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ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: अखिलेश-राहुल ने क्यों नहीं किए साइन; लोकसभा में अब तक क्या-क्या हुआ?

नई दिल्ली : विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर गंभीर पक्षपात से लेकर विपक्षी महिला सांसदों को झूठे आरोपों के जरिए बदनाम करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ मंगलवार को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे दिया।

तृणमूल कांग्रेस को छोड़ आइएनडीआइए गठबंधन में शामिल सभी विपक्षी पार्टियों के करीब 120 लोकसभा सांसदों ने बिरला को उनके पद से हटाए जाने के लिए दिए अविश्वास प्रस्ताव नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं।

सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे ओम बिरला

तृणमूल ने बिरला को दो दिनों की मोहलत देने की पैरोकारी करते हुए अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर से परहेज किया। स्पीकर बिरला ने विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव नोटिस को आगे की प्रक्रिया के लिए लोकसभा सचिवालय को भेज दिया है। इस बीच बिरला ने फैसला किया है कि महाभियोग प्रस्ताव की प्रक्रिया खत्म होने तक सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे।

विपक्षी दलों के अविश्वास प्रस्ताव के इस नोटिस के साथ ही लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी को धन्यवाद प्रस्ताव पर नहीं बोलने देने के विवाद ने सियासी संग्राम का नया रूख अख्तियार कर लिया है।

लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई, मुख्य सचेतक के सुरेश, सचेतक मोहम्मद जावेद के साथ द्रमुक, सपा, शिवसेना यूबीटी जैसे विपक्षी सांसदों ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को संविधान के अनुच्छेद 94C के तहत ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का यह नोटिस मंगलवार दोपहर को सौंपा।

ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के चार कारण

नोटिस में बिरला के खिलाफ प्रस्ताव लाने के लिए चार कारण बताए गए हैं। पहली बात में कहा गया है कि वह सदन का खुलेआम एकतरफा ढंग से संचालन करते हैं और कई मौकों पर विपक्षी दलों नेताओं को बोलने नहीं दिया गया जो संसद में उनका बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार है।

इसमें दो फरवरी को राष्ट्रपति अभिभाषण धन्यवाद प्रस्ताव पर राहुल गांधी को नहीं बोलने देने का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि यह कोई अकेला मामला नहीं, बल्कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को लगभग हमेशा बोलने नहीं दिया जाता है।

आठ विपक्षी सांसदों को तीन फरवरी को बजट सत्र से मनमाने तरीके से निलंबन को दूसरी वजह बताते हुए कहा गया है कि इन सदस्यों को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग करने के लिए सजा दी जा रही है।

तीसरा कारण चार फरवरी को भाजपा के एक सांसद को दो पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक निजी हमले करने की अनुमति देने को बताते हुए कहा गया है कि स्थापित संसदीय परंपराओं तथा मर्यादा के नियमों की धज्जियां उड़ाने के लिए आसान से एक बार भी इस सांसद को फटकार नहीं लगाई गई।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को ऐसी छूट पर गंभीर आपत्ति करते हुए विपक्ष ने आरोप लगाया है कि हमारे आग्रह के बावजूद इस खास सांसद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई जो आदतन अपराधी है।

विपक्षी महिला सांसदों द्वारा सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमले की तैयारी के आरोप को झूठा बताते हुए नोटिस की चौथी वजह बताया गया है।

कांग्रेस की महिला सांसदों के संदर्भ में बिरला की सदन में टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए नोटिस में कहा गया है ‘यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्यों पर साफ तौर पर झूठे आरोप लगाती हैं और अपमानजनक हैं।’

राहुल गांधी ने क्यों नहीं किए हस्ताक्षर?

अविश्वास प्रस्ताव नोटिस पर राहुल गांधी के हस्ताक्षर नहीं हैं और इस संबंध में कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि लोकसभा में नेता विपक्ष का संवैधानिक पद है और इसलिए संसदीय गरिमा-मर्यादा का ध्यान रखते हुए स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किया है।

नोटिस पर सपा के कई सांसदों के हस्ताक्षर हैं जिसमें डिंपल यादव भी शामिल हैं। मगर इसी तरह अखिलेश यादव ने हस्ताक्षर से परहेज किया है।

कांग्रेस के अनुसार नोटिस देने से पूर्व कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने विपक्षी दलों की बैठक के बाद बिरला से मुलाकात कर टकराव टालने का अंतिम प्रयास किया, मगर बजट चर्चा से पूर्व राहुल गांधी को बोलने देने की विपक्ष की मांग स्पीकर ने स्वीकार नहीं की तब दोपहर सवा बजे के करीब अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंप दिया गया।

अविश्वास प्रस्ताव पर अब आगे क्या?

नियमों के अनुसार, लोकसभा सचिवालय अविश्वास प्रस्ताव नोटिस का परीक्षण करेगा और इसके बाद सदन में रखा जाएगा। नोटिस नियमानुसार पाए जाने पर सदन में अविश्वास प्रस्ताव को बहस और फिर वोटिंग के लिए रखा जाएगा।

वैसे नोटिस आने के बाद परंपरा के अनुसार इसके निष्पादन तक स्पीकर सदन के आसन पर बैठने से परहेज करते हैं और ओम बिरला भी इसी अनुरूप मंगलवार को बजट चर्चा के दौरान आसन पर नहीं बैठे।

एनडीए के पास बहुमत

लोकसभा में एनडीए के पास बहुमत का आंकड़ा है इसलिए अविश्वास प्रस्ताव से बिरला की कुर्सी को कोई खतरा नहीं है। मगर इसकी वजह से संसद में कड़वाहट और टकराव कहीं अधिक तीखी होगी।

पूर्व में तीन लोकसभा अध्यक्षों जीवी मावलंकर, हुकुम सिंह और बलराम जाखड़ के खिलाफ विपक्ष की ओर से अविश्वास प्रस्ताव लाया जा चुका है मगर तीनों ही बार यह खारिज हो गया था।

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