नई दिल्ली/भोपाल/लखनऊ : देशभर के कई हिस्सों में गुरुवार को भी मकर संक्रांति मनाई जा रही है। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में महाकाल का तिल के तेल से अभिषेक हुआ। भस्म आरती में भी तिल चढ़ाया गया और तिल के लड्डुओं का भोग लगा।
संक्रांति को लेकर गंगा, यमुना और नर्मदा जैसी प्रमुख नदियों के तटों पर लाखों लोग सुबह से डुबकी लगा चुके हैं। प्रयागराज माघ मेले में आज मकर संक्रांति का स्नान पर्व है। संगम में सुबह 9 बजे तक 21 लाख श्रद्धालु स्नान कर चुके हैं। आज करीब डेढ़ करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।
यूपी के वाराणसी के गंगा घाट और पश्चिम बंगाल के गंगासागर में स्नान के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी है। पंजाब के अमृतसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सचखंड श्री दरबार साहिब में पवित्र स्नान किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मकर संक्रांति के अवसर पर अपने आवास पर गायों को चारा खिलाया।

PM आवास पर दुर्लभ पुंगनूर नस्ल की छोटी-छोटी गायें हैं, जिन्हें मोदी हर साल मकर संक्रांति पर खिली धूप में हरा चारा खिलाते हैं।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मकर संक्रांति के अवसर पर गंगा घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र स्नान करने के लिए जमा हुए।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुबह खिचड़ी चढ़ाकर मकर संक्रांति की शुरुआत की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर गायों को चारा खिलाया
उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में भगवान का विशेष अभिषेक
मकर संक्रांति के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे।
प्रयागराज के संगम घाट पर सुरक्षा बढ़ाई गई
माघ मेला क्षेत्र में करीब 10 हजार पुलिसकर्मी तैनात हैं। एटीएस, पीएसी, आरएएफ और होमगार्ड के जवानों के साथ ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से 24 घंटे निगरानी की जा रही है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
अयोध्या में सरयू घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़
मकर संक्रांति के मौके पर सरयू घाट पर पवित्र स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जमा हुए हैं।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में देर रात से लोग डुबकी लगाने पहुुंचे
वाराणसी में मकर संक्रांति के मौके पर गंगा में पवित्र स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
गोरखपुर का गोरखनाथ मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खुला
मकर संक्रांति के मौके पर गोरखनाथ मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं।
गोरक्षपीठ में नेपाल राजपरिवार से खिचड़ी आने की परंपरा क्यों

गुरु गोरखनाथ को मकर संक्रांति पर नेपाल राज परिवार की ओर से खिचड़ी चढ़ाई जाती है। इसके पीछे का इतिहास नेपाल के एकीकरण से जुड़ा है। मान्यता है कि राजा के राजमहल के पास ही गुरु गोरक्षनाथ की गुफा थी। उस समय के राजा ने अपने बेटे राजकुमार पृथ्वी नारायण शाह से कहा कि यदि कभी गुफा में जाएं तो वहां के योगी जो भी मांगे, उसे मना मत करें।
जिज्ञासावश शाह खेलते हुए वहां पहुंच गए और गुरु ने उनसे दही मांगी। राजकुमार अपने माता-पिता के साथ दही लेकर जब गुरु के पास पहुंचे तो उन्होंने दही का आचमन कर युवराज के अंजुलि में उल्टी कर दी और उसे पीने को कहा। युवराज की अंजुलि से दही उनके पैरों पर गिर गई। लेकिन बालक को निर्दोष मानकर नेपाल के एकीकरण का वरदान गुरु ने दे दिया। बाद में इसी राजकुमार ने नेपाल का एकीकरण किया। तभी से नेपाल नरेश और वहां के लोगों के लिए गुरु गोरखनाथ आराध्य देव हैं। राजपरिवार से खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा भी तभी से शुरू हुई जो आज तक चली आ रही है।

