक, अनुसंधान और व्यावसायिक सेवा के स्तर पर भी मजबूती से बढ़ावा दे रहा है। इस समिट में उनकी उपस्थिति विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान को नई दिशा देती है और भारत के वेलनेस विज़न को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से प्रस्तुत करती है।

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