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Thu. Apr 2nd, 2026

जीएलए भौतिकी विभाग के प्रोफेसरों को मिला यूपीसीएसटी का बड़ा प्रोजेक्ट

  • जीएलए विश्वविद्यालय को ब्लैक होल की गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग का अध्ययन करने हेतु सरकारी अनुदान प्राप्त हुआ

दैनिक उजाला, मथुरा : ब्रह्मांड में स्थित आकाशगंगा के विशाल संग्रह के बारे में और अधिक जानने के लिए उत्तर प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रोफेसरों को शोध परियोजना पर कार्य करने का अवसर दिया है।

उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के द्वारा ब्लैक होल की गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग विकसित करने तथा अन्य उद्देश्यों के चलते परियोजना पर कार्य करने का अवसर जीएलए विश्वविद्यालय भौतिक विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. धर्मवीर सिंह तथा डा. शोभित सचान को मिला है। प्रोफेसरों के साथ विद्यार्थी भी परियोजना के शोध कार्य में जुटेंगे।

डा. धर्मवीर सिंह ने बताया कि ब्रह्मांड सबसे बड़ा है और इसमें अरबों आकाशगंगाएं हैं। एक आकाशगंगा गैस, धूल और अरबों सितारों और उनके सौर मंडल का एक विशाल संग्रह है, जो सभी गुरुत्वाकर्षण द्वारा एक साथ बंधे हुए हैं। हमारी आकाशगंगा को मिल्की वे आकाशगंगा कहा जाता है। पूरे ब्रह्मांड में 10 से घात 22 सोलर सिस्टम हैं। वर्तमान में हम जिस सोलर सिस्टम का प्रयोग करते हैं उसमें 10 से घात 11 मिल्की वे गेलेक्सी सोलर सिस्टम हैं। इसके अलावा पूरे ब्रह्मांड में 10 से घात 11 गेलेक्सी हैं। इन सोलर सिस्टम के बारे में किसी को जानकारी नहीं है।

डा. सिंह कहते हैं कि इतने अधिक सोलर सिस्टम हैं, अगर हर मिनट में एक की गिनती करेंगे तो भी पूरे जीवन में इसका पता लगाना नामुमकिन है। इसके हर पहलू पर पहुंचने के लिए और कई संग्रहों की जानकारी पर शोध करने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद से करीब 13 लाख रूपए की यह परियोजना मिली है। इस परियोजना पर इस तरीके से शोध किया जायेगा, जिससे कि वर्तमान में अध्ययन कर रहे छात्रों और आने वाली युवा पीढ़ी ब्रह्मांड और आकाशगंगा के बारे में आसानी से जानकारी कर सके।

डा. शोभित सचान ने बताया कि आकाशगंगा में बहुत सोलर सिस्टम है और हम केवल अभी एक सोलर पर अटके हुए हैं। विद्युत की प्रवाह अब अधिक से अधिक जगहों पर है। इसमें और क्या परिवर्तन हो रहा है और क्या हो सकता है। इस परियोजना के माध्यम से ऐसे कुछ बिन्दु हमें एकत्रित करने की जरूरत है। भौतिक विज्ञान विभाग के विद्यार्थी भी इस परियोजना में अपने ज्ञान से शोध करेंगे।

जीएलए भौतिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनुज विजय ने गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग का महत्व बताते हुए कहा कि यह दक्षिणी गोलार्ध में इसी तरह की खोज उत्तरी गोलार्ध की खोज को पूरक बनाने के साथ-साथ अध्ययन के लिए अन्य उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक बहुत अच्छा कदम होगा।

डीन रिसर्च प्रो. कमल शर्मा ने पीआई डॉ. धर्म वीर सिंह को बधाई दी और कहा कि सरकार की इसी तरह की परियोजनाएं जीएलए विश्वविद्यालय के शोध को एक नया आयाम प्रदान करेंगी।

जीएलए के कुलपति प्रो. अनूप कुमार गुप्ता एवं कुलसचिव अशोक कुमार सिंह ने शिक्षकों को उनकी उपलब्धि के लिए बधाई दी।

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