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जीएलए में संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन पर जोर

  • जीएलए में आयोजित संगोष्ठी में संस्कृत के संवर्धन और रोजगार के अवसरों पर चर्चा हुई

दैनिक उजाला, मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग मथुरा के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित हुई। संगोष्ठी में संस्कृत के संवर्धन और रोजगार के अवसरों पर चर्चा हुई।

“नूतन शिक्षा नीति के सन्दर्भ में संस्कृत विषय में रोजगारों की संभावना“ विषयक एक दिवसीय संगोष्ठी में संस्कृत में व्यवसाय के अवसर विषय पर बोलते हुए संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठान दिल्ली के निदेशक डा. चांदकिरण सलूजा ने समाज में व्याप्त अवधारणा पर प्रहार करते हुए कहा कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों में संस्कृत अध्येताओं को रोजगार के अवसरों की कोई कमी नहीं है। अगर आवश्यकता है तो कुछ अलग से चिंतन करने की। यदि हमें लाइब्रेरियन बनना है, तो हमें बी लिब करना ही पड़ेगा। संस्कृत पढ़ने वाला भी बी लिब करता है, तो वह भी लाइब्रेरियन बन सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवाओं में जाने के लिए भी हमें अलग से तैयारी करनी पड़ती है। यहां भी संस्कृत पढ़ने वालों के लिए कोई निषेध नहीं है। फिल्म जगत में भी भरतमुनि के नाट्यशास्त्र को आधार बनाकर हम और अच्छा कार्य कर सकते हैं।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुये जीएलए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने बताया कि अपनी परम्पराओं से हम दूर होते चले जा रहे हैं, जो निश्चय ही विचारणीय है। इसके लिए हमें आध्यात्मिक, सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन शिक्षा प्रणाली पर जोर देकर इसको बनाए रख आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। अपनी संस्कृति को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिए हमें संस्कृत की शरण में आना ही होगा।

मुख्य अतिथि संस्कृत पर जोर डालते हुए बताया…

मुख्य अतिथि जिला विद्यालय निरीक्षक डा. रवीन्द्र सिंह ने संस्कृत पर जोर डालते हुए बताया कि संस्कृत भारत की आत्मा है। आज समाज में संस्कृत के प्रति उदासीनता हमारे नैतिक आध्यात्मिक मूल्यों के ह्रास का मूल कारण है। सरकार द्वारा इस ओर पर्याप्त मात्रा में ध्यान दिया जा रहा है। आवश्यकता है आगे बढ़कर उसका लाभ उठाने की। विशिष्ट अतिथि संस्कृत भारती ब्रज प्रान्त के संगठन मंत्री डा. गौरव नायक ने बताया कि संस्कृत में संभाषण करने की क्षमता वाला कोई भी व्यक्ति वृत्ति विहीन नहीं हो सकता। विशिष्ट वक्ता गौरव गौतम द्वारा संस्कृत माध्यम से अपने विचारों को रखा गया। जिला समन्वयक संगोष्ठी संयोजक श्याम सुन्दर, समग्र शिक्षा माध्यमिक द्वारा सभी अतिथियों का परिचय स्वागत कराया गया एवं कुशल संचालन विजय सिंह द्वारा किया गया।

स्कूल प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर राहुल अरोडा का संगोष्ठी में विशेष सहयोग रहा। संगोष्ठी में उत्साहपूर्वक इंटर कालेज के प्रधानाचार्यों, अध्यापकों, संस्कृत विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं जीएलए विश्वविद्यालय के अध्यापकों ने प्रतिभाग किया।

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