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Wed. Mar 4th, 2026

योगी सरकार के शिक्षा सुधार को ऐसे शिक्षक दिखा रहे ठेंगा

  • फेसबुक पर भी सरकारी शिक्षक का कोई जिक्र नहीं, खुलेआम एक सरकारी शिक्षक बन रहा मंदिर रिसीवर
  • मंदिर रिसीवरगिरी ही परिषदीय शिक्षक का पेशा, अधिकारी मौन

मथुरा : एक तरफ योगी सरकार परिषदीय स्कूलों के शिक्षा सुधार को लेकर पुरजोर कोशिश कर रही है, लेकिन एक शिक्षक ऐसे भी हैं, जो सरकारी अफसरों से गठजोड़ के चलते शायद अपने उच्च प्राथमिक स्कूल का रास्ता भी नहीं जानते। दाऊजी मंदिर का रास्ता उन्हें बखूबी याद है, क्योंकि स्कूल के बजाय पूरा समय मंदिर की रिसीवरगिरी में निकल रहा है और सरकार के प्रयासों को आइना दिखाने में लगे हैं।

योगी सरकार निरंतर परिषदीय स्कूलों की दशा को सुधारने में जुट गई है। सरकार के विभिन्न अखबारों में बेहतर शिक्षा के विज्ञापनों से पता चलता है कि प्रदेश के कई विद्यालय स्मार्ट हो गए हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक परिषदीय विद्यालय भी स्मार्ट हो और बेहतर शिक्षा शिक्षकों के माध्यम से बच्चों को मिल सके। इसके लिए प्रत्येक शहर और गांव के स्कूलों के निरीक्षण करने में बेसिक शिक्षा डायरेक्टर जनरल विजय किरन आनंद जुटे हुए हैं।

अगर सरकार के इन्हीं प्रयासों में शिक्षक भी जुट जाएं तो जल्द ही और आसानी से परिषदीय स्कूल की व्यवस्थाओं को सुधारा जा सकता है, लेकिन नहीं शिक्षक तो दूसरे कार्यों में व्यस्त है। सरकार को आइना दिखाते हुए अफसरों से गठजोड़ कर मंदिर का प्रसाद बांटते हुए उच्च प्राथमिक विद्यालय भैरई में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात रामकटोर पांडेय, जिन्होंने शायद कभी अपने स्कूल का रास्ता देखा हो। अगर देखा होगा तो जांच के लिए एबीआरसी और एबीएसए तथा बीएसए के कहने पर उपस्थिति दर्ज कराने के लिए स्कूल में फोटो खिंचाने चले गए होंगे।

अगर ऐसा नहीं है तो अफसर औचक निरीक्षण करें और गांव वासियों सहित भैरई प्रधान से जानकारी लेकर ऐसे शिक्षक की उपस्थिति और अनुपस्थति का खुलासा करें। बीते दिनों जिलाधिकारी को भैरई प्रधान मूलचन्द्र द्वारा भेजे गए शिकायती पत्र में साफ कहा है कि राम कटोर पांडेय शायद ही कभी स्कूल आते हैं और वेतन निरंतर ले रहे हैं, जो कि सरकार के शिक्षा सुधार को आइना दिखा रहे हैं।

अधिकारियों ने भी कभी शिक्षक से नहीं पूछा शिक्षा का हाल
दाऊजी मंदिर रिसीवर बन बैठे सरकारी शिक्षक रामकटोर अधिकतर प्रशासनिक अधिकारी और जिले के शिक्षा अधिकारियों से दाऊजी के प्रसाद के नाम पर मुलाकात करते हैं। लेकिन मजाल किसी भी अधिकारी ने आज शिक्षक के स्कूल न जाने पर कभी कोई दण्डात्मक कार्यवाही की जहमत उठाई हो। एक प्रसाद ने शिक्षक के स्कूल जाने का रास्ता ही रोक लिया।

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