फरीदाबाद/नई दिल्ली : दिल्ली ब्लास्ट केस में पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के कनेक्शन का खुलासा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान से जैश के हैंडलर हंजुल्ला ने दिल्ली धमाके के आरोपी डॉ. मुजम्मिल शकील गनई को बम बनाने के 40 वीडियो भेजे थे।
दोनों को जम्मू के शोपियां का रहने वाले मौलवी इरफान अहमद ने मिलवाया था। इसके बाद व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल तैयार किया था और कई डॉक्टर्स को इससे जोड़ा गया। दिल्ली धमाका भी इसी मॉड्यूल का हिस्सा था।
जांच में यह भी सामने आया है कि हंजुल्ला जैश हैंडलर का कोर्ड नेम हो सकता है। 18 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के नौगाम में लगे जैश पोस्टरों में भी कमांडर हंजुल्ला भैया का नाम था। इसी से जांच एजेंसियों को शक हुआ।

लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए धमाके का सबसे क्लोज सीसीटीवी 12 नवंबर की रात सामने आया।
डॉ. मुजम्मिल आटा चक्की से यूरिया पीसता था
दिल्ली ब्लास्ट केस में गिरफ्तार फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉ. मुजम्मिल, डॉ. शाहीन सईद, डॉ. आदिल अहमद राथर और मौलवी इरफान को NIA ने हिरासत में ले लिया है। इससे पहले, जांच टीम ने फरीदाबाद के धौज गांव में रह रहे एक टैक्सी ड्राइवर के घर से आटा चक्की और कुछ इलेक्ट्रॉनिक मशीनें बरामद कीं।
इसमें मेटल पिघलाने की मशीन भी है। जांच एजेंसी को जुड़े सूत्रों ने बताया कि इसी आटा चक्की में डॉ. मुजम्मिल यूरिया पीसता था, फिर मशीन से उसे रिफाइन करता था। इसके बाद केमिकल मिलाकर विस्फोटक बनाता था। केमिकल अलफलाह यूनिवर्सिटी की लैब से चुराया था।
मुजम्मिल की निशानदेही पर ही ड्राइवर को दबोचा गया है। ड्राइवर ने जांच टीम को बताया कि मुजम्मिल चक्की उसके घर रख आया था। तब उसने इसे बहन का दहेज बताया था। थोड़े दिन बाद वह चक्की धौज ले गया। मुजम्मिल जिस कमरे में यूरिया पीसता था, वहीं से 9 नवंबर को पुलिस ने 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट और अन्य विस्फोटक जब्त किए थे।
उसने धौज से 4 किमी दूर फतेहपुरतगा में एक और कमरा ले रखा था। वह इस कमरे से यूरिया की बोरियां रखता और धौज ले जाता था।। 10 नवंबर को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दूसरे कमरे से 2558 किलो संदिग्ध विस्फोटक बरामद किया था।
ड्राइवर की मुजम्मिल से अस्पताल में पहचान हुई थी
सूत्रों के अनुसार, टैक्सी ड्राइवर ने NIA को बताया कि वह 20 साल से धौज स्थित गांव में अपनी बहन के यहां रहता है। वह सैनिक कॉलोनी स्थित एक स्कूल के लिए कैब चलाता है। करीब चार साल उसके छोटे बेटे पर गर्म दूध गिर गया था। इससे वह झुलस गया और उसे गंभीर हालत में अल फलाह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां डॉ. मुजम्मिल ने उसके बेटे का इलाज किया था। दोनों की जान-पहचान हुई और दोनों में मुलाकात होने लगी।

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने फतेहपुरतगा के कमरे से 2558 किलो यूरिया की कई बोरियां जब्त की थीं।

