- AIMIM चीफ ने कहा कि ईरान पर अमेरिका द्वारा हमला करने के बाद अब कई अरब देश सोचेंगे कि उन्हें परमाणु क्षमता की जरूरत है
नई दिल्ली : अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दावा किया कि अगले पांच सालों में ईरान एक परमाणु शक्ति संपन्न देश बन जाएगा। इस हमले को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने अमेरिका पर कई सवाल खड़े किए हैं।
अमेरिकी हमले और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
ओवैसी ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान के तीन से चार परमाणु संयंत्रों पर किए गए हमले अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन हैं। उनका तर्क है कि ये हमले न केवल ईरान की संप्रभुता के खिलाफ हैं, बल्कि अमेरिका के अपने संविधान के भी विपरीत हैं।
इजरायल को पहुंचा फायदा
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन हमलों से इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फायदा पहुंचा है, जो फिलिस्तीनियों के खिलाफ कथित अत्याचार कर रहे हैं। ओवैसी का मानना है कि अमेरिका का यह कदम गाजा में चल रहे नरसंहार को नजरअंदाज करने का हिस्सा है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ेगा।
अरब देशों को परमाणु क्षमता की जरूरत
AIMIM चीफ ने कहा कि ईरान पर अमेरिका द्वारा हमला करने के बाद अब कई अरब देश सोचेंगे कि उन्हें परमाणु क्षमता की जरूरत है। ये देश सोचेंगे कि अगर हमें इजरायल के हमले से बचना है तो हमें भी न्यूक्लियर पावर चाहिए होगी।
US नीति के बारे में क्या बोले ओवैसी
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि अमेरिकी नीति केवल इजरायल सरकार के अपराधों को छिपाने की है। गाजा में जो हो रहा है, वह नरसंहार है और कोई भी इसके बारे में बात नहीं कर रहा है। कोई यह क्यों नहीं पूछ रहा है कि इजरायल के पास कितने परमाणु भंडार हैं? उन्होंने कहा कि ईरान में इन तीन या चार जगहों पर अमेरिका द्वारा बमबारी करने से वे नहीं रुकेंगे। मेरे शब्दों पर ध्यान दें, यहां तक कि ईरान भी अगले 5 से 10 सालों में ऐसा करेगा, यहां तक कि अन्य देश भी ऐसा करेंगे क्योंकि अब उन्हें एहसास हो गया है कि परमाणु बम और परमाणु हथियार होना ही इजरायल के आधिपत्य के खिलाफ एकमात्र निवारक है।
पाकिस्तान को भी घेरा
AIMIM सांसद ओवैसी ने पाकिस्तान को भी लताड़ लगाई। उन्होंने कहा कि क्या पाकिस्तान अमेरिकी राष्ट्रपति डोलान्ड ट्रंप को इसलिए नोबेल शांति पुरस्कार देना चाह रहा है? जिसने अपने ही देश के संविधान का उल्लंघन किया।

