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सेमीकंडक्टर नवाचार पर मंथन, जीएलए में सेमिकॉन शिखर सम्मेलन 10 को

मथुरा : जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग द्वारा 10 जनवरी 2026 को सेमिकॉन शिखर सम्मेलन 2026 का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतिष्ठित सम्मेलन सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम विकास, शोध कार्यों और भविष्य की संभावनाओं पर केंद्रित रहेगा।

इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, नीति-निर्माताओं एवं विद्यार्थियों को एक साझा मंच प्रदान करना है, ताकि ज्ञान का आदान-प्रदान हो सके और नवाचार को प्रोत्साहन मिल सके।

सेमिकॉन शिखर सम्मेलन 2026 के मुख्य अतिथि स्किल कॉउंसिल फॉर ग्रीन जॉब्स के पूर्व CEO भारत सरकार के सलाहकार प्रवीण सक्सेना होंगे। सम्मेलन के दौरान सिलिकॉन लैब्स, नेशनल इंस्ट्रूमेंट्स, नॉर्डिक सेमीकंडक्टर्स तथा एनएक्सपी सेमीकंडक्टर्स जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित कंपनियों के तकनीकी विशेषज्ञ अपने अनुभव और विचार साझा करेंगे।
इस अवसर पर तकनीकी सत्र, परिचर्चाएं तथा उद्योग–शिक्षा संवाद आयोजित किए जाएंगे। साथ ही भारत की सेमीकंडक्टर उद्योग में बढ़ती भूमिका पर विशेष चर्चा होगी, जो आत्मनिर्भर भारत एवं इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण से जुड़ी राष्ट्रीय पहलों के अनुरूप है।

उभरते विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विनय देवलिया ने बताया कि सम्मेलन में वीएलएसआई डिज़ाइन, सेमीकंडक्टर निर्माण आधारित हार्डवेयर, एंबेडेड प्रणाली जैसे उभरते विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही नवोन्मेषी स्टार्टअप, कौशल विकास तथा युवाओं के लिए करियर अवसरों पर भी सार्थक चर्चा की जाएगी।

सह-डीन (शैक्षणिक) प्रोफेसर आशीष शुक्ला के अनुसार, सेमिकॉन शिखर सम्मेलन 2026 के माध्यम से विश्वविद्यालय का लक्ष्य ज्ञान-विनिमय को सशक्त बनाना, उच्च स्तरीय शोध को बढ़ावा देना तथा उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को और अधिक मजबूत करना है।

वहीं, सह-विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष गुप्ता ने बताया कि इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रमुख सेमीकंडक्टर उद्योग, शोध संस्थान, सरकारी संगठन एवं प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों की भागीदारी अपेक्षित है। यह शिखर सम्मेलन जीएलए विश्वविद्यालय को सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में नवाचार और अनुसंधान के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

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