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Wed. Mar 4th, 2026

जयपुर से दिल्ली तक दौड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस, मोदी ने दिखाई झंडी

जयपुर : राजस्थान की पहली वंदे भारत ट्रेन जयपुर से सुबह करीब 11.30 बजे दिल्ली कैंट के लिए रवाना हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअली इस सेमी हाईस्पीड ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। देश की 15वीं वंदे भारत का रेग्यूलर संचालन 13 अप्रैल से अजमेर से दिल्ली कैंट के बीच किया जाएगा। इसके लिए आईआरसीटीसी ने आज से बुकिंग स्टार्ट कर दी है।

इस गाड़ी का विस्तार वाया मारवाड़ जंक्शन होकर आबूरोड तक करने की मांग चल रही है। ऐसा होने पर मारवाड़ को भी वंदे भारत में सफर करने की सुविधा मिल सकेगी। गाड़ी संख्या 09617, जयपुर-दिल्ली कैंट वंदे भारत उद्घाटन स्पेशल रेलसेवा जयपुर से 11 बजे रवाना हुई है। उद्घाटन स्पेशल रेलसेवा मार्ग में गांधीनगर जयपुर, बस्सी, दौसा, बांदीकुई, राजगढ, अलवर, खैरथल, रेवाड़ी, पटौदी रोड, गढ़ी हरसरू व गुडगांव स्टेशनों पर ठहराव की सुविधा दी गई।

अजमेर-दिल्ली कैंट-अजमेर वंदे भारत रेलसेवा का नियमित संचालन 13 अप्रेल 2023 से किया जाएगा। गाड़ी संख्या 20977, अजमेर-दिल्ली कैंट वंदे भारत सुपरफास्ट एक्सप्रेस रेलसेवा सप्ताह में 6 दिन (बुधवार को छोड़कर) अजमेर से सुबह 6.20 बजे रवाना होगी और सुबह 11.35 बजे दिल्ली कैंट पहुंचेगी।

इसी प्रकार गाड़ी संख्या 20978, दिल्ली कैंट-अजमेर वंदे भारत सुपरफास्ट एक्सप्रेस सप्ताह में 6 दिन (बुधवार को छोड़कर) दिल्ली कैंट से शाम 18.40 बजे रवाना होकर रात 11.55 बजे अजमेर पहुंचेगी। इस रेलसेवा में 12 वातानुकुलित कुर्सीयान, 2 वातानुकुलित एक्जीक्यिूटिव कुर्सीयान और 2 ड्राइविंग कार श्रेणी के डिब्बों सहित कुल 16 डिब्बे हैं। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में पाली और सिरोही में भी रेल सेवाओं का जिक्र किया।

ये देश की पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन : PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि तेज रफ्तार से लेकर खूबसूरत डिजाइन तक वंदे भारत संपन्न है। देशभर में ट्रेन का गौरव गान हो रहा है। वंदे भारत ने कई नई शुरुआत की है। वंदे भारत पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन है, जो मेड इन इंडिया है। यह कॉम्पेक्ट और एफिशेंट है, स्वदेसी सेफ्टी सिस्टम से लैस है।

आज यह ट्रेन भारत को विकसित यात्रा की ओर ले जाएगी। हमारा देश का दुर्भाग्य रहा। रेलवे जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था को भी राजनीति का अखाड़ा बना दिया गया। आजादी के बाद भारत को बड़ा रेलवे नेटवर्क मिला था, लेकिन राजनीतिक स्वार्थ हावी रहा।

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